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लॉकडाउन ने उड़ा दी फूलों की महक, बर्बाद हुए लाखों रुपये
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चंपावत में पॉलीहाउस में फूलों की खेती।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। जिले के बसंत गहतोड़ी ने एक साल पहले ही फ्लोरीकल्चर (फूलों की खेती) की। इसके लिए उन्होंने कर्ज लेकर पांच नाली जमीन में लिलियम उगाया। फूल भी खूब खिले, मगर लॉकडाउन ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। न फूल कहीं भेजे जा सके और नहीं मंडी में फूलों का कोई खरीदार। इस बार 50 दिन के लॉकडाउन ने फूलों की खेती करने वालों के चेहरों को फूलों की तरह ही मुरझा दिया है। शादी-ब्याह, धार्मिक समारोह, बैठकें-सेमिनार, समारोह या दूसरे बड़े कार्यक्रम सब लॉकडाउन की भेंट चढ़ गए। इसके चलते जिले में ही 45 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
डीएचओ एनके आर्या का कहना है कि जिले में करीब छह हजार वर्ग मीटर में लिलियम की खेती होती है। छिटपुट कार्नेसन की भी छिटपुट खेती की जाती है लेकिन इस बार लॉकडाउन से इस खेती को भारी झटका लगा है। किसान बताते हैं कि एकमात्र गाजीपुर मंडी में ही फूलों की खरीद होती है, लेकिन लॉकडाउन की वजह से मंडी खुली नहीं। मजबूरन उन्हें फूलों को तोड़कर फेंकना पड़ा। डीएचओ आर्या बताते हैं कि नुकसान की जानकारी निदेशालय भेजी गई है। साथ ही किसानों की भरपाई की मांग को भी निदेशालय तक पहुंचाया गया है।
फूलों को तुड़वाने में भी जेब से खर्च हुआ : राजीव
फूलों के बाजार की कभी कोई समस्या नहीं रही, लेकिन पहली बार लॉकडाउन ने सब कुछ ठप कर दिया। इस वजह से न केवल फूलों से आय नहीं हुई, बल्कि फूलों को तुड़वाने में भी जेब से देना पड़ा है।
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- राजीव कुमार, वालिक।
पहली बार खेती की और लगा तगड़ा झटका : बसंत
उम्मीद थी फूल की खेती से आमदनी होगी। फूल भी खूब अच्छे हुए, लेकिन उनकी मांग थी और नहीं बिक्री का कोई प्रबंध। पहली बार में ही उन्हें भारी झटका लग गया।
- बसंत गहतोड़ी, चंपावत।
मिले हर तरह का बीमा : जीवानंद
एक हजार वर्ग मीटर में की गई फूलों की खेती बर्बाद हो गई। इससे चार लाख रुपये से अधिक का नुकसान हो गया। नुकसान से बचाने के लिए फूलों की खेती करने वालों के लिए वाजिब बीमा हो।
- जीवानंद जोशी, ढरोज।
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डीएचओ एनके आर्या का कहना है कि जिले में करीब छह हजार वर्ग मीटर में लिलियम की खेती होती है। छिटपुट कार्नेसन की भी छिटपुट खेती की जाती है लेकिन इस बार लॉकडाउन से इस खेती को भारी झटका लगा है। किसान बताते हैं कि एकमात्र गाजीपुर मंडी में ही फूलों की खरीद होती है, लेकिन लॉकडाउन की वजह से मंडी खुली नहीं। मजबूरन उन्हें फूलों को तोड़कर फेंकना पड़ा। डीएचओ आर्या बताते हैं कि नुकसान की जानकारी निदेशालय भेजी गई है। साथ ही किसानों की भरपाई की मांग को भी निदेशालय तक पहुंचाया गया है।
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फूलों को तुड़वाने में भी जेब से खर्च हुआ : राजीव
फूलों के बाजार की कभी कोई समस्या नहीं रही, लेकिन पहली बार लॉकडाउन ने सब कुछ ठप कर दिया। इस वजह से न केवल फूलों से आय नहीं हुई, बल्कि फूलों को तुड़वाने में भी जेब से देना पड़ा है।
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- राजीव कुमार, वालिक।
पहली बार खेती की और लगा तगड़ा झटका : बसंत
उम्मीद थी फूल की खेती से आमदनी होगी। फूल भी खूब अच्छे हुए, लेकिन उनकी मांग थी और नहीं बिक्री का कोई प्रबंध। पहली बार में ही उन्हें भारी झटका लग गया।
- बसंत गहतोड़ी, चंपावत।
मिले हर तरह का बीमा : जीवानंद
एक हजार वर्ग मीटर में की गई फूलों की खेती बर्बाद हो गई। इससे चार लाख रुपये से अधिक का नुकसान हो गया। नुकसान से बचाने के लिए फूलों की खेती करने वालों के लिए वाजिब बीमा हो।
- जीवानंद जोशी, ढरोज।