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सरकारी महकमों में भी नहीं इलेक्ट्रानिक कांटे
ब्यूरो/अमर उजाला/चंपावत
Updated Sun, 10 May 2015 10:40 PM IST
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जिले में अब भी बड़े पैमाने पर मैन्युअल तरीके के तराजुओं का उपयोग किया जा रहा है। प्राइवेट प्रतिष्ठान ही नहीं सरकारी महकमों में भी इलेक्ट्रानिक कांटे नहीं है। यहां पूर्ति विभाग के गोदामों में भी पुराने ढर्रे के तराजुओं से खाद्यान्न तौल की जा रही है। शासन ने भी तौल के इन तरीकों पर नाराजगी जताते हुए पूर्ति विभाग को फटकार लगाई थी।
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शासन की नीति इलेक्ट्रानिक तराजुओं को जरूरी बनाने की है। विधि माप विज्ञान की प्रभारी निरीक्षक शांति भंडारी का कहना है कि इलेक्ट्रानिक तराजुओं से घटतोली की आशंका कम हो जाती है। मैन्युअल तराजू में लगातार उपयोग में आने से बांटों के घिसने से तौल कम हो जाती है, लेकिन इसके बावजूद जिले में अभी भी दो-तिहाई से ज्यादा तराजू मैन्युअल हैं, जिनमें गड़बड़ियाें का अंदेशा बना रहता है।
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जिले में पूर्ति विभाग के छह गोदाम हैं। हजारों मीट्रिक टन क्षमता के इन गोदामों में किसी में भी इलेक्ट्रानिक कांटे नहीं है। वर्षों पुराने तराजुओं से सरकारी सस्ता गल्ला के दुकानों को अनाज दिया जाता है। इसी तरह गैस वितरण केंद्राें में भी आउटडेटेड तराजू हैं।
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