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Champawat News: खूंखार तेंदुए को पकड़ने के लिए अब हनी ट्रैप पद्धति का आसरा
Mon, 16 Oct 2023 10:24 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 16 Oct 2023 10:24 AM IST
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चंद्रशेखर जोशी
चंपावत। सूखीढांग क्षेत्र में चिंता का सबब बने खूंखार तेंदुए को दबोचने के लिए ट्रैंकुलाइजर गन का उपयोग कामयाब नहीं रहा है। वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए अब हनी ट्रैप पद्धति का सहारा लिया है। भारतीय वन्य जीव संस्थान के सेवानिवृत्त निदेशक डॉ. जीएस रावत के परामर्श पर विभाग अब तेंदुए के तरल मूत्र (लिक्विड यूरिन) और मूत्र वाले स्थान की मिट्टी का सहारा ले रहा है। इस तरल मूत्र को नैनीताल के चिड़ियाघर से मंगाया गया है।
सूखीढांग के गजार गांव में तेंदुए ने बीती दो जुलाई को एक भोजनमाता को मार डाला था। इसके बाद से तेंदुआ राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले 17 बाइक सवारों को जख्मी कर चुका है। तब से वन विभाग तेंदुए को पकड़ने के लिए कई प्रयास कर चुका है। 26 सितंबर से ट्रैंकुलाइज करने वाली टीम को तैनात किया गया। एक गन से एक बार इंजेक्शन लगने के बावजूद तेंदुआ हत्थे नहीं चढ़ सका। लंबे वक्त से हाथ खाली रहने पर वन विभाग ने अब नए तरीके को आजमाया। इसके लिए चिड़ियाघर से लाए गए मादा तेंदुए के मूत्र और उसके पास की मिट्टी सूखीढांग में लगाए गए दोनों पिंजरों के पास रख दी गई है।
वन क्षेत्राधिकारी गुलहार हुसैन का कहना है कि नर तेंदुआ होने की पुष्टि के बाद मादा तेंदुए का मूत्र मंगाया गया। इस पूरे क्षेत्र में दो पिंजरों के अलावा 15 कैमरे लगाए गए हैं। वहीं ट्रैंकुलाइज करने वाली टीम भी आठवें मील में तैनात है। सूखीढांग के पास तैनात वन कर्मी एनएच पर दोपहिया वाहन से गुजरने वालों को समूह में जाने के लिए अपील कर रहे हैं। इसके अलावा बस्टिया में भी वन कर्मियों की एक टीम तैनात की गई है। संवाद
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ऐसे काम करेगी तरल मूत्र विधि
नर तेंदुए या दूसरे जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए विपरीत लिंग के जानवर का मूत्र और मूत्र वाली जगह की मिट्टी का पिंजरे के आसपास छिड़काव किया जाता है। इसकी गंध से आकर्षित होकर जानवर उस दिशा में बढ़ता है। इस मामले में उम्मीद है कि तेंदुआ पिंजरे जल्द ही फंस जाएगा।
ट्रैंकुलाइज करने के लिए डॉ. आयुष उनियाल के नेतृत्व में टीम अभी भी तैनात है। छह दिन पूर्व तेंदुआ पिंजरे के आसपास से गुजरा था। तेंदुए के पिंजरे में नहीं फंसने पर अब दूसरी विधि पर काम करने का विकल्प अपनाया गया है। नैनीताल चिड़ियाघर से लाए गए तरल मूत्र और मिट्टी का पिंजरे के आसपास छिड़काव कर दिया गया है। - आरसी कांडपाल, डीएफओ, चंपावत।
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चंपावत। सूखीढांग क्षेत्र में चिंता का सबब बने खूंखार तेंदुए को दबोचने के लिए ट्रैंकुलाइजर गन का उपयोग कामयाब नहीं रहा है। वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए अब हनी ट्रैप पद्धति का सहारा लिया है। भारतीय वन्य जीव संस्थान के सेवानिवृत्त निदेशक डॉ. जीएस रावत के परामर्श पर विभाग अब तेंदुए के तरल मूत्र (लिक्विड यूरिन) और मूत्र वाले स्थान की मिट्टी का सहारा ले रहा है। इस तरल मूत्र को नैनीताल के चिड़ियाघर से मंगाया गया है।
सूखीढांग के गजार गांव में तेंदुए ने बीती दो जुलाई को एक भोजनमाता को मार डाला था। इसके बाद से तेंदुआ राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले 17 बाइक सवारों को जख्मी कर चुका है। तब से वन विभाग तेंदुए को पकड़ने के लिए कई प्रयास कर चुका है। 26 सितंबर से ट्रैंकुलाइज करने वाली टीम को तैनात किया गया। एक गन से एक बार इंजेक्शन लगने के बावजूद तेंदुआ हत्थे नहीं चढ़ सका। लंबे वक्त से हाथ खाली रहने पर वन विभाग ने अब नए तरीके को आजमाया। इसके लिए चिड़ियाघर से लाए गए मादा तेंदुए के मूत्र और उसके पास की मिट्टी सूखीढांग में लगाए गए दोनों पिंजरों के पास रख दी गई है।
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वन क्षेत्राधिकारी गुलहार हुसैन का कहना है कि नर तेंदुआ होने की पुष्टि के बाद मादा तेंदुए का मूत्र मंगाया गया। इस पूरे क्षेत्र में दो पिंजरों के अलावा 15 कैमरे लगाए गए हैं। वहीं ट्रैंकुलाइज करने वाली टीम भी आठवें मील में तैनात है। सूखीढांग के पास तैनात वन कर्मी एनएच पर दोपहिया वाहन से गुजरने वालों को समूह में जाने के लिए अपील कर रहे हैं। इसके अलावा बस्टिया में भी वन कर्मियों की एक टीम तैनात की गई है। संवाद
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ऐसे काम करेगी तरल मूत्र विधि
नर तेंदुए या दूसरे जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए विपरीत लिंग के जानवर का मूत्र और मूत्र वाली जगह की मिट्टी का पिंजरे के आसपास छिड़काव किया जाता है। इसकी गंध से आकर्षित होकर जानवर उस दिशा में बढ़ता है। इस मामले में उम्मीद है कि तेंदुआ पिंजरे जल्द ही फंस जाएगा।
ट्रैंकुलाइज करने के लिए डॉ. आयुष उनियाल के नेतृत्व में टीम अभी भी तैनात है। छह दिन पूर्व तेंदुआ पिंजरे के आसपास से गुजरा था। तेंदुए के पिंजरे में नहीं फंसने पर अब दूसरी विधि पर काम करने का विकल्प अपनाया गया है। नैनीताल चिड़ियाघर से लाए गए तरल मूत्र और मिट्टी का पिंजरे के आसपास छिड़काव कर दिया गया है। - आरसी कांडपाल, डीएफओ, चंपावत।