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तुलसी की मेहनत से महकने लगी तुलसी और अन्य औषधीय प्रजातियां
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चंपावत के बालातड़ी में प्रगतिशील काश्तकार की ओर से उगाई गई औषधीय प्रजाति की खेती।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। कोरोना काल में लौटे प्रवासी रोजगार पाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में हाथ आजमा रहे हैं। ऐसे ही प्रवासियों में शामिल हैं जिले के पाटी विकासखंड के बालातड़ी गांव निवासी तुलसी प्रसाद भट्ट, जिन्होंने अपने नाम के अनुरूप ही तुलसी सहित अन्य औषधीय प्रजाति की खेती में हाथ आजमाया। उनकी मेहनत से बालातड़ी गांव की बंजर जमीन में औषधीय प्रजाति की खेती लहलहाने लगी है।
तुलसी प्रसाद इस वर्ष मार्च में लागू लॉकडाउन के बाद दिल्ली से बेरोजगार होकर घर आ गए थे। काफी विचार विमर्श के बाद उन्होंने घर में बंजर पड़ी पुस्तैनी जमीन को ही अपनी आजीविका का जरिया बनाने के लिए परंपरागत खेती के बजाय हर्बल खेती में हाथ आजमाने का निर्णय लिया। पिछले आठ माह में उनकी ओर से की गई मेहनत के कारण गांव की बंजर जमीन में विभिन्न प्रकार की औषधीय प्रजातियां उगने लगी हैं। तुलसी प्रसाद की ओर से औषधीय प्रजातियों के साथ ही मौसमी सब्जियों का उत्पादन भी किया जा रहा है। वह आठ महीने में 40 हजार से 45 हजार रुपये की सब्जियां बेच चुके हैं। वह डेढ़ एकड़ क्षेत्रफल में हर्बल खेती कर रहे हैं। तुलसी का इरादा हर्बल खेती के क्षेत्रफल को बढ़ा कर पांच एकड़ करना है। उन्होंने बताया कि जो अन्य किसान उनके साथ हर्बल खेती कर रहे हैं, वह उनके साथ मार्केटिंग में भी सहयोग कर रहे हैं।
कोरोना काल में बढ़ गई है औषधीय प्रजातियों की मांग
चंपावत। कोरोना महामारी के संक्रमण से बचाव को लेकर तुलसी और अश्वगंधा सहित शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली अन्य औषधीय प्रजातियों की मांग भी बढ़ने लगी है। प्रवासी तुलसी प्रसाद तुलसी, अश्वगंधा, मोरिंगा सहजन, शतावरी, नेपाली शतावरी, भूमि आंवला, आंवला, जामुन, तेजपत्ता, कलौंजी, कालमेघ, लेमनग्रास, कैमोमाई, सर्पगंधा, सूरजमुखी, हरड़, गुड़मार सहित 20 से अधिक प्रजाति के औषधीय प्रजाति के पौधों की खेती कर रहे हैं।
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भेषज संघ की ओर से दी जाएगी तकनीकी सहायता
चंपावत। जिले में भेषज संघ की ओर से औषधीय प्रजाति के पौधों की खेती के लिए किसानों को प्रेरित किया जाता रहा है। भेषज संघ के अध्यक्ष अशोक सिंह चौधरी और जिला भेषज समन्वयक कमलेंद्र सिंह यादव भेषज संघ की ओर से तुलसी प्रसाद सहित अन्य प्रगतिशील किसानों को हरसंभव तकनीकी मदद दिलाई जाएगी।
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तुलसी प्रसाद इस वर्ष मार्च में लागू लॉकडाउन के बाद दिल्ली से बेरोजगार होकर घर आ गए थे। काफी विचार विमर्श के बाद उन्होंने घर में बंजर पड़ी पुस्तैनी जमीन को ही अपनी आजीविका का जरिया बनाने के लिए परंपरागत खेती के बजाय हर्बल खेती में हाथ आजमाने का निर्णय लिया। पिछले आठ माह में उनकी ओर से की गई मेहनत के कारण गांव की बंजर जमीन में विभिन्न प्रकार की औषधीय प्रजातियां उगने लगी हैं। तुलसी प्रसाद की ओर से औषधीय प्रजातियों के साथ ही मौसमी सब्जियों का उत्पादन भी किया जा रहा है। वह आठ महीने में 40 हजार से 45 हजार रुपये की सब्जियां बेच चुके हैं। वह डेढ़ एकड़ क्षेत्रफल में हर्बल खेती कर रहे हैं। तुलसी का इरादा हर्बल खेती के क्षेत्रफल को बढ़ा कर पांच एकड़ करना है। उन्होंने बताया कि जो अन्य किसान उनके साथ हर्बल खेती कर रहे हैं, वह उनके साथ मार्केटिंग में भी सहयोग कर रहे हैं।
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कोरोना काल में बढ़ गई है औषधीय प्रजातियों की मांग
चंपावत। कोरोना महामारी के संक्रमण से बचाव को लेकर तुलसी और अश्वगंधा सहित शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली अन्य औषधीय प्रजातियों की मांग भी बढ़ने लगी है। प्रवासी तुलसी प्रसाद तुलसी, अश्वगंधा, मोरिंगा सहजन, शतावरी, नेपाली शतावरी, भूमि आंवला, आंवला, जामुन, तेजपत्ता, कलौंजी, कालमेघ, लेमनग्रास, कैमोमाई, सर्पगंधा, सूरजमुखी, हरड़, गुड़मार सहित 20 से अधिक प्रजाति के औषधीय प्रजाति के पौधों की खेती कर रहे हैं।
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भेषज संघ की ओर से दी जाएगी तकनीकी सहायता
चंपावत। जिले में भेषज संघ की ओर से औषधीय प्रजाति के पौधों की खेती के लिए किसानों को प्रेरित किया जाता रहा है। भेषज संघ के अध्यक्ष अशोक सिंह चौधरी और जिला भेषज समन्वयक कमलेंद्र सिंह यादव भेषज संघ की ओर से तुलसी प्रसाद सहित अन्य प्रगतिशील किसानों को हरसंभव तकनीकी मदद दिलाई जाएगी।