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बंजर खेतों को हरा-भरा करने के लिए युवाओं की उच्च कृषि शिक्षा जरूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।
Updated Sat, 24 Feb 2018 11:26 PM IST
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चंपावत में सतत विकास के सेमिनार में मौजूद देशी विदेशी मेहमान।
- फोटो : अमर उजाला
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जिला प्रशासन और इंटरनेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (आईसीएसडी) की ओर से पहली बार सतत विकास पर्व संबंधी दो दिनी अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में जुटे देश-विदेश के विशेषज्ञों ने चंपावत जिले के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने जिले के विकास में विजन 2030 के तहत बंजर खेतों को हरा-भरा करने के लिए युवाओं की उच्च शिक्षा में कृषि को जरूरी बताया। वहीं कृषि विशेषज्ञों ने पहाड़ों पर खेती के लगातार घटते रकबे पर चिंता भी जताई।
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विदेशी विशेषज्ञों ने उन्नत खेती के लिए परंपरागत बीजों को संरक्षित रखने की कार्ययोजना तैयार करने, प्रचुर सिंचाई, खरपतवारों का समय से निवारण, बीजों का भंडारण, जैविक खादों का प्रयोग एवं बनाने की विधि, युवाओं को खेती के लिए प्रोत्साहन, खेतों की जुताई-बुवाई के समय के संबंध में जानकारी देने पर जोर दिया। विशेषज्ञों का कहना था कि पहाड़ी क्षेत्रों में परिवार, खेती से लेकर शिक्षा की जिम्मेदारी महिलाओं पर निर्भर है। यहां के युवाओं को पारिवारिक जिम्मेदारियां उठाने के साथ ही आधुनिक तकनीक से खेती में भी महिलाओं का हाथ बंटाना होगा, जिससे कृषि, बागवानी के क्षेत्र में पहाड़ सिरमौर बन सके।
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रोजगार के अभाव में अधिक गति से बढ़ा है पलायन
हिमालयन विकास समिति के मोहन सिंह बिष्ट के अनुसार गांवों से पलायन के पीछे अच्छी शिक्षा की चाह एक बड़ी वजह रही है। रोजगार के अभाव में पलायन अधिक गति से बढ़ा है। बुनियादी सुविधाओं और उच्च शिक्षा की खातिर आज गांव के गांव खाली हो रहे हैं। हालात ये हैं कि आज पहाड़ के सैकड़ों गांव वीरान हो चुके हैं और कई इस कगार पर हैं।
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जैविक खादों के प्रयोग को देना होगा बढ़ावा
अलाप संस्था की निदेशक शिवा सेल ने कहा कि कृषकों को उन्हीं के घर पर कृषि संबंधी सभी जानकारियों के साथ नई तकनीकी से रूबरू करना होगा। खेती के नए उपकरणों और जैविक खादों के प्रयोग से बंजर पड़ी भूमि को खेती योग्य बनाने पर विचार किया जाना चाहिए। लोग उन्नत और आधुनिक तकनीकी से खेती करेंगे तो उपज बढ़ेगी और लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
इन विदेशी विषय विशेषज्ञों ने दिए व्याख्यान
सतत विकास पर्व के तहत कलक्ट्रेट, विकास भवन, जवाहर नवोदय विद्यालय आदि स्थानों में इंडोनेशिया की लिंडा नोबियाना, इस्राइल के मो. मोबासी, मिस सलाम केदाम, मिस एरन कदाम, आवेद इल लताफ मकदादी, इजिप्ट के मोहम्मद खलील, अफगानिस्तान के इमाउद्दीन हुसैन, मिस गुलरंग, मिस साबिया, फैजल, शषन, हमीदुल्ला बसिरियार, कजाकिस्तान के अलमीरिया उमारबा, वियतनाम के नौगन, नाइजीरिया के रैंव्यू नूरा, मंसूर मोहम्मद, उज्बेकिस्तान की मिस निलोफर, सूडान के अलताफ अली, तुर्कमेनिस्तान की मिस करीमा, अल्तियन कुरवानुमोबा, समीर मुस्तबेन, दर्शना काकावायबा, यमन के मगेह सलेह, मोहम्मद अब्दुल्ला, सुल्तान अलबारिकी, मुगेद अलहमीदी ने विभिन्न सत्रों में अपने व्याख्यान दिए।