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जल संकट के चलते छात्रावासों में ताले लटके
अमर उजाला ब्यूरो, लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Sat, 09 Sep 2017 10:16 PM IST
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पेयजल किल्लत के चलते बंद पड़ा लोहाघाट राजकीय पॉलीटेक्निक का छात्रावास।
- फोटो : अमर उजाला
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पेयजल संकट के चलते राजकीय पॉलीटेक्निक कॅालेज लोहाघाट के छात्रावासों में ताले लटके हुए हैं। इनमें रहने वाले छात्र-छात्राएं छात्रावास के बजाय बाहर किराए में रहने को मजबूर हैं। इनमें दो छात्रावास में पिछले तीन महीने से बंद पड़े हुए हैं। एक नव निर्मित छात्रावास पेयजल की इस समस्या के चलते चालू नहीं हो पा रहा है।
लोहाघाट के पॉलीटेक्निक कॉलेज में पेयजल आपूर्ति के लिए धर्मघर के नीचे बनस्वाड़ गधेरे से पेयजल योजना बनाई गई है। इस गधेरे से ऊपर शंखपाल में पहले नगर पंचायत द्वारा कूड़ा निस्तारित किया जाता था। पिछले साल हुई भारी वर्षा से कूड़े का मलबा कालेज की पेयजल योजना में आने से वह क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब से इसे ठीक नहीं किया जा सका है। योजना से पूरा पानी कॉलेज में नहीं पहुंच पा रहा है। पेयजल समस्या के कारण यहां के तीनों छात्रावासों में ताले लटके हुए हैं। इससे न केवल छात्र-छात्राओं की जेब पर मार तो पड़ ही रही है, इसके अलावा कॉलेज को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है।
पॉलीटेक्निक कॉलेज में हर रोज 15 हजार लीटर से अधिक पानी की जरूरत है। लेकिन इस योजना से मात्र पांच हजार लीटर ही पानी की आपूर्ति हो पा रही है। कॉलेज में गंभीर जल संकट बना हुआ है। पेयजल समस्या के चलते कॉलेज पुराने दोनों छात्रावास जून माह में खाली करा दिए थे। इन दोनों छात्रावासों में 30 छात्राएं और 60 छात्र रहते हैं। 50 छात्राओं के लिए बना नया छात्रावास पेयजल की किल्लत के चलते चालू ही नहीं हो पाया है।
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पॉलीटेक्निक कॉलेज में संचालित के विभिन्न ट्रेडों में इस समय 400 छात्र-छात्राएं हैं। पानी की कमी के चलते सफाई पर भी असर पड़ रहा है। कॉलेज में 38 आवासीय भवन हैं, जिनमें से 20 भवनों में कर्मचारी रहते हैं। जिन्हें भी पेयजल समस्या से काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। जल संस्थान के अभियंता पवन बिष्ट का कहना है कि उक्त पेयजल योजना कॉलेज की अपनी पेयजल योजना है।
1500 रुपये महीने का नुकसान झेल रहे छात्र
पॉलीटेक्निक के छात्र हिम्मत राम, अमन कुमार, ईश्वर सिंह, रोहित सिंह, नितेश माहरा, मनोजनाथ गोस्वामी, प्रियंका प्रजापति, विनीता परिहार, पूजा माहरा, हिमानी आर्या, हिमानी बिष्ट, श्रेया डुुंगरिया आदि छात्र-छात्राओं का कहना है कि पेयजल समस्या के चलते छात्रावास बंद होने से उन्हें काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। हॉस्टल का किराया महज 400 रुपये मासिक था। जबकि अब उन्हें 1500 से दो हजार रुपये के किराए के रूप में देना पड़ रहा है। साथ ही कमरे से पॉलीटेक्निक आने-जाने में उनका काफी समय बर्बाद हो रहा है। जिससे पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
कोट
पेयजल की कमी के चलते छात्र-छात्राओं और आवासीय कालोनी में रहने वाले स्टाफ को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। परिसर में ट्यूबवेल लगाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। शासन ने कुछ आपत्तियां लगाई गई थी, जिसका निस्तारण कर दुबारा शासन को भेज दिया गया है। लेकिन अभी तक इसमें कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं हो पाई है।
रचना सिंह प्रभारी प्राचार्या राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज लोहाघाट।
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लोहाघाट के पॉलीटेक्निक कॉलेज में पेयजल आपूर्ति के लिए धर्मघर के नीचे बनस्वाड़ गधेरे से पेयजल योजना बनाई गई है। इस गधेरे से ऊपर शंखपाल में पहले नगर पंचायत द्वारा कूड़ा निस्तारित किया जाता था। पिछले साल हुई भारी वर्षा से कूड़े का मलबा कालेज की पेयजल योजना में आने से वह क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब से इसे ठीक नहीं किया जा सका है। योजना से पूरा पानी कॉलेज में नहीं पहुंच पा रहा है। पेयजल समस्या के कारण यहां के तीनों छात्रावासों में ताले लटके हुए हैं। इससे न केवल छात्र-छात्राओं की जेब पर मार तो पड़ ही रही है, इसके अलावा कॉलेज को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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पॉलीटेक्निक कॉलेज में हर रोज 15 हजार लीटर से अधिक पानी की जरूरत है। लेकिन इस योजना से मात्र पांच हजार लीटर ही पानी की आपूर्ति हो पा रही है। कॉलेज में गंभीर जल संकट बना हुआ है। पेयजल समस्या के चलते कॉलेज पुराने दोनों छात्रावास जून माह में खाली करा दिए थे। इन दोनों छात्रावासों में 30 छात्राएं और 60 छात्र रहते हैं। 50 छात्राओं के लिए बना नया छात्रावास पेयजल की किल्लत के चलते चालू ही नहीं हो पाया है।
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पॉलीटेक्निक कॉलेज में संचालित के विभिन्न ट्रेडों में इस समय 400 छात्र-छात्राएं हैं। पानी की कमी के चलते सफाई पर भी असर पड़ रहा है। कॉलेज में 38 आवासीय भवन हैं, जिनमें से 20 भवनों में कर्मचारी रहते हैं। जिन्हें भी पेयजल समस्या से काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। जल संस्थान के अभियंता पवन बिष्ट का कहना है कि उक्त पेयजल योजना कॉलेज की अपनी पेयजल योजना है।
1500 रुपये महीने का नुकसान झेल रहे छात्र
पॉलीटेक्निक के छात्र हिम्मत राम, अमन कुमार, ईश्वर सिंह, रोहित सिंह, नितेश माहरा, मनोजनाथ गोस्वामी, प्रियंका प्रजापति, विनीता परिहार, पूजा माहरा, हिमानी आर्या, हिमानी बिष्ट, श्रेया डुुंगरिया आदि छात्र-छात्राओं का कहना है कि पेयजल समस्या के चलते छात्रावास बंद होने से उन्हें काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। हॉस्टल का किराया महज 400 रुपये मासिक था। जबकि अब उन्हें 1500 से दो हजार रुपये के किराए के रूप में देना पड़ रहा है। साथ ही कमरे से पॉलीटेक्निक आने-जाने में उनका काफी समय बर्बाद हो रहा है। जिससे पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
कोट
पेयजल की कमी के चलते छात्र-छात्राओं और आवासीय कालोनी में रहने वाले स्टाफ को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। परिसर में ट्यूबवेल लगाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। शासन ने कुछ आपत्तियां लगाई गई थी, जिसका निस्तारण कर दुबारा शासन को भेज दिया गया है। लेकिन अभी तक इसमें कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं हो पाई है।
रचना सिंह प्रभारी प्राचार्या राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज लोहाघाट।