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सिमटता जा रहा सिटरस फलों का उत्पादन
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चंपावत जिले में फलों से लदा संतरे का पेड़।
- फोटो : CHAMPAWAT
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जिले में सिटरस फलों का उत्पादन लगातार सिमटता जा रहा है। जिन स्थानों में एक दशक पूर्व तक सिटरस फलों का व्यापक उत्पादन होता था, वहां नई फल पट्टी विकसित नहीं होने के कारण सिटरस फलों के क्षेत्रफल के साथ ही उत्पादन भी सिमटता जा रहा है।
कृषि और उद्यान विभाग की ओर से समय-समय पर किसानों को सिटरस फलों के पौधे तो बांटे जाते हैं लेकिन अधिकांश स्थानों में तापमान संबंधी प्रभावों के चलते सिटरस फलों के पौधे अपेक्षित ग्रोथ नहीं कर पा रहे हैं और नई फल पट्टियां विकसित नहीं हो पा रही हैं।
दूसरी ओर अपने निजी संसाधनों से सिटरस फलों के उत्पादन में लगे किसानों को अपने उत्पादों के विपणन (मार्केटिंग) के लिए समुचित सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। उद्यान विभाग की ओर से बीते चार सालों से सिटरस फलों की खरीद के लिए एक भी सरकारी क्रय केंद्र नहीं खोला गया है।
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इस कारण उत्पादकों को जिले में संतरा और माल्टा आदि फल बेचने के लिए स्वयं बाजार तलाशना पड़ रहा है। फलों का उत्पादन करने वालेकिसान प्रेम सिंह, पुष्कर सिंह, भुवन पांडेय, कैलाश जोशी आदि दूरदराज क्षेत्रों से सिटरस फलों को चंपावत, लोहाघाट, टनकपुर, बनबसा के नगरीय क्षेत्रों में पहुंचा रहे हैं।
चंपावत जिले में सिटरस फलों का क्षेत्रफल और उत्पादन
सिटरस फल क्षेत्रफल उत्पादन
माल्टा 1025 हेक्टेयर 2110 एमटी
गलगल 406 हेक्टेयर 1041 एमटी
संतरा 535 हेक्टेयर 920 एमटी
कागजी नींबू 260 हेक्टेयर 380 एमटी
कोल्ड स्टोर नहीं होने से भी बढ़ी दिक्कतें
चंपावत। जिले में सिटरस फलों के भंडारण के लिए कोल्ड स्टोर की सुविधा नहीं होने से भी फल उत्पादकों की दिक्कतें बढ़ रही हैं। भंडारण की सुविधा नहीं होने के कारण उत्पादकों को औने पौने दामों में अपने उत्पाद बेचने पड़ते हैं। छह वर्ष पूर्व में जिले में कुछ स्थानों पर दिल्ली की मदर डेयरी जैसी संस्थाओं ने क्षेत्र के मौसमी फलों की खरीद-फरोख्त का सिलसिला शुरू किया था लेकिन जल्द ही इस पर भी ब्रेक लग गया।
जिले में इस बार भी सिरटस फलों की खरीद के लिए क्रय केंद्र खोले जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। जिले में सिटरस फलों की पट्टियां विकसित करने के लिए समय-समय पर किसानों को पौधे वितरित किए जा रहे हैं।
एनके आर्या, जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत।
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कृषि और उद्यान विभाग की ओर से समय-समय पर किसानों को सिटरस फलों के पौधे तो बांटे जाते हैं लेकिन अधिकांश स्थानों में तापमान संबंधी प्रभावों के चलते सिटरस फलों के पौधे अपेक्षित ग्रोथ नहीं कर पा रहे हैं और नई फल पट्टियां विकसित नहीं हो पा रही हैं।
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दूसरी ओर अपने निजी संसाधनों से सिटरस फलों के उत्पादन में लगे किसानों को अपने उत्पादों के विपणन (मार्केटिंग) के लिए समुचित सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। उद्यान विभाग की ओर से बीते चार सालों से सिटरस फलों की खरीद के लिए एक भी सरकारी क्रय केंद्र नहीं खोला गया है।
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इस कारण उत्पादकों को जिले में संतरा और माल्टा आदि फल बेचने के लिए स्वयं बाजार तलाशना पड़ रहा है। फलों का उत्पादन करने वालेकिसान प्रेम सिंह, पुष्कर सिंह, भुवन पांडेय, कैलाश जोशी आदि दूरदराज क्षेत्रों से सिटरस फलों को चंपावत, लोहाघाट, टनकपुर, बनबसा के नगरीय क्षेत्रों में पहुंचा रहे हैं।
चंपावत जिले में सिटरस फलों का क्षेत्रफल और उत्पादन
सिटरस फल क्षेत्रफल उत्पादन
माल्टा 1025 हेक्टेयर 2110 एमटी
गलगल 406 हेक्टेयर 1041 एमटी
संतरा 535 हेक्टेयर 920 एमटी
कागजी नींबू 260 हेक्टेयर 380 एमटी
कोल्ड स्टोर नहीं होने से भी बढ़ी दिक्कतें
चंपावत। जिले में सिटरस फलों के भंडारण के लिए कोल्ड स्टोर की सुविधा नहीं होने से भी फल उत्पादकों की दिक्कतें बढ़ रही हैं। भंडारण की सुविधा नहीं होने के कारण उत्पादकों को औने पौने दामों में अपने उत्पाद बेचने पड़ते हैं। छह वर्ष पूर्व में जिले में कुछ स्थानों पर दिल्ली की मदर डेयरी जैसी संस्थाओं ने क्षेत्र के मौसमी फलों की खरीद-फरोख्त का सिलसिला शुरू किया था लेकिन जल्द ही इस पर भी ब्रेक लग गया।
जिले में इस बार भी सिरटस फलों की खरीद के लिए क्रय केंद्र खोले जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। जिले में सिटरस फलों की पट्टियां विकसित करने के लिए समय-समय पर किसानों को पौधे वितरित किए जा रहे हैं।
एनके आर्या, जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत।