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अच्छी खबर:राज्य बनने के बाद पहली बार महफूज रहे जंगल
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चंपावत। फायर सीजन 15 फरवरी से शुरू हुआ था। इसकी अवधि सोमवार को खत्म होगी। ये पहला मौका है, जब जंगल आग की चपेट से बचे रहे। कई बार बारिश होने से तपिश कम रही। इस कारण इस बार जंगल में कम आग लगी। उत्तराखंड बनने के बाद यह पहला मौका है, जब सबसे कम जंगल का नुकसान हुआ। इस बार जिले में आग की सिर्फ एक घटना में 0.60 हेक्टेयर जंगल जला।
इस वर्ष जिले के आरक्षित और पंचायती वन पूरी तरह सुरक्षित रहे। इससे पूर्व 2013 में आग लगने की एक घटना हुई। इसमें दो हेक्टेयर जंगल जला जबकि 2019 के फायर सीजन में आग की 111 घटनाओं में 150.35 हेक्टेयर वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा। इसमें तीन लाख रुपये से अधिक मूल्य की क्षति हुई है। वन संरक्षक केएस बिष्ट का कहना है कि कम तपिश, उम्दा विभागीय प्रबंधन और लॉकडाउन के चलते आरक्षित, सिविल, पंचायती वन क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं नगण्य रहीं। चंपावत क्षेत्र में 62098.32 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र के अलावा 36780.563 हेक्टेयर पंचायती और 22815.7 हेक्टेयर सिविल वन हैं। आग की वारदात कम होने की वजह कम तपिश, 22 मार्च से जारी लॉकडाउन और कोरोना भी रहा।
जंगल में आग की घटनाएं :
वर्ष घटनाएं प्रभावित क्षेत्र (हेक्टेयर में)
2011 05 06
2012 25 56
2013 01 02
2014 15 40
2015 13 15
2016 62 137.5
2017 34 50.65
2018 84 133.46
2019 111 150.35
जंगल को आग से बचाने के लिए विभाग के भरपूर इंतजाम किए थे। बारिश और लॉकडाउन की वजह से कम आवाजाही से इस बार चंपावत में जंगल की आग पर खतरा कम रहा।
- केएस बिष्ट
वन संरक्षक, चंपावत।
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इस वर्ष जिले के आरक्षित और पंचायती वन पूरी तरह सुरक्षित रहे। इससे पूर्व 2013 में आग लगने की एक घटना हुई। इसमें दो हेक्टेयर जंगल जला जबकि 2019 के फायर सीजन में आग की 111 घटनाओं में 150.35 हेक्टेयर वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा। इसमें तीन लाख रुपये से अधिक मूल्य की क्षति हुई है। वन संरक्षक केएस बिष्ट का कहना है कि कम तपिश, उम्दा विभागीय प्रबंधन और लॉकडाउन के चलते आरक्षित, सिविल, पंचायती वन क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं नगण्य रहीं। चंपावत क्षेत्र में 62098.32 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र के अलावा 36780.563 हेक्टेयर पंचायती और 22815.7 हेक्टेयर सिविल वन हैं। आग की वारदात कम होने की वजह कम तपिश, 22 मार्च से जारी लॉकडाउन और कोरोना भी रहा।
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जंगल में आग की घटनाएं :
वर्ष घटनाएं प्रभावित क्षेत्र (हेक्टेयर में)
2011 05 06
2012 25 56
2013 01 02
2014 15 40
2015 13 15
2016 62 137.5
2017 34 50.65
2018 84 133.46
2019 111 150.35
जंगल को आग से बचाने के लिए विभाग के भरपूर इंतजाम किए थे। बारिश और लॉकडाउन की वजह से कम आवाजाही से इस बार चंपावत में जंगल की आग पर खतरा कम रहा।
- केएस बिष्ट
वन संरक्षक, चंपावत।