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जिले में पांच जगह लगाई जाएंगी ग्राइंडर मशीनें 

Fri, 22 Feb 2019 10:59 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन अमर उजाला ब्यूरो चंपावत।
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत। Published by: बृजमोहन बृजमोहन Updated Fri, 22 Feb 2019 10:59 PM IST
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Grinder machine will be established in five places
जड़ीबूटी भेषज विकास इकाई जिला समन्वयक राकेश वर्मा। - फोटो : अमर उजाला
तेजपात सहित कई जड़ीबूटियों का चूर्ण बनाने के लिए जिले में पांच जगह ग्राइंडर (पीसने वाली) मशीनें लगाई जाएंगी। जड़ीबूटी भेषज इकाई ने इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली है। भेषज संघ के अध्यक्ष एडवोकेट अशोक चौधरी का कहना है कि इन मशीनों के लगने से जिले के जड़ीबूटी किसानों को लाभ होगा। इसका उपयोग जड़ीबूटी के अलावा बहुउद्देश्यीय रूप में किया जाएगा। 2.50 लाख रुपये की लागत की इन ग्राइंडरों को लगाने वाला चंपावत प्रदेश का पहला जिला है। 
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चंपावत जिले में विविध प्रजाति की जड़ीबूटियों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इस साल जनवरी तक 2109 क्विंटल जड़ीबूटियों की निकासी की जा चुकी है। इससे किसानों की करीब 90 लाख रुपये की आय हुई है। जड़ीबूटी के प्रचुर मात्रा में कृषिकरण के मद्देनजर 2017-18 में तत्कालीन डीएम डॉ. अहमद इकबाल ने मूल्य संवर्धन के लिए योजना बनाने के विभाग को निर्देश दिए थे।
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भेषज इकाई के जिला समन्वयक राकेश वर्मा का कहना है कि भेषज इकाई ने तेजपात, हल्दी सहित कई जड़ीबूटियों का चूर्ण बनाने के लिए जिले में 9 प्रस्ताव तैयार किए। इनमें से मार्च तक सूखीढांग, अमोड़ी, सायली, पाटी और रौसाल में ग्राइंडर लगा दिए जाएंगे, जबकि जौल, धुरा, सिप्टी और दुबडजैनल में अगले वित्त वर्ष में ग्राइंडर लगाए जाएंगे। बताया गया कि इन ग्राइंडरों से जड़ीबूटी के अलावा गेहूं, मक्का, मड़ुवा आदि उत्पादों को भी पीसा जाएगा। डीएम रणवीर सिंह चौहान का कहना है कि ग्राइंडर के जरिए किसानों की आय में इजाफा हो सकेगा। 
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2100 किसानों को होगा फायदा 
जिले के सूखीढांग, सिन्याड़ी, धुरा, श्यामलाताल, जौल, नौलापानी, अमोड़ी, स्वांला, धौन, दियूरी, स्याली, सिप्टी, रौसाल, फुंगर, बाराकोट, पाटी आदि गांवों में तेजपात सहित तमाम जड़ीबूटियों की भरपूर खेती होती है। जड़ीबूटी भेषज संघ की उपाध्यक्ष माया चौड़ाकोटी का कहना है कि ग्राइंडर से जिले के 2100 जड़ीबूटी किसानों को सीधा लाभ होगा। 


एकमात्र अधिकारी से चल रहा पूरा विभाग 
चंपावत जिले के जड़ीबूटी भेषज विकास इकाई का हाल बेहद बुरा है। पूरा महकमा एकमात्र जड़ीबूटी भेषज समन्वयक राकेश वर्मा के आसरे चल रहा है। न बाबू हैं और न ही अनुसेवक। विभाग में शेष तीनों पद रिक्त हैं। 
 
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