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एक खाद्य निरीक्षक के हवाले पांच तहसीलें, कार्यालय में बाबू तक नहीं
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Tue, 10 Oct 2017 11:01 PM IST
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हर साल दीपावली पर मिलावटखोरी का खतरा बना रहता है, इसके बावजूद मिलावटखोरी से निपटने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग के पास जरूरी संसाधन तक नहीं है। पूरा विभाग महज एक अधिकारी के हवाले हैं। फील्ड अधिकारी ही नहीं, कार्यालय में एक कर्मी भी नहीं है। काम चलाने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के एक बाबू से कभी-कभार मदद ली जाती है।
दीपावली पर मिठाई और इससे जुड़ी अन्य खाद्य सामग्री का उपयोग 60 प्रतिशत बढ़ जाता है। दुग्ध संघ अधिकारी एमएम पंत का कहना है कि दिवाली पर दूध और इससे बने उत्पादों की खपत में 60 प्रतिशत से ज्यादा इजाफा होता है। दूध, मावा, मिठाई, पनीर समेत कई खाने-पीने की वस्तुओं की मांग तो बढ़ती है पर आपूर्ति में अंतर नहीं आता। ऐसे में बढ़ी खपत की भरपाई के लिए मिलावट या गुणवत्ता में गड़बड़ी का खतरा बढ़ जाता है।
वहीं, सैंपलिंग लेने वाले खाद्य सुरक्षा विभाग की हालत खराब है। करीब तीन साल से जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी की कुर्सी खाली है। यहां की अतिरिक्त जिम्मेदारी पिथौरागढ़ के अधिकारी के पास है। जिले में सिर्फ मिठाई की ही 150 से ज्यादा दुकानें हैं, लेकिन इन सामग्रियों के परीक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। पांच तहसीलों में से मात्र एक ही अभिहीत अधिकारी (खाद्य निरीक्षक) है।
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टनकपुर-बनबसा मैदानी क्षेत्र जिला मुख्यालय में से 90 किलोमीटर दूर होने के अलावा संवेदनशील भी है। वहीं पाटी, बाराकोट और लोहाघाट में भी कोई निरीक्षक नहीं है। छापामारी के लिए वाहन तक नहीं है। अन्य संसाधन भी अधूरे हैं। इन हालातों में सैंपलिंग करने को खुद विभाग भी चुनौती मान रहा है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी योगिता तिवारी का कहना है कि पर्वों में मिलावट से निपटने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
पांच वर्षों में 145 नमूने लिए, 13 फेल
मंगलवार से खाद्य विभाग ने नमूनों का परीक्षण शुरू कर दिया है। विभाग ने डेयरी के दूध के टैंकर से सैंपल लिए। वैसे चंपावत जिले में पांच वर्षों में 145 नमूने लिए गए। इसमें खोया, पनीर, मिठाई, तेल, वनस्पति, दूध एवं दूध से निर्मित उत्पादों के नमूने मुख्य रूप से लिए गए।
अभिहीत अधिकारी (खाद्य निरीक्षक) योगिता तिवारी ने बताया कि इनमें से 13 नमूने फेल हुए। इन 13 नमूनों में से 6 में निर्णय हो चुका है। जिनसे 3.74 लाख रुपये का जुर्माना लगा। अलबत्ता 7 फेल नमूनों पर निर्णय आना बाकी है।
दिवाली पर मिलावटखोरी पर लगाम कसने को खाद्य सुरक्षा विभाग को सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। पुलिस और राजस्व विभाग भी इस काम में सहयोग करेगा। -डा.अहमद इकबाल,जिलाधिकारी, चंपावत।
नकली दूध, पनीर, मावा, मिठाई या अन्य खाद्य सामग्री इंसान के शरीर के लिए नुकसानदायक है। मिलावटी सामग्री गुर्दे, लीवर और आंत पर सबसे ज्यादा असर डालती है। -डा.आरके जोशी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल, चंपावत।
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दीपावली पर मिठाई और इससे जुड़ी अन्य खाद्य सामग्री का उपयोग 60 प्रतिशत बढ़ जाता है। दुग्ध संघ अधिकारी एमएम पंत का कहना है कि दिवाली पर दूध और इससे बने उत्पादों की खपत में 60 प्रतिशत से ज्यादा इजाफा होता है। दूध, मावा, मिठाई, पनीर समेत कई खाने-पीने की वस्तुओं की मांग तो बढ़ती है पर आपूर्ति में अंतर नहीं आता। ऐसे में बढ़ी खपत की भरपाई के लिए मिलावट या गुणवत्ता में गड़बड़ी का खतरा बढ़ जाता है।
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वहीं, सैंपलिंग लेने वाले खाद्य सुरक्षा विभाग की हालत खराब है। करीब तीन साल से जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी की कुर्सी खाली है। यहां की अतिरिक्त जिम्मेदारी पिथौरागढ़ के अधिकारी के पास है। जिले में सिर्फ मिठाई की ही 150 से ज्यादा दुकानें हैं, लेकिन इन सामग्रियों के परीक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। पांच तहसीलों में से मात्र एक ही अभिहीत अधिकारी (खाद्य निरीक्षक) है।
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टनकपुर-बनबसा मैदानी क्षेत्र जिला मुख्यालय में से 90 किलोमीटर दूर होने के अलावा संवेदनशील भी है। वहीं पाटी, बाराकोट और लोहाघाट में भी कोई निरीक्षक नहीं है। छापामारी के लिए वाहन तक नहीं है। अन्य संसाधन भी अधूरे हैं। इन हालातों में सैंपलिंग करने को खुद विभाग भी चुनौती मान रहा है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी योगिता तिवारी का कहना है कि पर्वों में मिलावट से निपटने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
पांच वर्षों में 145 नमूने लिए, 13 फेल
मंगलवार से खाद्य विभाग ने नमूनों का परीक्षण शुरू कर दिया है। विभाग ने डेयरी के दूध के टैंकर से सैंपल लिए। वैसे चंपावत जिले में पांच वर्षों में 145 नमूने लिए गए। इसमें खोया, पनीर, मिठाई, तेल, वनस्पति, दूध एवं दूध से निर्मित उत्पादों के नमूने मुख्य रूप से लिए गए।
अभिहीत अधिकारी (खाद्य निरीक्षक) योगिता तिवारी ने बताया कि इनमें से 13 नमूने फेल हुए। इन 13 नमूनों में से 6 में निर्णय हो चुका है। जिनसे 3.74 लाख रुपये का जुर्माना लगा। अलबत्ता 7 फेल नमूनों पर निर्णय आना बाकी है।
दिवाली पर मिलावटखोरी पर लगाम कसने को खाद्य सुरक्षा विभाग को सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। पुलिस और राजस्व विभाग भी इस काम में सहयोग करेगा। -डा.अहमद इकबाल,जिलाधिकारी, चंपावत।
नकली दूध, पनीर, मावा, मिठाई या अन्य खाद्य सामग्री इंसान के शरीर के लिए नुकसानदायक है। मिलावटी सामग्री गुर्दे, लीवर और आंत पर सबसे ज्यादा असर डालती है। -डा.आरके जोशी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल, चंपावत।