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Champawat News: चाय बागान देखना है तो ढीली करनी होगी जेब
Mon, 17 Jul 2023 10:40 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 17 Jul 2023 10:40 PM IST
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चंपावत के सिलिंगटाक के चाय बागान में बना व्यू प्वइंट। संवाद
चंपावत। चंपावत की जैविक चाय स्वाद का एहसास ही नहीं करा रही है बल्कि यहां के चाय बागान पर्यटकों को भी लुभा रहे है। अब चाय बागानों की खूबसूरती को निहारने के लिए सैलानियों को जेब ढीली करनी होगी। यह व्यवस्था शुरू कर दी है।
चंपावत जिले का चाय कि लिए खूब नाम है। यहां के पहाड़ी इलाकों में 241 हेक्टेयर में 60 हजार किलो चाय की पत्तियों का उत्पादन होता है। इन पत्तियों से करीब 9 से 10 हजार किलो चाय तैयार होती है। इन्हीं चाय बागानों में चंपावत के पास सिलिंगटाक के 21 हेक्टेयर चाय बागान क्षेत्र में से चार हेक्टेयर को टी टूरिज्म के रूप में विकसित किया गया हैा। 1.05 करोड़ रुपये से बागान के इस क्षेत्र को पर्यटकों के लिए तैयार किया गया। इसमें भ्रमण के अलावा सैलानियों के लिए खूबसूरत नजारों को देखने के लिए व्यू प्वाइंट बनाए गए हैं। यहां से दूर दूर तक खूबसूरत दृश्यों का आनंद लिया जा सकेगा।
कुछ समय पहले तक बागान के सौंदर्य को देखने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होता था। अब हर सैलानी को 45 मिनट तक बागान में घूमने के लिए 20 रुपये देने होंगे। 12 साल तक के बच्चों को इस शुल्क से राहत दी गई है।
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बाक्स
ईको हट में जल्द रात गुजार सकेंगे सैलानी
चंपावत। चाय बागान में जल्द ही ईको हट में पर्यटक रात्रि विश्राम कर सकेंगे। बागान में तीन इको हट बनाए गए हैं। साथ ही टी कैफे भी है। कैफे में जैविक चाय के अलावा सात्विक भोजन उपलब्ध रहेगा। चाय विकास बोर्ड के प्रभारी राकेश कुमार का कहना है कि इन दोनों की निविदा हो चुकी है। एक महीने में इनका संचालन हो जाएगा।
कोट
चाय बागान में प्रवेश के लिए 12 साल से अधिक उम्र के हर व्यक्ति को 20 रुपये का टिकट लेना होगा। यह व्यवस्था चार जुलाई से लागू कर दी गई है। बागान के भीतर मद्यपान और धूम्रपान निषेध है।
राकेश कुमार, प्रभारी, चाय विकास बोर्ड, चंपावत।
कोट
चाय बागान में सैलानियों के लिए अधिक किराया रखा गया है। पर्यटकों के लिए किराया कम करने के साथ स्थानीय लोगों को किराये में रियायत दी जानी चाहिए ताकि यहां अधिक से अधिक लोग आने के लिए प्रोत्साहित हों।
पूरन कठायत, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस।
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चंपावत जिले का चाय कि लिए खूब नाम है। यहां के पहाड़ी इलाकों में 241 हेक्टेयर में 60 हजार किलो चाय की पत्तियों का उत्पादन होता है। इन पत्तियों से करीब 9 से 10 हजार किलो चाय तैयार होती है। इन्हीं चाय बागानों में चंपावत के पास सिलिंगटाक के 21 हेक्टेयर चाय बागान क्षेत्र में से चार हेक्टेयर को टी टूरिज्म के रूप में विकसित किया गया हैा। 1.05 करोड़ रुपये से बागान के इस क्षेत्र को पर्यटकों के लिए तैयार किया गया। इसमें भ्रमण के अलावा सैलानियों के लिए खूबसूरत नजारों को देखने के लिए व्यू प्वाइंट बनाए गए हैं। यहां से दूर दूर तक खूबसूरत दृश्यों का आनंद लिया जा सकेगा।
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कुछ समय पहले तक बागान के सौंदर्य को देखने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होता था। अब हर सैलानी को 45 मिनट तक बागान में घूमने के लिए 20 रुपये देने होंगे। 12 साल तक के बच्चों को इस शुल्क से राहत दी गई है।
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ईको हट में जल्द रात गुजार सकेंगे सैलानी
चंपावत। चाय बागान में जल्द ही ईको हट में पर्यटक रात्रि विश्राम कर सकेंगे। बागान में तीन इको हट बनाए गए हैं। साथ ही टी कैफे भी है। कैफे में जैविक चाय के अलावा सात्विक भोजन उपलब्ध रहेगा। चाय विकास बोर्ड के प्रभारी राकेश कुमार का कहना है कि इन दोनों की निविदा हो चुकी है। एक महीने में इनका संचालन हो जाएगा।
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चाय बागान में प्रवेश के लिए 12 साल से अधिक उम्र के हर व्यक्ति को 20 रुपये का टिकट लेना होगा। यह व्यवस्था चार जुलाई से लागू कर दी गई है। बागान के भीतर मद्यपान और धूम्रपान निषेध है।
राकेश कुमार, प्रभारी, चाय विकास बोर्ड, चंपावत।
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चाय बागान में सैलानियों के लिए अधिक किराया रखा गया है। पर्यटकों के लिए किराया कम करने के साथ स्थानीय लोगों को किराये में रियायत दी जानी चाहिए ताकि यहां अधिक से अधिक लोग आने के लिए प्रोत्साहित हों।
पूरन कठायत, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस।