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जल स्रोतों में कमी, टैंकर बने सहारा
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
Updated Fri, 12 May 2017 11:09 PM IST
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गिलास से नौले से पानी निकालती महिला
- फोटो : अमर उजाला
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जिला मुख्यालय में पानी की किल्लत बढ़ गई है। जल स्रोतों में 63 प्रतिशत की कमी आने से पेयजल संकट लगातार बढ़ रहा है। किसी भी मोहल्ले में रोज नलों से पानी की पूर्ति नहीं हो रही है। दो दिन बाद पानी मिल रहा है, वो भी बमुश्किल 40 मिनट। किल्लत वाले इलाकों के लिए टैंकर और पिकअप वाहन सहारा बन रहे हैं। रोज 50 हजार लीटर से अधिक पानी की वाहनों के जरिए पूर्ति की जा रही है।
चंपावत में इस वक्त 11 लाख लीटर पानी की जरूरत है, लेकिन उपलब्धता बमुश्किल 2.25 लाख लीटर पानी मिल रहा है।
ज्यादातर मोहल्लों में एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा है, मगर वितरित पानी भी 63 प्रतिशत से कम है। नलों से आपूर्ति कम होने पर अब निर्भरता मुख्य रूप से टैंकर और पिकअप वाहनों से बंट रहे पानी पर हो गई है। जल संस्थान के जूनियर इंजीनियर एसएस थापा ने बताया कि रौखेत, छीड़ापानी, ललुवापानी सहित कई पेयजल स्रोत में जल स्तर कम हो गया है।
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कनलगांव, तल्लीहाट, मल्लीहाट, मोटर स्टेशन, जीआईसी रोड, गोरलचौड़ रोड आदि क्षेत्रों में पेयजल की ज्यादा दिक्कत है। वर्तमान में चंपावत के संवेदनशील मोहल्लों में तीन-तीन हजार लीटर क्षमता के दो विभागीय टैंकरों और दो-दो हजार लीटर क्षमता की चार पिकअप वाहनों के जरिए रोजाना पानी बांटा जा रहा है।
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पम्दा नौले में गिलास से निकल रहा पानी
बाराकोट विकासखंड के पम्दा गांव में कई वर्ष पूर्व पेयजल की कमी नहीं होती थी, मगर अब इस गांव में भी पानी की मारामारी है। हाल यह है कि यहां के पानी से भरे रहने वाले नौलों में भी एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है। महिलाएं सहित कई लोग गिलास से बाल्टी में पानी डालते हैं। ग्रामीण मोहन जोशी का कहना है कि नौले का जल स्रोत एकदम गिरने से 15 लीटर की एक बाल्टी को भरने में करीब सात मिनट लग रहे हैं।
पुलहिंडोला में दूरदराज से पानी ला रहे ग्रामीण
लोहाघाट विकासखंड के पुलहिंडोला में पेयजल का संकट लगातार गहरा रहा है। यहां छह में से तीन मांडेक्स हैंडपंप काम नहीं कर रहे हैं। इसके चलते संकट बढ़ा है। जल संस्थान दो पिकअप वाहनों से रोजाना चार हजार लीटर पानी की पूर्ति कर रहा है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि ये पानी नाकाफी है। नुकुल पंत सहित यहां के लोगों का कहना है कि पानी की जबर्दस्त किल्लत की वजह से लोग एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर नौलों से पानी लाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने हैंडपंप की मरम्मत कराने के साथ पानी की पूर्ति बढ़ाने की मांग की है।