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बुरे हालः 25 दिन में मिली महज 175 रुपये की मजदूरी

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Wed, 15 Apr 2020 12:55 PM IST
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Nepali labour earned just 175 rupees in 25 days.
चंपावत में काम की तलाश करते नेपाली मजदूर। - फोटो : AMAR UJALA
अमर उजाला ब्यूरो
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चंपावत। कोरोना वायरस से बचाव के लिए 22 मार्च से जारी लॉकडाउन अभी लंबा चलेगा। अब इसे 3 मई तक बढ़ाया गया है। संक्रमण के खतरे से बचने को ये कदम जरूरी भी है, लेकिन काम ठप होने से यहां अटके सैकड़ों मजदूरों के सामने ढेरों चुनौतियां हैं। नेपाल के कर्णाली के मोगू के चार मजदूर मान बहादुर, भगवत, मान प्रसाद, पदम दत्त भी लॉकडाउन से चंपावत में फंसे हैं। यहां काम के सिलसिले में लंबे समय से वे परिवार के साथ रहते हैं। लेकिन लॉकडाउन के बाद से उन्हें काम नहीं मिल रहा और नहीं वे गेहूं की कटाई के लिए अपने गांव जा पा रहे हैं। चंपावत में ये मजदूर हर रोज की तरह बुधवार को भी काम की तलाश में सुबह सात बजे आए और तीन घंटे से ज्यादा इंतजार कर मायूस लौटे। ये मजदूर बताते हैं इस दौरान अब तक 25 दिनों में इन चारों मजदूरों को कुल मिलाकर 700 रुपये की मजदूरी मिली है। प्रशासन की ओर से कुछ खाद्य सामग्री मिली, जिससे चूल्हा जल रहा है। पर ये भी नाकाफी है। परिवार के साथ रहने वाले इन मजदूरों की सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे बच्चों के लिए दूध की हो रही है। किराये का भी महीना पूरा होने से उन्हें चिंता सता रही है। वहीं सब्जी, किराना, पशु आहारा सहित चुनिंदा वाहनों के ही आने से चंपावत में बमुश्किल आठ से दस मजदूरों को ही ढुलान का काम मिल पा रहा है। वैसे जिले में तीन हजार से अधिक दिहाड़ी मजदूरों के भी कमोबेश ऐसे ही हाल हैं।
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