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14 महीने से बंद हैं मंच उप तहसील के किवाड़

Thu, 15 Feb 2018 10:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत Updated Thu, 15 Feb 2018 10:49 PM IST
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For 14 months, the stage of the sub-tehsil is closed.
14 माह से लटका है सीमावर्ती मंच की उप तहसील में ताला। - फोटो : अमर उजाला
 जिले की सीमांत की मंच उप तहसील पूरी तरह से राजनीति की भेंट चढ़ गई है। उद्घाटन के साथ ही पिछले 14 महीने से इस उप तहसील के किवाड़ों में ताला लटका हुआ है। इसके निर्माण से ग्रामीणों को कोई भी लाभ नहीं मिल रहा है तथा सीमांत क्षेत्र के लोग अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। 
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विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तत्कालीन विधायक हेमेश खर्कवाल ने दिसंबर 2016 में मंच उप तहसील का उद्घाटन वन पंचायत भवन में किया था। इस दौरान लोगों को भरोसा दिलाया गया था कि अब उन्हें अपने जरूरी दस्तावेज बनाने के लिए जिला मुख्यालय की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। लेकिन उद्घाटन के दो दिन बाद से उप तहसील में ताला लटका पड़ा है। वर्तमान भाजपा सरकार ने भी इस और अभी तक ध्यान नहीं दिया है। जिससे क्षेत्र की 14 ग्राम पंचायतों की करीब 20 हजार की आबादी को 35 किमी दूर चंपावत जिला मुख्यालय आना पड़ रहा है। 
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खतौनी की नकल, आधार कार्ड, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, जाति, आय प्रमाण पत्र के साथ जरूरी दस्तावेज बनाने के लिए ग्रामीणों को चंपावत जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। ग्रामीण शेर सिंह महर, राहुल सिंह, जोत सिंह, बची सिंह, पूरन सिंह, दीवान सिंह आदि का कहना है कि इस तहसील से उन्हें कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई बार मांग उठाने के बाद भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।   
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इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्टाफ की कमी बनी रोड़ा
चंपावत। सीमांत मंच उप तहसील का संचालन 14 माह बीतने के बाद शुरू नहीं होने के संबंध में एसडीएम सदर सीमा विश्वकर्मा का कहना है कि क्षेत्र में इंटरनेट नेटवर्क की दिक्कत होने के साथ ही स्टाफ की कमी के कारण उप तहसील का संचालन नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में शासन से लगातार पत्राचार कर मोबाइल कनेक्टिविटी और पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती किए जाने की डिमांड भेजी जा रही है।


तहसील खुलने के बाद एक भी प्रमाण पत्र नहीं बना 
चंपावत। जिले का सीमांत तल्लादेश क्षेत्र आजादी के सात दशक बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। दिसंबर 2016 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मंच में उप तहसील तो खोल दी। लेकिन तब से आज तक इस उप तहसील से एक भी सर्टिफिकेट जारी नहीं हो सका है।
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