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एक साल से कम समय बचा, 75 फीसदी काम बाकी
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Thu, 07 Sep 2017 10:31 PM IST
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क्वैराला पंपिंग योजना के तहत खर्ककार्की में बना पेयजल टैंक।
- फोटो : अमर उजाला
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जिला मुख्यालय की प्यास को बुझाने के लिए बनाई जा रही चंपावत पुनर्गठन पेयजल योजना के निर्माण का कार्य बेहद धीमी गति से हो रहा है। शासन से धन रिलीज होने में हो रही देरी इसका मुख्य कारण बना हुआ है। एक साल में इस योजना में बमुश्किल पच्चीस फीसदी काम हो पाया है। बाकी काम को पूरा करने के लिए एक साल से भी कम समय बचा है। इस निर्धारित समय में 75 फीसदी काम कैसे पूरा होगा यह एक अहम सवाल बना हुआ है।
चंपावत नगर और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल आपूर्ति के लिए 30.88 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही चंपावत पुनर्गठन पेयजल योजना का निर्माण कार्य अगस्त 2016 से शुरू हुआ। क्वैराला नदी से बनने वाली पंपिंग पेयजल योजना से नगर और आसपास के क्षेत्र के लोगों को 30 साल तक पानी मिल सकेगा। योजना के अंतर्गत गधेरे 17.5 किमी तक पांच पंपिंग स्टेशन, साफ पानी के लिए गधेरे पर ही फिल्टरेशन के अलावा बिजली की व्यवस्था के लिए अलग से फीडर प्रस्तावित किया गया है।
पिछले माह मिले 67.08 लाख रुपये को मिलाकर अब तक निर्माण कार्य के लिए 4.14 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। यानि इस योजना में अब तक महज 13.40 प्रतिशत धन ही रिलीज हो सका है। जल निगम के सहायक अभियंता अशोक स्वरूप का कहना है कि अब तक तकरीबन दस किमी लंबी पेयजल लाइन का निर्माण कार्य किया जा चुका है। क्वैराला पंपिंग योजना के तहत पांच टैंकों में से चार पेयजल टैंकों का निर्माण (हिंग्लादेवी मंदिर के पास 1100 किलोलीटर क्षमता का मुख्य टैंक, सर्किट हाउस के पास 400 केएल, खर्ककार्की के समीप 80 केएल और कोतवाली चबूतरे के पास सात केएल का टैंक) पूरा कर लिया गया है। जबकि भैरवां के पास 650 केएल क्षमता के टैंक का निर्माण होना बाकी है। निर्धारित समय में महज एक साल बचा है। 75 प्रतिशत काम बाकी है। लेकिन धनराशि मिलने में देरी से योजना के तय समय अगस्त 2018 में पूरा होने पर संशय बना हुआ है। धन रिलीज होने में हो रही देरी का खामियाजा न केवल पानी की कमी से जूझ रहे नागरिकों को भुगतना पड़ेगा, वहीं इससे योजना की लागत भी बढ़ेगी।
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इस समय शहर में मिल रहा मात्र दो-तिहाई पानी
चंपावत क्षेत्र की 13 हजार की आबादी को रोजाना 16 लाख लीटर पेयजल की जरूरत है। मगर पानी की उपलब्धता नाकाफी है। जल संस्थान के चंपावत डिवीजन के कनिष्ठ अभियंता एसएस थापा का कहना है कि इस वक्त करीब 10 लाख लीटर पानी मिल रहा है। जबकि गर्मियों में करीब पांच लाख लीटर पानी ही मिल पाता है।
कोट..........
क्वैराला पेयजल योजना में अगर नियमित रूप से धन मिलते रहा, तो वक्त पर काम पूरा हो सकेगा। फिलहाल 4.14 करोड़ रुपये रिलीज हुए हैं।
अशोक स्वरूप
सहायक अभियंता,
जल निगम, चंपावत।
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चंपावत नगर और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल आपूर्ति के लिए 30.88 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही चंपावत पुनर्गठन पेयजल योजना का निर्माण कार्य अगस्त 2016 से शुरू हुआ। क्वैराला नदी से बनने वाली पंपिंग पेयजल योजना से नगर और आसपास के क्षेत्र के लोगों को 30 साल तक पानी मिल सकेगा। योजना के अंतर्गत गधेरे 17.5 किमी तक पांच पंपिंग स्टेशन, साफ पानी के लिए गधेरे पर ही फिल्टरेशन के अलावा बिजली की व्यवस्था के लिए अलग से फीडर प्रस्तावित किया गया है।
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पिछले माह मिले 67.08 लाख रुपये को मिलाकर अब तक निर्माण कार्य के लिए 4.14 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। यानि इस योजना में अब तक महज 13.40 प्रतिशत धन ही रिलीज हो सका है। जल निगम के सहायक अभियंता अशोक स्वरूप का कहना है कि अब तक तकरीबन दस किमी लंबी पेयजल लाइन का निर्माण कार्य किया जा चुका है। क्वैराला पंपिंग योजना के तहत पांच टैंकों में से चार पेयजल टैंकों का निर्माण (हिंग्लादेवी मंदिर के पास 1100 किलोलीटर क्षमता का मुख्य टैंक, सर्किट हाउस के पास 400 केएल, खर्ककार्की के समीप 80 केएल और कोतवाली चबूतरे के पास सात केएल का टैंक) पूरा कर लिया गया है। जबकि भैरवां के पास 650 केएल क्षमता के टैंक का निर्माण होना बाकी है। निर्धारित समय में महज एक साल बचा है। 75 प्रतिशत काम बाकी है। लेकिन धनराशि मिलने में देरी से योजना के तय समय अगस्त 2018 में पूरा होने पर संशय बना हुआ है। धन रिलीज होने में हो रही देरी का खामियाजा न केवल पानी की कमी से जूझ रहे नागरिकों को भुगतना पड़ेगा, वहीं इससे योजना की लागत भी बढ़ेगी।
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इस समय शहर में मिल रहा मात्र दो-तिहाई पानी
चंपावत क्षेत्र की 13 हजार की आबादी को रोजाना 16 लाख लीटर पेयजल की जरूरत है। मगर पानी की उपलब्धता नाकाफी है। जल संस्थान के चंपावत डिवीजन के कनिष्ठ अभियंता एसएस थापा का कहना है कि इस वक्त करीब 10 लाख लीटर पानी मिल रहा है। जबकि गर्मियों में करीब पांच लाख लीटर पानी ही मिल पाता है।
कोट..........
क्वैराला पेयजल योजना में अगर नियमित रूप से धन मिलते रहा, तो वक्त पर काम पूरा हो सकेगा। फिलहाल 4.14 करोड़ रुपये रिलीज हुए हैं।
अशोक स्वरूप
सहायक अभियंता,
जल निगम, चंपावत।