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जंगल सफारी और राफ्टिंग का लुत्फ भी उठा रहे श्रद्धालु

Thu, 17 May 2018 10:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूराे टनकपुर (चंपावत)।
अमर उजाला ब्यूराे टनकपुर (चंपावत)। Updated Thu, 17 May 2018 10:54 PM IST
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Jungle safari and rafting are also enjoying the faithful
शारदा में रिवर राफ्टिंग का लुत्फ उठाते एटा के पर्यटकों की टोली। - फोटो : अमर उजाला

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पूर्णागिरि मेले में आ रहे श्रद्धालुओं को शारदा में रिवर राफ्टिंग खूब भा रही है। देवी मां के दर्शन के साथ ही श्रद्धालु जहां नंधौर वन्यजीव अभयारण्य में जंगल सफारी का आनंद उठा रहे हैं, वहीं रिवर राफ्टिंग कर शारदा की लहरों से खेलने एवं नाइट कैंपिंग का भी लुत्फ भी ले रहे हैं। सिर्फ मेला अवधि में ही करीब सात सौ से ज्यादा पर्यटक राफ्टिंग कर चुके हैं। बुधवार को एटा से आए करीब एक दर्जन श्रद्धालुओं ने राफ्टिंग का लुत्फ उठाया।

भारत-नेपाल सीमा पर प्रवाहित शारदा में पर्यटन विभाग के साथ ही एसएसबी द्वारा समय-समय पर साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रिवर राफ्टिंग का प्रशिक्षण दिया जाता रहा है। अक्तूबर 2015 से शारदा में रिवर राफ्टिंग की शुरुआत हुई। फिलहाल यहां बूम राफ्टिंग एवं लाइफ इन एडवेंचर (एलए) राफ्टिंग संस्थाओं द्वारा पर्यटकों को रिवर राफ्टिंग एवं नाइट कैंपिंग कराया जा रहा है। मां पूर्णागिरि धाम के चरण मंदिर से बूम तक 15 किमी की राफ्टिंग में पांच रैपिड (उठती लहरें) पड़ते हैं। पिछले वर्ष सितंबर से शुरू हुए सीजन में बूम राफ्टिंग संस्था के द्वारा पांच सौ से ज्यादा तो एलए संस्था द्वारा दो सौ से ज्यादा पर्यटकों को राफ्टिंग कराई जा चुकी है।
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एलए संस्था के निदेशक विनय आरोरी उर्फ मोनी बाबा ने बताया कि राफ्टिंग के लिए लाइफ जैकेट, पैडल, हेलमेट समेत सभी सुरक्षा उपकरण मौजूद हैं। राफ्टिंग के साथ ही पर्यटकों को नाइट कैंपिंग के एलए संस्था ने आठ तो बूम राफ्टिंग संस्था ने पांच कैंप बनाए है, जिनमें फैमिली कैंपिंग की भी सुविधा है।
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परवान नहीं चढ़ पा रही शारदा में फिश एंग्लिंग
शारदा में पर्यटकों के लिए फिश एंग्लिंग की भी सुविधा है, लेकिन इसके लिए वन विभाग से परमिट लेना होता है। परमिट हासिल करने की सिंगल विंडो सुविधा न होने से पर्यटकों को एंग्लिंग के लिए 15 से 20 दिन पहले बुकिंग करानी पड़ती है। व्यवस्था में इस खामी से एंग्लिंग पर्यटन परवान नहीं चढ़ पा रहा है। एंग्लिंग कराने वाली बूम राफ्टिंग संस्था के निदेशक राजू गड़कोटी का कहना है कि फिश एंग्लिंग के लिए परमिट चंपावत से लेना होता है तो उसका शुल्क सूखीढांग बूम रेंज कार्यालय में जमा करना पड़ता है। ऐसे में एंग्लिंग के शौकीन पर्यटकों को तत्काल एंग्लिंग करा पाना संभव नहीं है। गड़कोटी का कहना है कि परमिट की सिंगल विंडो सुविधा के साथ ही फिश एंग्लिंग को टनकपुर तक विकसित करने की जरूरत है।
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