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बीमार सिस्टम की बानगी, हेल्थ मोबाइल वैन बनी कबाड़, अब होगी नीलाम
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जंक खाता चंपावत का सचल चिकित्सा वाहन।
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। स्वास्थ्य विभाग के पांच वाहन बीमार सिस्टम की बानगी भर हैं। एक करोड़ रुपये की लागत के इन वाहनों को बीमार लोगों को नया जीवन देना था, लेकिन ये सचल अस्पताल, एंबुलेंस सहित ये वाहन खुद कभी सेहतमंद नहीं रह सके। ये कैसे चलाए जाएंगे, इस पर विचार किए बगैर इन्हें खरीद लिए गया। नतीजा इन वाहनों से दस हजार लोगों का भी इलाज नहीं हो सका। अब इन वाहनों की स्वास्थ्य विभाग नीलामी करा रहा है। इसके लिए विधिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
जिले को 2006 में 31.50 लाख रुपये से राष्ट्रीय सम विकास योजना से चलित शल्य चिकित्सालय एवं परीक्षण वाहन (मोबाइल वैन) मिला। जिसमें एक्सरे, पैथोलॉजी जांच सहित तमाम सुविधाएं थीं। इसके जरिये दस साल तक कुल 720 कैंप लगाकर मरीजों का इलाज होना था, लेकिन लगे सिर्फ 39 कैंप। दिसंबर 2010 से ये सेवा पूरी तरह बंद है। इसी तरह जैन वीडियो ऑन व्हीकल सेवा भी अप्रैल 2016 से बंद है। आरोग्य सेवा और दो अन्य वाहन भी मरीजों को दवा से ज्यादा दर्द देते रहे। अब इन सभी पांचों वाहनों को नीलाम किया जा रहा है। एआरटीओ रश्मि भट्ट का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस और अन्य वाहनों का परिवहन विभाग वेल्यूशन करेगा। अगले तीन महीनों में स्वास्थ्य विभाग परिसर में जंक खा रहे इन वाहनों को नीलाम कर दिया जाएगा।
इसलिए बर्बाद हुई मोटी रकम
सचल वाहनों से दूरदराज के अस्पताल विहीन गांवों में कैंप लगाकर इलाज दिया जाना था। बीपीएल मरीजों को दवाएं भी निशुल्क दी जानी थी। लेकिन चालक और वाहनों के रखरखाव के खर्च की व्यवस्था नहीं की गई थी। डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी बनी रही। इन वजहों से इतनी मोटी रकम खर्च होने पर भी इसका लाभ नहीं मिल सका है। ग्रामीणों का कहना है कि इस सेवा के काम नहीं करने से लोगों की परेशानी बढ़ी है।
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कोट.....
विभाग के इन तमाम वाहनों की अवधि पूरी होने के साथ हालत भी ठीक नहीं है। इस कारण उन्हें चलाया नहीं जा सकता। ये वाहन डेढ़ दशक पूर्व मिले थे। इन वाहनों का कारगर तरीके से संचालन क्यों नहीं हुआ, इसे मैं नहीं बता सकता। मामला काफी पुराना होने से उनकी जानकारी में नहीं है।
डॉ. आरपी खंडूरी,
सीएमओ, चंपावत।
लोकार्पण हुए 27 दिन हुए, नहीं लगे जीवन रक्षक उपकरण
चंपावत। टनकपुर के लिए बीएडीपी से 25 लाख रुपये से खरीदी गई बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेेंस का 16 अगस्त को लोकार्पण हुआ। लेकिन 27 दिन बीतने के बावजूद ये एंबुलेंस अभी सेवा देने लायक ही नहीं बन सकी है। चिकित्साधिकारी डॉ. हेमंत शर्मा ने बताया कि जीवन रक्षक उपकरण लगाए जाने को एंबुलेंस को हल्द्वानी भेजा गया है। इसके लगने के साथ ही यह एंबुलेंस काम करना शुरू कर देगा। एंबुलेंस चलाने को पीआरडी से चालक की व्यवस्था की गई है। जबकि अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ टनकपुर अस्पताल को देना होगा।
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जिले को 2006 में 31.50 लाख रुपये से राष्ट्रीय सम विकास योजना से चलित शल्य चिकित्सालय एवं परीक्षण वाहन (मोबाइल वैन) मिला। जिसमें एक्सरे, पैथोलॉजी जांच सहित तमाम सुविधाएं थीं। इसके जरिये दस साल तक कुल 720 कैंप लगाकर मरीजों का इलाज होना था, लेकिन लगे सिर्फ 39 कैंप। दिसंबर 2010 से ये सेवा पूरी तरह बंद है। इसी तरह जैन वीडियो ऑन व्हीकल सेवा भी अप्रैल 2016 से बंद है। आरोग्य सेवा और दो अन्य वाहन भी मरीजों को दवा से ज्यादा दर्द देते रहे। अब इन सभी पांचों वाहनों को नीलाम किया जा रहा है। एआरटीओ रश्मि भट्ट का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस और अन्य वाहनों का परिवहन विभाग वेल्यूशन करेगा। अगले तीन महीनों में स्वास्थ्य विभाग परिसर में जंक खा रहे इन वाहनों को नीलाम कर दिया जाएगा।
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इसलिए बर्बाद हुई मोटी रकम
सचल वाहनों से दूरदराज के अस्पताल विहीन गांवों में कैंप लगाकर इलाज दिया जाना था। बीपीएल मरीजों को दवाएं भी निशुल्क दी जानी थी। लेकिन चालक और वाहनों के रखरखाव के खर्च की व्यवस्था नहीं की गई थी। डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी बनी रही। इन वजहों से इतनी मोटी रकम खर्च होने पर भी इसका लाभ नहीं मिल सका है। ग्रामीणों का कहना है कि इस सेवा के काम नहीं करने से लोगों की परेशानी बढ़ी है।
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विभाग के इन तमाम वाहनों की अवधि पूरी होने के साथ हालत भी ठीक नहीं है। इस कारण उन्हें चलाया नहीं जा सकता। ये वाहन डेढ़ दशक पूर्व मिले थे। इन वाहनों का कारगर तरीके से संचालन क्यों नहीं हुआ, इसे मैं नहीं बता सकता। मामला काफी पुराना होने से उनकी जानकारी में नहीं है।
डॉ. आरपी खंडूरी,
सीएमओ, चंपावत।
लोकार्पण हुए 27 दिन हुए, नहीं लगे जीवन रक्षक उपकरण
चंपावत। टनकपुर के लिए बीएडीपी से 25 लाख रुपये से खरीदी गई बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेेंस का 16 अगस्त को लोकार्पण हुआ। लेकिन 27 दिन बीतने के बावजूद ये एंबुलेंस अभी सेवा देने लायक ही नहीं बन सकी है। चिकित्साधिकारी डॉ. हेमंत शर्मा ने बताया कि जीवन रक्षक उपकरण लगाए जाने को एंबुलेंस को हल्द्वानी भेजा गया है। इसके लगने के साथ ही यह एंबुलेंस काम करना शुरू कर देगा। एंबुलेंस चलाने को पीआरडी से चालक की व्यवस्था की गई है। जबकि अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ टनकपुर अस्पताल को देना होगा।