फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   If you get treatment, then many lives saved!

इलाज मिलता, तो बच जाती कई जिंदगियां!

Fri, 18 May 2018 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत।
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत। Updated Fri, 18 May 2018 11:16 PM IST
विज्ञापन
If you get treatment, then many lives saved!
टनकपुर का ट्रोमा सेंटर भवन। - फोटो : अमर उजाला
 शुक्रवार को डंपर की चपेट में आने से राष्ट्रीय राजमार्ग में टनकपुर के पास 11 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई। छह यात्रियों की मौके पर मौत हुई, जबकि तीन अन्य ने अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ा। मगर अस्पताल की हालत इस लायक नहीं थी, कि यहां लाए आठ घायल श्रद्धालुओं का वह कायदे से इलाज कर सके। दुर्घटना स्थल से बमुश्किल छह किमी दूर टनकपुर के संयुक्त अस्पताल में अगर इलाज की समुचित व्यवस्था होती, तो यहां से रेफर हुए दो यात्रियों को बचाया जा सकता था। और छह अन्य को रेफर नहीं होना पड़ता। मगर अस्पताल में उन्हें इलाज के नाम पर बस प्राथमिक उपचार ही मिल सका। सभी घायलों को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
विज्ञापन


2006 से शुरू टनकपुर संयुक्त अस्पताल में न पर्याप्त चिकित्सक हैं और नहीं अन्य जरूरी सुविधाएं। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.एचएस हयांकी का कहना है कि डॉक्टरों की भारी कमी है। 15 में से दो विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित कुल 6 डॉक्टर हैं, लेकिन इस पर भी बाल रोग विशेषज्ञ करीब दो महीने से छुट्टी पर हैं। न फिजीशियन, न सर्जन, न रेडियोलॉजिस्ट और नहीं प्रसूति रोग विशेषज्ञ। ऐसे खाली पदों की फेहरिस्त काफी लंबी है। इसके चलते अस्पताल में ईसीजी और अल्ट्रासाउंड तक की सुविधा नहीं मिल पा रही है। सामान्य समय में भी मामूली इलाज के लिए सरकारी अस्पताल के बजाय लोग निजी अस्पताल के दरवाजे में जाने को मजबूर हो रहे हैं।  
विज्ञापन


लेकिन इमरजेंसी में भी अस्पताल के हाल कैसे हैं, यह शुक्रवार को नजर आया। यहां लाए गए हादसे के घायल बस प्राथमिक इलाज की रस्म अदायगी के बाद हायर सेंटर रेफर होते रहे। इन रेफर यात्रियों में से दो की हायर सेंटर पहुंचते-पहुंचते मौत हो गई। जबकि छह अन्य लोग भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।  
विज्ञापन
विज्ञापन


इमरजेंसी में मुंह चिढ़ाता रहा ट्रामा सेंटर  

चंपावत। इमरजेंसी सेवा को बेहतर करने के नाम पर लोहाघाट व टनकपुर में ट्रामा सेंटर (आपात कालीन चिकित्सा सुविधा केंद्र) भवन बनाए गए हैं, मगर काम का एक भी नहीं हैं। शुक्रवार को भी डंपर हादसे के बाद लाए गए घायलों के लिए टनकपुर केंद्र का कोई मतलब नहीं रहा। स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरण के बावजूद एक करोड़ रुपये की लागत का ये केंद्र इलाज देने लायक तक नहीं है। यहां न डॉक्टर हैं और नहीं उपकरण। आपातकालीन सुविधा के नाम पर ये भवन मजाक बना हुआ है।
 
ट्रामा सेंटर में इलाज तो शुरू नहीं हो सका, मगर भवन के शीशे भी टूटना शुरू हो गए हैं। ट्रामा सेंटर का संचालन नहीं होने से लोगों को आपात काल में हल्द्वानी, पीलीभीत, बरेली की दौड़ लगानी पड़ती है। और ऐसा ही आज भी हुआ। ट्रामा सेंटर शुरू नहीं होने से लोगों को वक्त पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। दो वर्ष में इलाज मिलने में देरी से 21 लोगों की मौत हो चुकी है।  


कोट  
सर्जन, निश्चेतक, न्यूरो सर्जन सहित डॉक्टरों के 12 पद और इतने ही पैरा मेडिकल स्टाफ के पद होने चाहिए। लेकिन अभी इन पदों का सृजन नहीं हो सका है न ही यहां अभी उपकरण मिले हैं। पदों की तैनाती व उपकरणों के लिए लगातार पत्र भेजे जाते रहे हैं।  
-डॉ.एमएस बोहरा, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed