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बढ़ी पेयजल किल्लत, प्यास बुझाने को निकल रहा पसीन

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 14 Mar 2021 11:21 PM IST
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Increased drinking water shortage, perspiration to quench thirst
चंपावत में टैंकर से पानी भरतीं महिलाएं। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। अभी मार्च के महज दो सप्ताह ही बीते हैं, लेकिन लोगों को गहरे पेयजल किल्लत से दो-चार होना पड़ रहा है। हर रोज पानी नहीं मिलने से गांव ही नहीं, नगरों में भी नौले, हैंडपंपों के अलावा टैंकरों से होने वाली पेयजल आपूर्ति का सहारा लेना पड़ रहा है।
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पहाड़ में अभी कायदे से गर्मी का आगाज नहीं हुआ, लेकिन इससे पहले ही यहां पेयजल संकट गहरा गया है। चंपावत और लोहाघाट के नागरिकों को अब हर रोज पानी नहीं मिल पा रहा है। चंपावत में एक दिन छोड़कर, तो लोहाघाट में कुछ जगह दो दिन छोड़कर नलों से पेयजल की आपूर्ति हो रही है। यह पानी भी बमुश्किल 45 मिनट से सवा घंटे तक ही मिल रहा है। इसके चलते लोग पानी ढोने को मजबूर हो रहे हैं। जल संस्थान बेहद किल्लत वाली जगहों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति करा रहा है। जल संस्थान के एएई परमानंद पुनेठा का कहना है कि चंपावत नगर को रोजाना 13.50 लाख लीटर पानी की जरूरत है, लेकिन उपलब्धता मात्र 4.50 लाख लीटर से भी कम हो पा रही है।
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कम बारिश से सूख गए स्रोत
चंपावत। इस बार सितंबर बाद बारिश बेहद कम हुई है। मानसून अवधि के बाद बमुश्किल 23 मिलीमीटर ही बारिश हुई है। कम बारिश के अलावा इस बार पहाड़ों में हिमपात भी नहीं हुआ। जिस कारण जल स्रोतों में खासी गिरावट आई है। जल संस्थान के ईई विलाल युनूस का कहना है कि चंपावत में रौखेत में 60 प्रतिशत और छीड़ापानी, च्यूराखर्क स्रोत में जल स्तर 50 प्रतिशत कम हो गया है। इस कारण नगर क्षेत्र में पेयजल वितरण के लिए रोस्टर जारी किया गया है। वहीं संवेदनशील इलाकों में टैंकर और अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। (ब्यूरो)
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क्वैराला पंपिंग योजना में देरी से भी बढ़ी दुश्वारी
चंपावत। क्वैराला पेयजल योजना का लाभ इस बार चंपावत नगर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को नहीं मिल सकेगा। इसके चलते गर्मी में पेयजल किल्लत के कम होने के आसार नहीं है। इस योजना का इस बार जून तक भी पूरा होना संभव नहीं है। टैंक, पाइप लाइन, पावर हाउस, ट्रीटमेंट प्लांट का काम पूरा होने के बाद अब बिजली लाइन बिछाने का काम चल रहा है। चंपावत क्षेत्र में 30 वर्ष तक के लिए 2015 में 30.88 करोड़ रुपये की लागत से क्वैराला पेयजल योजना मंजूर हुई थी। पेयजल निगम के ईई वीके जोशी का कहना है कि काम को तेजी से पूरा कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। (ब्यूरो)
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