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अच्छी पहल:संघ के घाटे के बावजूद दुग्ध उत्पादकों को मिल रही राहत

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 23 Apr 2020 10:15 PM IST
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Milk producers are getting relief despite the Union's losses
चंपावत जिले में दुग्ध उत्पादकों को दूध एकत्र करने के लिए प्रेरित करते दुग्ध संघ प्रबंधक राजेश मे? - फोटो : CHAMPAWAT
अच्छी पहल:
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संघ के घाटे के बावजूद दुग्ध उत्पादकों को मिल रही राहत
लॉकडाउन में तीन दिन छोड़ दुग्ध उत्पादकों से रोज लिया गया दूध
चंद्रशेखर जोशी
चंपावत। लॉकडाउन में जहां छोटे-बड़े हर तरह के कारोबार और अर्थव्यवस्था पर बुरी तरह चोट हुई, वहीं इसके उलट चंपावत जिले के करीब 4700 दुग्ध उत्पादकों को इस झटके को नहीं सहना पड़ा। खपत में भारी गिरावट आने के बावजूद दूध को देहरादून भेज कर इसकी भरपाई की गई। मां पूर्णागिरि मेला निरस्त होने और ऊधमसिंह नगर द्वारा इंकार करने के बाद दूध को देहरादून भेजने से संघ को कुछ घाटा जरूर हुआ, लेकिन इससे जिले के दुग्ध उत्पादकों को राहत मिली।
प्रदेश में 22 मार्च से शुरू लॉकडाउन की वजह से 90 प्रतिशत से अधिक कारोबारी गतिविधियां बंद हैं। लेकिन शुरू के तीन दिन छोड़ जिले के दुग्ध उत्पादक इस झटके से बचे रहे। इसकी वजह रही संघ द्वारा दुग्ध उत्पादकों के दूध का खरीदा जाना। दुग्ध संघ ने भाड़े में दो रुपये किमी ज्यादा लगने और दूध की कीमत एक रुपये कम मिलने के बावजूद देहरादून भेजने का निर्णय लिया। इसका असर यह हुआ कि लॉकडाउन के बावजूद जिले की 195 समितियों के 4700 दुग्ध उत्पादकों का दूध बर्बाद नहीं हुआ।
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फोटो 23 सीपीटी 01पी
कोट
जिले के दुग्ध उत्पादकों में 73 फीसदी महिलाएं हैं। इसके मद्देनजर संघ ने किसी भी हाल में समितियों से एकत्र किए जाने वाले दूध को बंद नहीं करने का निर्णय लिया। ऊधमसिंह नगर और खटीमा जाने वाला दूध बंद होने पर रोजना दस हजार लीटर दूध को देहरादून भेजा जा रहा है।
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पार्वती जोशी, अध्यक्ष, दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ।
(फोटो 23 सीपीटी 02पी)
बाक्स
दुग्ध उत्पादकों को मिला बोनस
चंपावत। दुग्ध संघ ने जिले के 4700 दुग्ध उत्पादकों को राहत देने के लिए सात माह का कुल 52 लाख रुपये का बोनस भी दे दिया है। दुग्ध संघ के प्रबंधक राजेश मेहता का कहना है कि अगस्त 2018 से मार्च 2019 तक का प्रति लीटर चार रुपये बोनस दुग्ध उत्पादकों के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया है। ब्यूरो
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