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आईटीआई चंपावत : 9 छात्र और 9 ही कर्मचारी

Sun, 17 Dec 2017 09:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।  
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।   Updated Sun, 17 Dec 2017 09:43 PM IST
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ITI Champawat: 9 students and 9 employees only
निर्माणाधीन चंपावत का आईटीआई भवन। - फोटो : amar ujala

आईटीआई चंपावत 33 साल बाद भी अपने भवन का इंतजार कर रहा है। यही नहीं यहां तीन ट्रेड में से सिर्फ एक ट्रेड ही चल रही है। दो ट्रेड अनुदेशक होते हुए भी संचालित नहीं हो पा रही हैं। इसके चलते यहां छात्र संख्या भी लगातार कम हो रही है। यही नहीं नौ छात्रों के लिए यहां अनुदेशक और कर्मचारी भी नौ ही हैं।

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बता दें कि स्थापना के बाद से ही आईटीआई चंपावत अब भी सीएमटी मार्ग पर किराये के भवन में संचालित हो रहा है। जगह की कमी तो है ही, यहां ट्रेडों की भी कमी है। स्वीकृत होने के वक्त यहां तीन ट्रेड (वायरमैन, कटिंग व सिलाई और हिंदी टंकण) थे। लेकिन, फिलहाल एकमात्र वायरमैन ट्रेड ही यहां संचालित है।
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अब अप्रासंगिक हो चुका हिंदी टंकण ट्रेड कई वर्ष पूर्व बंद हो चुका है। वहीं कटिंग व सिलाई भी बीते एक साल से नहीं चल रहा है। गौरतलब यह है कि इन दोनों ट्रेडों के अनुदेशकों की यहां तैनाती की गई है। वहीं, विसंगति देखिए जो अकेला ट्रेड चल रहा है, उसमें सृजित दो पदों में से एक ही अनुदेशक तैनात है।
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आईटीआई में कार्यादेशक के अलावा 4 अनुदेशक, 1 बाबू, 2 चौकीदार और 1 अनुसेवक कार्यरत है। वैसे इस आईटीआई में छात्र संख्या में भी तेजी से गिरावट आ रही है। वर्ष 2011 में यहां 19 छात्र थे, जो अब कम होकर महज 9 रह गए हैं। छात्रों का कहना है कि मौजूदा दौर के अनुरूप ट्रेड नहीं होने से रोजगार की संभावनाओं पर असर पड़ रहा है।

आठ माह से रुका है भवन का काम
चंपावत के आईटीआई भवन के लिए दो साल से निर्माण कार्य तो चल रहा है, पर बीते आठ महीने से से काम रुका हुआ है। चंपावत के ताराचौड़ में 1.72 करोड़ रुपये से बनने वाले इस भवन के लिए अब तक 1.10 करोड़ रुपये ही मिल सके हैं। दोमंजिला मकान तो बन गया है, पर इसके बाद का काम लटका है। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम का कहना है कि धन की लगातार मांग की जा रही है, लेकिन धन नहीं मिलने से आगे का काम नहीं हो पा रहा है।


नए प्रवेश नहीं होने से दो ट्रेडों का संचालन नहीं हो पा रहा है। आईटीआई के किराये पर चलने से नए और जरूरतमंद ट्रेड भी नहीं खुल पा रहे हैं। हिंदी टंकण ट्रेड आउटडेटेड हो चुका है। कटिंग व सिलाई ट्रेड में नए प्रवेश नहीं हुए हैं। इसकी वजह निदेशालय से जारी नियम पूर्व वर्ष की छात्र संख्या के कम से कम 50 प्रतिशत दाखिले का होना अनिवार्य है, जो यहां नहीं हो सके।
आरएस चौधरी, कार्यादेशक, आईटीआई, चंपावत।

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