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पांच साल में भी नहीं हुए प्रवक्ताओं के पद सृजित
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
Updated Tue, 02 Feb 2016 11:10 PM IST
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राज्य सरकार एक ओर धड़ाधड़ नए विद्यालय खोलने और उच्चीकरण की घोषणा किए जा रही है। लेकिन इन विद्यालयों में शिक्षकों का कोई बंदोबस्त नहीं किया जा रहा है। दूरस्थ क्षेत्र में स्थित जीआईसी रीठाखाल का हाल भी कुछ ऐसा ही है।
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विद्यालय को 23 अगस्त 2011 को जीआईसी का दर्जा दिया गया था। इससे पहले 2006 तक यह विद्यालय जनता की ओर से संचालित किया जाता था। 18 फरवरी 2006 को इसका हाईस्कूल में प्रांतीयकरण किया गया। विद्यालय को जीआईसी का दर्जा दिए पांच वर्ष हो चुके हैं, अभी तक यहां प्रवक्ताओं के एक भी पद स्वीकृत नहीं किए गए हैं।
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पद स्वीकृत न होने से विद्यालय को अतिथि प्रवक्ता भी नहीं मिल पाए। इस विद्यालय में 232 छात्राओं समेत 427 छात्र संख्या वाला यह विद्यालय करीब 18 ग्राम पंचायतों के बीच स्थित है। इस वर्ष यहां इंटर में 34 बच्चे परीक्षा में शामिल होंगे।
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विद्यालय में तीन अतिथि शिक्षक हैं, जो प्रवक्ता का पूरा कार्य तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें मानदेय एलटी शिक्षकों का ही मिल रहा है। प्रधानाचार्य धर्मेंद्र कुमार का कहना है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए अतिरिक्त समय में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। विद्यालय में पीटीए ने भी एक शिक्षक की अलग नियुक्ति की है।
अभिभावक आर्थिक रूप से सक्षम नहीं
लोहाघाट। पीटीए अध्यक्ष पीएन उपाध्याय और एसएमसी अध्यक्ष मोहन सिंह बोहरा का कहना है कि आर्थिक रूप से पिछड़ा क्षेत्र होने के कारण यहां के अभिभावक स्वयं के प्रयासों से प्रवक्ताओं की व्यवस्था करने में सक्षम नहीं हैं। क्षेत्रीय लोग लगातार सरकार से प्रवक्ताओं के पद सृजित कर उनमें नियुक्ति की मांग करते थक चुके हैं।
अन्य विद्यालयों में भी है यही स्थिति
लोहाघाट। सीईओ एनसी पाठक का कहना है कि रीठाखाल समेत दुबचौड़ा, मंच, गैंडाख्याली में भी यही समस्या है, इसके लिए उनके कार्यालय से लगातार निदेशालय से पत्राचार और अनुस्मरण भेजे जा रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया है कि प्रवक्ताओं के न होने से उक्त विद्यालयों में पठन पाठन का कार्य प्रभावित हो रहा है।