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अनियोजित विकास की मिसाल बना नवनिर्मित शवदाह गृह
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शारदा घाट के समीप बना नवनिर्मित शवदाह गृह।
- फोटो : TANAKPUR
टनकपुर (चंपावत)। शारदा घाट पर 737.38 लाख रुपये खर्च करके एक साल पहले शवदाह गृह बना दिया गया। लेकिन अब भी शारदा के खुले तट पर ही अंतिम संस्कार हो रहे हैं। इसकी वजह शवदाह तक जाने का रास्ता नहीं होना है। इसे अनियोजित विकास न कहा जाए तो क्या कहा जाए।
वर्ष 2013 की बाढ़ ने लाखों की लागत से बना शारदा स्नानघाट के साथ शवदाह गृह और क्रियाशाला का नामोनिशान मिटा दिया था। एक साल पहले ही सिंचाई विभाग की देखरेख में स्नानघाट के दक्षिणी छोर पर क्रियाशाला और शवदाह गृह बनाया गया था। तब उम्मीद थी कि शवदाह गृह बनने से शारदा तट पर अंतिम संस्कार से फैलने वाली गंदगी से छुटकारा मिलेगा और नदी प्रदूषित होने से भी बचेगी, लेकिन यह उम्मीद अनियोजित विकास की भेंट चढ़ गई। शवदाह गृह का निर्माण करने के बावजूद वहां जाने के लिए रास्ता नहीं बनाया गया। परिणाम स्वरूप बनने के सालभर बाद भी शवदाह गृह का उपयोग नहीं हो रहा है। लोग आज भी स्नानघाट के उत्तरी छोर पर शारदा के खुले तट पर अंतिम संस्कार कर रहे हैं। हालांकि कार्यदायी सिंचाई विभाग ने शवदाह के लिए तटबंध से रास्ता प्रस्तावित किया था, लेकिन शवदाह गृह बनने के बाद बाढ़ सुरक्षा के लिए एनएचपीसी ने तटबंध से ऊंचा वायरक्रेट लगा दिया। इससे शवदाह गृह जाने का रास्ता बंद हो गया है। (संवाद)
शवदाह गृह के लिए तटबंध की सीढ़ियों से रास्ता प्रस्तावित था, लेकिन एनएचपीसी की ओर से तटबंध की सुरक्षा के लिए लगाए गए वायरक्रेटों से रास्ते की समस्या है। तटबंध और शवदाह गृह के बीच छह मीटर का फासला है। इसमें रास्ता बनाने का विकल्प तलाशा जा रहा है।
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- सतीश कुमार, जेई सिंचाई विभाग टनकपुर।
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वर्ष 2013 की बाढ़ ने लाखों की लागत से बना शारदा स्नानघाट के साथ शवदाह गृह और क्रियाशाला का नामोनिशान मिटा दिया था। एक साल पहले ही सिंचाई विभाग की देखरेख में स्नानघाट के दक्षिणी छोर पर क्रियाशाला और शवदाह गृह बनाया गया था। तब उम्मीद थी कि शवदाह गृह बनने से शारदा तट पर अंतिम संस्कार से फैलने वाली गंदगी से छुटकारा मिलेगा और नदी प्रदूषित होने से भी बचेगी, लेकिन यह उम्मीद अनियोजित विकास की भेंट चढ़ गई। शवदाह गृह का निर्माण करने के बावजूद वहां जाने के लिए रास्ता नहीं बनाया गया। परिणाम स्वरूप बनने के सालभर बाद भी शवदाह गृह का उपयोग नहीं हो रहा है। लोग आज भी स्नानघाट के उत्तरी छोर पर शारदा के खुले तट पर अंतिम संस्कार कर रहे हैं। हालांकि कार्यदायी सिंचाई विभाग ने शवदाह के लिए तटबंध से रास्ता प्रस्तावित किया था, लेकिन शवदाह गृह बनने के बाद बाढ़ सुरक्षा के लिए एनएचपीसी ने तटबंध से ऊंचा वायरक्रेट लगा दिया। इससे शवदाह गृह जाने का रास्ता बंद हो गया है। (संवाद)
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शवदाह गृह के लिए तटबंध की सीढ़ियों से रास्ता प्रस्तावित था, लेकिन एनएचपीसी की ओर से तटबंध की सुरक्षा के लिए लगाए गए वायरक्रेटों से रास्ते की समस्या है। तटबंध और शवदाह गृह के बीच छह मीटर का फासला है। इसमें रास्ता बनाने का विकल्प तलाशा जा रहा है।
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- सतीश कुमार, जेई सिंचाई विभाग टनकपुर।