{"_id":"10c477118e67027b559c2bc96e40d339","slug":"homes-are-being-loaves-of-volunteers-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डेढ़ सौ से अधिक घरों में बन रही हैं स्वयंसेवकों की रोटियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डेढ़ सौ से अधिक घरों में बन रही हैं स्वयंसेवकों की रोटियां
सतीश जोशी ‘सत्तू’/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sat, 09 Jan 2016 10:30 PM IST
विज्ञापन
एक ओर जहां देश में असहिष्णुता को लेकर बहस जारी है। वहीं चंपावत जिले के टनकपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का दस दिनी शारीरिक अभ्यास वर्ग (आईटीसी) सामाजिक समरसता की मिसाल बना है। जहां दो जनवरी से चल रहे आरएसएस के अभ्यास वर्ग में शिरकत कर रहे 133 स्वयंसेवकों के लिए डेढ़ सौ से अधिक घरों में रोटियां बन रही है। प्रत्येक दिन हिंदू-मुस्लिम धर्मों के सभी समुदाय के परिवारों की ओर से तैयार रोटियों को एकत्र कर स्वयंसेवकों को भोजन में कराया जा रहा है।
विज्ञापन
आरएसएस की ओर से पहली बार सहभोज में विभिन्न घरों से रोटी मंगाने का प्रयोग किया है, जो खासा सफल रहा है। सबसे अच्छी बात ये है कि सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित अभ्यास वर्ग में स्वयंसेवकों के भोजन के लिए रोटियां तैयार करने में किसी प्रकार छूआछूत अथवा ऊंचनीच का भेदभाव नजर नहीं आ रहा है। उच्चकुलीन ब्राह्मण हो या क्षत्रिय समाज के लोग, दलित समुदाय के लोग हो या मुस्लिम परिवार, सभी के घरों से अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार रोटियां बनाई जा रही हैं, इससे पूर्व तक आरएसएस के आईटीसी एवं ओटीसी शिविरों में ही भोजन तैयार किया जाता था, लेकिन पहली बार किया गया यह प्रयोग अपने उद्देश्य के साथ ही सामाजिक समरसता को बढ़ाने में भी मील का पत्थर साबित हुआ है।
विज्ञापन
कौमी एकता को भी मिली मजबूती
दस दिनी शिविर के मुख्य शारीरिक प्रमुख मनीष कलौनी के अलावा अमजद हुसैन, शंकर, रोहित, संजय, चंद्रशेखर, कमल, नरेश, गंगा आदि का कहना है कि अलग-अलग घरों से भोजन एकत्र कर एक साथ खाने से स्वयंसेवकों के बीच कौमी एकता की भावना को भी मजबूती मिली है। प्रत्येक दिन विभिन्न घरों से 1500 से 2000 तक रोटियां शिविर में आ रही हैं।
विज्ञापन
आत्मरक्षा के साथ योग प्राणायाम के सिखाए गुर
शिविर में स्वयंसेवकों को आत्मरक्षा के लिए जूडो, कराटे, लाठी चलाने का प्रशिक्षण देने के साथ ही उन्हें योग प्राणायाम और पद विन्यास के गुर सिखाए जा रहे हैं। स्वयंसेवकों को प्रत्येक दिन सुबह दो घंटा और शाम को दो घंटे का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बौद्धिक सत्रों में रवीश पचौली, निर्मल चौधरी आदि मार्गदर्शन करा रहे हैं।