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रहस्य बनीं पिटारी में रखी मूर्तियां
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
Updated Fri, 12 Aug 2016 10:24 PM IST
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बाराही धाम में मां बज्र बाराही के ऊपरी तल में तांबें की पिटारी में रखी मूर्तियां कैसी है, किस धातु की बनी है यह आज तक रहस्य बना हुआ हैं। पिटारी के अंदर मां बाराही, बज्र बाराही, मां महाकाली और मां सरस्वती की मूर्तियां रहती हैं। जिन्हें केवल बग्वाल के दिन पिटारी समेत नंदघर में रखा जाता हैं।
बग्वाल के दूसरे दिन मां बज्र बाराही की शोभा यात्रा निकाली जाती हैं जो मुख्य मंदिर से मुचकंद ऋषि के आश्रम तक निर्धारित मार्गों से होते हुए जाती हैं। जिस स्थान में यह मूर्तियां रखी गई हैं वहां अखंड दीप जलता है। रक्षाबंधन के दिन चारों खामों के लोग मां की सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं मंदिर के पीठाचार्य कीर्ति शास्त्री के अनुसार मां बज्र बाराही की मूर्ति में बज्र के समान तेज और ओज हैं कि उसे कोई भी व्यक्ति खुली आंखों से नहीं देख सकता है। जिसने भी मूर्तियों को देखने का प्रयास किया उनकी आंखें सदा के लिए चौधियां गई हैं। इन मूर्तियों को वर्ष में एक बार बागड़ जाति के धनसिंह अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर, काले कंबल से ढंककर स्नान कराते हैं। यह परंपरा यहां शताब्दियों से चली आ रही हैं।
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बग्वाल के दूसरे दिन मां बज्र बाराही की शोभा यात्रा निकाली जाती हैं जो मुख्य मंदिर से मुचकंद ऋषि के आश्रम तक निर्धारित मार्गों से होते हुए जाती हैं। जिस स्थान में यह मूर्तियां रखी गई हैं वहां अखंड दीप जलता है। रक्षाबंधन के दिन चारों खामों के लोग मां की सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं मंदिर के पीठाचार्य कीर्ति शास्त्री के अनुसार मां बज्र बाराही की मूर्ति में बज्र के समान तेज और ओज हैं कि उसे कोई भी व्यक्ति खुली आंखों से नहीं देख सकता है। जिसने भी मूर्तियों को देखने का प्रयास किया उनकी आंखें सदा के लिए चौधियां गई हैं। इन मूर्तियों को वर्ष में एक बार बागड़ जाति के धनसिंह अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर, काले कंबल से ढंककर स्नान कराते हैं। यह परंपरा यहां शताब्दियों से चली आ रही हैं।
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