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Champawat News: ...ईजा करन त कैले कै नी भ्यो कि करनू वोट त डालनै भ्यो
Sat, 20 Apr 2024 12:21 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sat, 20 Apr 2024 12:21 AM IST
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चंपावत। लोकसभा चुनाव के मतदान दिवस पर बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रही महिलाओं और अन्य मतदाताओं का दर्द छलक कर बाहर आया। जिला मुख्यालय के मुडियानी मतदान केंद्र पर मतदान करने आई महिलाओं से जब किस मुद्दे को लेकर वोट किया का सवाल पूछा तो महिलाओं का कुमाऊंनी में कहना था...ईजा करन त कैले के नी भ्यो कि करनू वोट त डालनै भ्यो यानी करना तो किसी को भी कुछ नही है लेकिन क्या करें वाेट तो डालना ही है।
मतदान केंद्र पर पहुंचीं राधा देवी, नीलावती देवी, त्रिलोगी देवी, कमला देवी, विमला देवी का कहना था कि वह इस आस में हर हमेशा लोकतंत्र के महापर्व में यह सोच कर भाग लेती हैं कि शायद इस दफा उनका भाग्य बदल जाए, लेकिन होता कुछ नहीं है। लोकसभा के अलावा विधानसभा और पंचायती चुनाव में प्रत्याशी और उनके समर्थक इस तरह के सब्जबाग दिखाते हैं कि लगता है कि इस चुनाव के बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा।
महिलाओं का कहना था कि बीते वर्ष आई अतिवृष्टि में उनके मकान के आंगन की दीवार गिर गई थी। राजस्व विभाग के लोग मौके पर आकर खानापूरी तो कर गए आज तक उन्हें किसी प्रकार का मुआवजा ही मिला और न ही क्षतिग्रस्त दीवार की मरम्मत ही हो सकी है। गांव में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, बिजली आदि बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है। गांवों में युवा बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं तो मनरेगा में रोजगार की गांरटी के दावे के बाद भी श्रमिकों को वर्ष भर में 100 दिन का रोजगार तक नहीं मिल पा रहा है।
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मतदान केंद्र पर पहुंचीं राधा देवी, नीलावती देवी, त्रिलोगी देवी, कमला देवी, विमला देवी का कहना था कि वह इस आस में हर हमेशा लोकतंत्र के महापर्व में यह सोच कर भाग लेती हैं कि शायद इस दफा उनका भाग्य बदल जाए, लेकिन होता कुछ नहीं है। लोकसभा के अलावा विधानसभा और पंचायती चुनाव में प्रत्याशी और उनके समर्थक इस तरह के सब्जबाग दिखाते हैं कि लगता है कि इस चुनाव के बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा।
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महिलाओं का कहना था कि बीते वर्ष आई अतिवृष्टि में उनके मकान के आंगन की दीवार गिर गई थी। राजस्व विभाग के लोग मौके पर आकर खानापूरी तो कर गए आज तक उन्हें किसी प्रकार का मुआवजा ही मिला और न ही क्षतिग्रस्त दीवार की मरम्मत ही हो सकी है। गांव में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, बिजली आदि बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है। गांवों में युवा बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं तो मनरेगा में रोजगार की गांरटी के दावे के बाद भी श्रमिकों को वर्ष भर में 100 दिन का रोजगार तक नहीं मिल पा रहा है।
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