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खाली हो चुके गांवों को आबाद करने की पहल
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
Updated Thu, 25 May 2017 10:51 PM IST
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इन जगहों से होकर गुजरेगी पदयात्रा
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में पलायन के कारण खाली हो चुके या हो रहे गांवों को फिर से आबाद करने का लक्ष्य लेकर एक गैर सरकारी स्वयंसेवी संस्था स्पर्श अनूठी पहल करने जा रही है। इसके तहत 24 जून से बाराहीधाम देवीधुरा से पूर्णागिरि टनकपुर तक दस दिनी पदयात्रा अभियान शुरू किया जाएगा। इसमें देश के विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ प्रतिभाग करेंगे। पदयात्रा के दौरान गांवों में रात्रि प्रवास कर लोगों की बुनियादी जरूरतों और आज के हालातों पर चौपाल लगाई जाएगी। पदयात्रा का उद्देश्य गांवों को उजड़ने से बचाने के साथ ही गांवों को आपस में जोड़ने के लिए एक ट्रैकिंग रूट भी तलाश करना है। इसका ब्लू प्रिंट राज्य सरकार को सौंपा जाएगा।
स्पर्श संस्था के निदेशक देवेंद्र ओली के अनुसार पिछले 40 सालों में पलायन की समस्या उत्तराखंड में गहराई से जुड़ गई है। इससे पहले पुरुष नौकरी करने परदेश जाता था, अन्य सभी लोग गांव में ही रहते थे। परिवार संयुक्त अथवा एकाकी दोनों प्रकार के थे, लेकिन 1980 के दशक के बाद जब सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरी में युवा जाने लगे तो उन्होंने धीरे-धीरे अपने समाज से मुंह मोड़ लिया। क्योंकि पहाड़ के लोग एक बार गांव छोड़ते हैं तो दोबारा नहीं आते हैं। युवाओं का गांव से लगाव क्यों नहीं रहा, यह सोचनीय विषय है, जबकि सरकार की कई योजनाएं हैं, फिर भी वह कार्यरूप में विकसित नहीं हो पा रहीं हैं। इसका प्रमुख कारण गांव स्तर पर बिरादरी में आपसी मनमुटाव एक प्रमुख कारण है। इसलिए अभियान के तहत गांव स्तर पर बिरादरी को मजबूत बनाने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।
पदयात्रा के दौरान स्कूलों में गोष्ठियां होंगी
देवीधुरा-टनकपुर ट्रैकिंग अभियान दल के सदस्य अपने पास पिट्ठू, स्लीपिंग बैग, गर्म कपड़े, पानी की बोतल आदि साथ में रखेंगे। इस दौरान विभिन्न विषय विशेषज्ञों की ओर से चंपावत जिले की जैव विविधता, नशे के बढ़ते स्वरूप, शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति का अध्ययन किया जाएगा। साथ ही पदयात्रा के मार्ग पर पड़ने वाले विभिन्न स्कूलों में गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा।
स्पर्श संस्था के निदेशक देवेंद्र ओली के अनुसार पिछले 40 सालों में पलायन की समस्या उत्तराखंड में गहराई से जुड़ गई है। इससे पहले पुरुष नौकरी करने परदेश जाता था, अन्य सभी लोग गांव में ही रहते थे। परिवार संयुक्त अथवा एकाकी दोनों प्रकार के थे, लेकिन 1980 के दशक के बाद जब सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरी में युवा जाने लगे तो उन्होंने धीरे-धीरे अपने समाज से मुंह मोड़ लिया। क्योंकि पहाड़ के लोग एक बार गांव छोड़ते हैं तो दोबारा नहीं आते हैं। युवाओं का गांव से लगाव क्यों नहीं रहा, यह सोचनीय विषय है, जबकि सरकार की कई योजनाएं हैं, फिर भी वह कार्यरूप में विकसित नहीं हो पा रहीं हैं। इसका प्रमुख कारण गांव स्तर पर बिरादरी में आपसी मनमुटाव एक प्रमुख कारण है। इसलिए अभियान के तहत गांव स्तर पर बिरादरी को मजबूत बनाने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।
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पदयात्रा के दौरान स्कूलों में गोष्ठियां होंगी
देवीधुरा-टनकपुर ट्रैकिंग अभियान दल के सदस्य अपने पास पिट्ठू, स्लीपिंग बैग, गर्म कपड़े, पानी की बोतल आदि साथ में रखेंगे। इस दौरान विभिन्न विषय विशेषज्ञों की ओर से चंपावत जिले की जैव विविधता, नशे के बढ़ते स्वरूप, शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति का अध्ययन किया जाएगा। साथ ही पदयात्रा के मार्ग पर पड़ने वाले विभिन्न स्कूलों में गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा।
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