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Champawat News: नेफ्रोटिक सिंड्रोम है खतरनाम, रखें ध्यान
Wed, 18 Jun 2025 10:52 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Wed, 18 Jun 2025 10:52 PM IST
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चंपावत। जिले में गुर्दे की घातक बीमारी नेफ्रोटिक सिंड्रोम लोगों में घर कर रही है। इस बीमारी से जूझ रहे लोगों को शरीर में सूजन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो जाती हैं। बीमारी एक से 12 साल के बच्चों में अधिक होती है जबकि बड़ों में भी कभी कभाार यह बीमारी देखने को मिलती है। अस्पताल में हर माह एक से दो मामले आते हैं। दवा महंगी होने पर सभी के लिए इलाज कराना आसान नहीं है।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. दीपक रावत ने बताया कि नेफ्रोटिक सिंड्रोम बीमारी में गुर्दे अधिक प्रोटीन को मूत्र में लीक करते हैं। इससे शरीर में प्रोटीन की कमी हो जाती है। बीमारी के कारण चेहरे, आंखों के आसपास, पेट, पैर और टखनों में सूजन आ जाती है। लीवर में एल्बुमिन प्रोटीन का स्तर कम हो जाता है। रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में थकान और कमजोरी महसूस होना, भूख कम लगना, तरल पदार्थ के जमा होने के कारण वजन बढ़ने लगता है।
बताया कि इस बीमारी से ग्रसित मरीज को एल्बुमिन प्रोटीन की बोतल चढ़ाई जाती है। इसकी कीमत साढ़े छह हजार से आठ हजार रुपये तक होती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में एक व्यक्ति का इलाज अस्पताल में किया जा रहा है।
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इनसेट
समय पर न हो इलाज तो जान पर भी बन सकती है
डॉ. दीपक रावत ने बताया कि मरीज को नियमित रूप से चिकित्सक से सलाह लेते रहना चाहिए। जरा सी लापरवाही मरीज की जान ले सकती है। मरीज को बीमारी के दौरान आहार और जीवनशैली पर विशेष ध्यान देना होता है। वसा और प्रोटीन युक्त भोजन नहीं लेना चाहिए।
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जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. दीपक रावत ने बताया कि नेफ्रोटिक सिंड्रोम बीमारी में गुर्दे अधिक प्रोटीन को मूत्र में लीक करते हैं। इससे शरीर में प्रोटीन की कमी हो जाती है। बीमारी के कारण चेहरे, आंखों के आसपास, पेट, पैर और टखनों में सूजन आ जाती है। लीवर में एल्बुमिन प्रोटीन का स्तर कम हो जाता है। रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में थकान और कमजोरी महसूस होना, भूख कम लगना, तरल पदार्थ के जमा होने के कारण वजन बढ़ने लगता है।
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बताया कि इस बीमारी से ग्रसित मरीज को एल्बुमिन प्रोटीन की बोतल चढ़ाई जाती है। इसकी कीमत साढ़े छह हजार से आठ हजार रुपये तक होती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में एक व्यक्ति का इलाज अस्पताल में किया जा रहा है।
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समय पर न हो इलाज तो जान पर भी बन सकती है
डॉ. दीपक रावत ने बताया कि मरीज को नियमित रूप से चिकित्सक से सलाह लेते रहना चाहिए। जरा सी लापरवाही मरीज की जान ले सकती है। मरीज को बीमारी के दौरान आहार और जीवनशैली पर विशेष ध्यान देना होता है। वसा और प्रोटीन युक्त भोजन नहीं लेना चाहिए।