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रोजगार के लिए नेपाली नागरिक फिर भारत भरोसे
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धारचूला में झूलापुल खुलने के बाद आवाजाही करते लोग। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : PITHORAGARH
बनबसा (चंपावत)। नेपाल में रोजगार नहीं मिलने से नेपाली नागरिक एक बार फिर भारत का रुख करने लगे हैं। बेरोजगारी के चलते वे कोरोना के डर को भी दरकिनार कर रहे हैं। बनबसा सीमा से प्रतिदिन नेपाली नागरिक रोजगार की तलाश में भारत में प्रवेश कर रहे हैं। पिछले तीन माह में आठ हजार से अधिक नेपाली नागरिक भारत पहुंच चुके हैं।
कोरोना महामारी के चलते हुए लॉकडाउन के बाद भारत में कार्य करने वाले नेपाली नागरिक बहुतायत में स्वदेश लौटे थे। नेपाल में रोजगार नहीं होने के कारण उन्हें फिर भारत की शरण लेने को विवश होना पड़ रहा है। नेपाली नागरिक भारत में विभिन्न निर्माण कार्य, बागानों, होटलों, चौकीदारी और घरों पर कार्य करने के लिए आते हैं। नेपाल के मुकाबले अधिक मजदूरी मिलने के कारण भी ये लोग भारत में काम करना लाभदायक मानते हैं।
इमिग्रेशन चेकपोस्ट अधिकारी इंद्र सिंह ने बताया कि प्रतिदिन औसतन 70-100 नेपाली नागरिक भारत आ रहे हैं। इधर नेपाली नागरिकों के भारत आने से यहां के श्रमिकों के आगे रोजगार का खतरा मंडराने लगा है। उधर, नेपाल सरकार ने अभी तक भारतीय नागरिकों के नेपाल प्रवेश पर रोक लगा रखी है, जिससे नेपाल में विभिन्न व्यवसाय करने वाले भारतीय बेरोजगार हो चुके हैं।
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बंद दुकानों का किराया देने को मजबूर
नेपाल के कंचनपुर जिले में भारत के बनबसा, खटीमा, नानकमत्ता, सितारगंज, पीलीभीत, बरेली के लोग वर्षों से कारोबार करते चले आ रहे हैं। लॉकडाउन के बाद इन लोगों के सामने आर्थिक संकट आ गया है। नाम नहीं छापने की शर्त में भारतीय कारोबारियों ने बताया कि सैलून, सब्जी, बूचड़, वर्कशाप, मिठाई, कपड़े आदि का काम करने वाले करीब 150 लोगों को बंद दुकानों का किराया देने को विवश होना पड़ रहा है।
नेपाल ने नहीं दी है भारतीयों को प्रवेश की अनुमति
भारत सरकार ने कोराना महामारी के दौरान भी नेपाली नागरिकों को रोजगार की खातिर भारत आने की अनुमति दी है। नेपाल सरकार ने अब भी भारतीय नागरिकों को नेपाल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी है, जिससे कई भारतीय बेरोजगार हो गए हैं। बनबसा व्यापार मंडल अध्यक्ष भरत भंडारी ने कहा कि नेपाल सरकार बनबसा के व्यापारियों को वसूली के लिए भी सप्ताह में एक दिन नेपाल जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
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कोरोना महामारी के चलते हुए लॉकडाउन के बाद भारत में कार्य करने वाले नेपाली नागरिक बहुतायत में स्वदेश लौटे थे। नेपाल में रोजगार नहीं होने के कारण उन्हें फिर भारत की शरण लेने को विवश होना पड़ रहा है। नेपाली नागरिक भारत में विभिन्न निर्माण कार्य, बागानों, होटलों, चौकीदारी और घरों पर कार्य करने के लिए आते हैं। नेपाल के मुकाबले अधिक मजदूरी मिलने के कारण भी ये लोग भारत में काम करना लाभदायक मानते हैं।
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इमिग्रेशन चेकपोस्ट अधिकारी इंद्र सिंह ने बताया कि प्रतिदिन औसतन 70-100 नेपाली नागरिक भारत आ रहे हैं। इधर नेपाली नागरिकों के भारत आने से यहां के श्रमिकों के आगे रोजगार का खतरा मंडराने लगा है। उधर, नेपाल सरकार ने अभी तक भारतीय नागरिकों के नेपाल प्रवेश पर रोक लगा रखी है, जिससे नेपाल में विभिन्न व्यवसाय करने वाले भारतीय बेरोजगार हो चुके हैं।
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बंद दुकानों का किराया देने को मजबूर
नेपाल के कंचनपुर जिले में भारत के बनबसा, खटीमा, नानकमत्ता, सितारगंज, पीलीभीत, बरेली के लोग वर्षों से कारोबार करते चले आ रहे हैं। लॉकडाउन के बाद इन लोगों के सामने आर्थिक संकट आ गया है। नाम नहीं छापने की शर्त में भारतीय कारोबारियों ने बताया कि सैलून, सब्जी, बूचड़, वर्कशाप, मिठाई, कपड़े आदि का काम करने वाले करीब 150 लोगों को बंद दुकानों का किराया देने को विवश होना पड़ रहा है।
नेपाल ने नहीं दी है भारतीयों को प्रवेश की अनुमति
भारत सरकार ने कोराना महामारी के दौरान भी नेपाली नागरिकों को रोजगार की खातिर भारत आने की अनुमति दी है। नेपाल सरकार ने अब भी भारतीय नागरिकों को नेपाल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी है, जिससे कई भारतीय बेरोजगार हो गए हैं। बनबसा व्यापार मंडल अध्यक्ष भरत भंडारी ने कहा कि नेपाल सरकार बनबसा के व्यापारियों को वसूली के लिए भी सप्ताह में एक दिन नेपाल जाने की अनुमति नहीं दे रही है।