फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   If the fire comes from Champawat Lohaghat car

चंपावत में लगी आग तो लोहाघाट से आती गाड़ी

Wed, 13 Apr 2016 10:42 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत Updated Wed, 13 Apr 2016 10:42 PM IST
विज्ञापन
If the fire comes from Champawat Lohaghat car
चंपावत में लगी आग तो लोहाघाट से आती गाड़ी - फोटो : अमर उजाला
चंपावत जिले में आग की वारदात होने पर इसे बुझाने की जिम्मेदारी 15 किलोमीटर दूर लोहाघाट के फायर स्टेशन की है। जिला बनने के बावजूद चंपावत में अब तक फायर स्टेशन नहीं है। अगर यहां कोई बड़ा अग्निकांड हुआ, तो इससे बचाव को तात्कालिक तौर पर बंदोबस्त नहीं है। आग बुझाने को फायरब्रिगेड का अकेला सहारा 15 किमी दूर लोहाघाट से है। सड़क चौड़ी होने के बावजूद यहां से चंपावत पहुंचने में ही करीब 30 मिनट का वक्त बर्बाद हो जाता है।
विज्ञापन


जिला बनने के 18 साल बाद भी चंपावत में चंपावत में फायर स्टेशन की सुविधा नहीं है।  जिले में अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने के लिए भले ही सरकारी कार्यालयों और भवनों में हाईड्रैंड हैं। मगर निजी भवनों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, औद्योगिक इकाइयों, धार्मिक स्थलों, बैंकों सहित अन्य स्थानों में आग से बचाव के उपाय भगवान भरोसे हैं। पाटी और बाराकोट तहसील में भी आग से बचाव का अपना कोई इंतजाम नहीं है।
विज्ञापन



फायर स्टेशन के लिए भी अपना भवन नहीं
जिला मुख्यालय से 75 किलोमीटर दूर मैदानी हिस्से टनकपुर में फायर स्टेशन पांच साल पहले खुला। मगर यहां फायर स्टेशन का अपना भवन नहीं है। फायर सर्विस अधिकारी केएस बिष्ट का कहना है कि फायर स्टेशन के भवन के लिए भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जिस वजह से फायर स्टेशन नहीं बन पा रहा है। फायर कर्मियों के रहने का भी कोई इंतजाम तक नहीं है। यहां फायर कर्मी शारदा नदी के पास डेढ़ दशक पूर्व बने पूर्ति विभाग के एक गोदाम में रात काटने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


फायरमैनों की कमी से जूझ रहा है लोहाघाट फायर स्टेशन
जिले के पहाड़ी क्षेत्रों की आगजनी की घटनाओं को काबू करने के लिए सबसे पुराना और महत्वपूर्ण फायर स्टेशन लोहाघाट में है। मगर 12 वर्ष पूर्व स्थापित फायर स्टेशन आधा-अधूरा ही है। बस एक ड्राइवर से काम चल रहा है। एफएसओ का पद अर्से से रिक्त है। चार फायरमैन के स्थान पर एक तथा चार ड्राइवर के बजाय एक से काम चल रहा है।

फायरमैनों की कमी के अलावा बुनियादी सुविधाएं भी नदारद हैं। शिवालय स्थित नलकूप से पानी की सप्लाई होती है। भीषण गर्मी में कभी-कभी आसानी से पानी भी नहीं मिल पाता है। फायर स्टेशन में एक फोम टेंडर, एक वाटर टेंडर, एक मिनी वाटर टेंडर हाई प्रेशर के अलावा एक बैक पैक सेट बाइक है। फायर स्टेशन और फायर कर्मियों के भवनों के निर्माण के लिए 14 नाली 11 मुट्ठी जमीन तो दी गई है। मगर अभी तक निर्माण नहीं हो पाया है। फायर कर्मी थाने की पुराने भवन में रहते हैं, जो बरसात में टपकता है।


लोहाघाट और टनकपुर में आग से बचाव को सभी जरूरी उपकरण है। जिला मुख्यालय में फायर स्टेशन का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय भेजा गया है। इस प्रस्ताव पर कार्रवाई चल रही है। जल्द ही इसे हरी झंडी मिलने की संभावना है। दिलीप सिंह कुंवर पुलिस अधीक्षक, चंपावत।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed