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खर्राटाक के जंगल में हो रहा वन्यजीवों का शिकार

Sun, 29 Oct 2017 10:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, टनकपुर (चंपावत)।
अमर उजाला ब्यूरो, टनकपुर (चंपावत)। Updated Sun, 29 Oct 2017 10:11 PM IST
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Hunting of wildlife in the forest of snoring
खर्राटाक जंगल में शिकार के बाद शिकारियों द्वारा उतार कर फेंकी गई वन्यजीव की खाल। - फोटो : अमर उजाला
 वन्यजीव शिकारियों के गढ़ कहे जाने वालेे चंपावत वन प्रभाग के नेपाल सीमा से लगे खर्राटाक के जंगल में ठंड शुरू होते ही नेपाल के शिकारियों ने डेरा जमा लिया है। खर्राटाक गांव के आसपास जंगल में वन्यजीवों की खालें, लकड़ी जलाकर मांस सुखाने के निशान और शिकार के लिए बनाए गए मचान इस बात को पुख्ता कर रहे हैं कि वहां धड़ल्ले से वन्यजीवों का  शिकार हो रहा है। वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं है।  
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चंपावत वन प्रभाग का खर्राटाक जंगल सीमा पार के वन्यजीव शिकारियों के निशाने पर रहता है। शिकारी यहां डेरा जमाकर बेखौफ शिकार करते हैं। विशेषकर ठंड मेें दिनों में उनकी सक्रियता बढ़ जाती है। नेपाल से आने वाले ये शिकारी वाहनों के हवा भरे ट्यूबों के सहारे शारदा नदी को पार कर भारतीय सीमा में आते हैं।
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चार दिन पहले खर्राटाक गांव की ओर गए कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर अमर उजाला को खर्राटाक के जंगल में वन्यजीवों के शिकार के  कई प्रमाण दिए हैं। यह प्रमाण चौंकाने वाले हैं। ग्रामीणों ने बताया कि शिकारियों ने वन्यजीवों का शिकार करने व मांस सुखाने को जगह-जगह पर मचान बनाए हैं। इन जगहों पर वन्यजीवों की खाल, शराब की खाली बोतलें व नेपाल निर्मित सिगरेट के खाली डिब्बे पड़े हुए हैं। खर्राटाक के आसपास वन विभाग की चौकी नहीं है और एसएसबी की बीओपी भी सात किलोमीटर दूर चूका में है। इस कारण शिकारियों के लिए यह जंगल मुफीद बना हुआ है। 
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इधर, चंपावत वन प्रभाग के डीएफओ जीवन चंद्र जोशी ने शिकारियों के डेरा जमाने की सूचना से इंकार किया है। उन्होंने कहा है कि मामले को गंभीरता से लेकर शिकारियों को दबोचने व सुरक्षा बढ़ाने की शीघ्र कार्रवाई की जाएगी। 



पहले भी शिकारियों के साथ दो बार हो चुकी है मुठभेड़
टनकपुर। खर्राटाक के जंगल में वन विभाग की शिकारियों के साथ दो बार मुठभेड़ हो चुकी है। वन विभाग, पुलिस और एसएसबी दो शिकारियों को पकड़ कर चार बंदूकें बरामद कर चुकी हैं। वन क्षेत्राधिकारी बीके महरा ने बताया कि वर्ष 2011 में एक बंदूक के साथ दो शिकारी पकड़े गए थे।  2013 में शिकारियों के साथ हुई मुठभेड़ में चार भरवा बंदूकें बरामद की गईं, जबकि शिकारी चकमा देकर नेपाल की ओर भाग गए थे।
 
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