{"_id":"6032a30f8ebc3ee8ec795247","slug":"more-money-than-development-in-liquor-champawat-news-hld415651254","type":"story","status":"publish","title_hn":"शराब में उड़ रही विकास से अधिक रकम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शराब में उड़ रही विकास से अधिक रकम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंपावत। चंपावत के पास का एक गांव। एक अधेड़ व्यक्ति घर में बनाए घी को चुपचाप बेच कर इस रकम से शराब पी जाता है। पत्नी, बेटी और बेटे ने काफी समझाने-बुझाने की कोशिश की, लेकिन नशे की लत से निजात नहीं मिल सकी। नतीजा परिवार में कलह और कोहराम। यह पहाड़ में नशे की लत की एक बानगी भर है। जिले में पियक्कड़ों की बढ़ती संख्या और शराब पर पानी की तरह बहने वाली रकम ने चिंता बढ़ा दी है। चालू वित्तीय वर्ष में जिले में करीब 161.36 करोड़ रुपये शराब में उड़े। ये रकम जिले की 2020-21 की जिला योजना, राज्य योजना और वाह्य सहायतित योजना से 22.52 करोड़ रुपये अधिक है।
विकास में फिसड्डी और गरीबी में अव्वल चंपावत जिला शराबखोरी में आगे है। मदहोशी का आलम यह है कि जिले में शराब का धंधा पांच साल में 80 प्रतिशत और शराबियों की संख्या 24 प्रतिशत बढ़ गई है। शराबियों की संख्या 27651 से बढ़कर 34424 हो गई। आबकारी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक ये पियक्कड़ सालभर में 161.36 करोड़ रुपये की शराब पी जाते हैं। यानी रोजाना 44.21 लाख रुपये शराब में उड़ रहा है। एक पियक्कड़ औसतन हर माह 3906 रुपये शराब पर खर्च कर रहा है। वर्ष 2015-16 में शराब से 25.44 करोड़ रुपये टैक्स मिला, जो इस साल बढ़कर 44.09 करोड़ रुपये हो गया। जिले में सालभर में 2933856 बोतलों (देसी बोतलें 1214208 और विदेशी 1719648 बोतलों) की बिक्री हुई। इसमें करीब 161.36 करोड़ रुपये उड़े। ये रकम चंपावत जिले की 2020-21 की जिला योजना, राज्य योजना और वाह्य सहायतित योजना से 22.52 करोड़ रुपये अधिक है।
कोट...
चंपावत जिले में देशी-विदेशी शराब की 15 दुकानों से रोजाना औसतन 8038 बोतलों की बिक्री है। शराब की दुकानों से हुई निविदाओं से पांच साल में 80 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।- तपन कुमार पांडेय, जिला आबकारी अधिकारी।
विज्ञापन
2020-21 में चंपावत जिले में विभिन्न मदों में खर्च होने वाली रकम
जिला योजना : 38.84 करोड़ रुपये
राज्य योजना : 82.28 करोड़ रुपये
वाह्य सहायतित : 17.71 करोड़ रुपये
कुल योग : 138. 83 करोड़ रुपये
2020-21 में चंपावत जिले में शराब पर खर्च रकम: 161.36 करोड़ रुपये
13 हजार से अधिक लोग लीवर के रोग से ग्रस्त
चंपावत। शराबियों की बढ़ती संख्या से लीवर सिरोसिस के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। जिलेभर में लीवर से संबंधित रोगियों की संख्या 13 हजार से अधिक हैं। जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि डिप्रेशन, पेनक्रियाइटाइटिस और बेचैनी पैदा कर रहा है। लंबे समय तक शराब के अधिक सेवन से शरीर में इंसुलिन की पर्याप्त मात्रा नहीं बन पाती है। इससे पियक्कड़ डायबिटीज का मरीज बन जाता है। (ब्यूरो)
जागरूकता कार्यक्रम से भी कम नहीं हो रहे शराबी
चंपावत। शराब की लत के खिलाफ चलने वाले जागरूकता कार्यक्रम भी खास असर नहीं छोड़ सके हैं। कुमाऊंनी कवि प्रकाश जोशी शूल कविता संग्रह झन पिया शराब (शराब मत पीना) के जरिये शराब और दूसरे नशों के खिलाफ अलख जगाने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें परिवार-समाज में नशे की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की दिल को छूने वाली अपील की गई है। झन खाया अत्तर-गांजो, झन पिया शराब। बिड़ि-सिगरट-सुर्ति दाज्यू, भौतै छन खराब। (चरस, गांजा, शराब, बीड़ी, सिगरेट और सुर्ती को नुकसानदायक बताते हुए इन्हें न पीने को प्रेरित किया गया है।) (ब्यूरो)
विज्ञापन
विकास में फिसड्डी और गरीबी में अव्वल चंपावत जिला शराबखोरी में आगे है। मदहोशी का आलम यह है कि जिले में शराब का धंधा पांच साल में 80 प्रतिशत और शराबियों की संख्या 24 प्रतिशत बढ़ गई है। शराबियों की संख्या 27651 से बढ़कर 34424 हो गई। आबकारी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक ये पियक्कड़ सालभर में 161.36 करोड़ रुपये की शराब पी जाते हैं। यानी रोजाना 44.21 लाख रुपये शराब में उड़ रहा है। एक पियक्कड़ औसतन हर माह 3906 रुपये शराब पर खर्च कर रहा है। वर्ष 2015-16 में शराब से 25.44 करोड़ रुपये टैक्स मिला, जो इस साल बढ़कर 44.09 करोड़ रुपये हो गया। जिले में सालभर में 2933856 बोतलों (देसी बोतलें 1214208 और विदेशी 1719648 बोतलों) की बिक्री हुई। इसमें करीब 161.36 करोड़ रुपये उड़े। ये रकम चंपावत जिले की 2020-21 की जिला योजना, राज्य योजना और वाह्य सहायतित योजना से 22.52 करोड़ रुपये अधिक है।
विज्ञापन
कोट...
चंपावत जिले में देशी-विदेशी शराब की 15 दुकानों से रोजाना औसतन 8038 बोतलों की बिक्री है। शराब की दुकानों से हुई निविदाओं से पांच साल में 80 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।- तपन कुमार पांडेय, जिला आबकारी अधिकारी।
विज्ञापन
2020-21 में चंपावत जिले में विभिन्न मदों में खर्च होने वाली रकम
जिला योजना : 38.84 करोड़ रुपये
राज्य योजना : 82.28 करोड़ रुपये
वाह्य सहायतित : 17.71 करोड़ रुपये
कुल योग : 138. 83 करोड़ रुपये
2020-21 में चंपावत जिले में शराब पर खर्च रकम: 161.36 करोड़ रुपये
13 हजार से अधिक लोग लीवर के रोग से ग्रस्त
चंपावत। शराबियों की बढ़ती संख्या से लीवर सिरोसिस के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। जिलेभर में लीवर से संबंधित रोगियों की संख्या 13 हजार से अधिक हैं। जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि डिप्रेशन, पेनक्रियाइटाइटिस और बेचैनी पैदा कर रहा है। लंबे समय तक शराब के अधिक सेवन से शरीर में इंसुलिन की पर्याप्त मात्रा नहीं बन पाती है। इससे पियक्कड़ डायबिटीज का मरीज बन जाता है। (ब्यूरो)
जागरूकता कार्यक्रम से भी कम नहीं हो रहे शराबी
चंपावत। शराब की लत के खिलाफ चलने वाले जागरूकता कार्यक्रम भी खास असर नहीं छोड़ सके हैं। कुमाऊंनी कवि प्रकाश जोशी शूल कविता संग्रह झन पिया शराब (शराब मत पीना) के जरिये शराब और दूसरे नशों के खिलाफ अलख जगाने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें परिवार-समाज में नशे की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की दिल को छूने वाली अपील की गई है। झन खाया अत्तर-गांजो, झन पिया शराब। बिड़ि-सिगरट-सुर्ति दाज्यू, भौतै छन खराब। (चरस, गांजा, शराब, बीड़ी, सिगरेट और सुर्ती को नुकसानदायक बताते हुए इन्हें न पीने को प्रेरित किया गया है।) (ब्यूरो)