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चंपावत में लगा दी सिप्टी की पीओएस मशीन

Sun, 05 Nov 2017 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। Updated Sun, 05 Nov 2017 12:47 AM IST
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Farmer disturbed with POS machine
पीओएस मशीन से किसान परेशान - फोटो : अमर उजाला

चंपावत। सभी किसानों को पहली नवंबर से प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन से भुगतान के बाद खाद मिल रही है। इससे कालाबाजारी रुकने की उम्मीद थी लेकिन जिले में कई ऐसे इलाके हैं, जहां पॉश मशीन के काम न करने से किसानों को असुविधा भी होने लगी है।

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हाल यह है कि सिप्टी की पीओएस मशीन को सिप्टी के बजाय 15 किमी दूर चंपावत की साधन सहकारी समिति में लगाया गया है। इसके चलते किसानों को अपने गांव से 15 किमी से 25 किमी दूर आकर खाद लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसमें टैक्सी के किराए में आवाजाही में ही 60 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
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प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटीएल) योजना के तहत लगी पीओएस मशीन से ही अब किसानों को उर्वरक मिल सकेंगे। इसके लिए जिले की 23 साधन सहकारी समितियों में से 21 में पीओएस मशीन लगाई गई है। इसका लाभ जिले के इन समितियों से संबद्ध 28508 किसानों को मिलेगा।
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तामली, हरतोला समिति में अभी यह मशीनें नहीं लगाई गई है। खाद की अधिक खपत होने की वजह से बनबसा में भी इस मशीन को लगाया गया है। मगर कई जगह मोबाइल नेटवर्क न होने से पॉश मशीन कतई काम नहीं कर रही है।

सिप्टी सहकारी समिति की मशीन को चंपावत में लाकर काम किया जा रहा है। 600 सदस्यों वाली सिप्टी समिति के सचिव मथुरा दत्त जोशी का कहना है कि मोबाइल नेटवर्क न होने से सिप्टी में मशीन काम नहीं कर रही है। इसके चलते इसे चंपावत समिति में लाया गया है।

किसानों को यहीं से खाद बांटी जा रही है। यही नौबत तल्लादेश के सिमियां, मंच में भी है। इसके चलते यहां अभी खाद वितरण का काम भी शुरू नहीं हुआ है। सिप्टी समिति से संबद्ध किसान गोविंद बल्लभ खाद लेने के लिए गांव छोड़ 21 किमी दूर चंपावत आए। 50 किलो खाद के लिए 80 रुपये किराए के रूप में में देने के अलावा उनके चार घंटे भी बर्बाद हुए।

ऐसे काम करती है पॉश मशीन
पॉश मशीन को लगाने के पीछे मुख्य वजह कालाबाजारी को रोकना है। इस मशीन के उपयोग से खाद की खुदरा बिक्री का रिकार्ड खाद निगरानी तंत्र (एफएमएस) में रखा जा सकेगा। किसान को पीओएस मशीन में सबसे पहले आधार नंबर फीड करना होगा। इसके बाद खाद की मात्रा बताने क बाद फिर अंगूठा लगेगा।


जिले की 23 सहकारिता समिति में से 21 में पॉश मशीन लगाई जा चुकी है। शेष दो समितियों में भी शीघ्र ये मशीन लग जाएगी। सिप्टी, सिमियां, मंच समितियों में मोबाइल नेटवर्क ठीक न होने से मशीन काम नहीं कर रही है। इसके लिए वैकल्पिक उपाय किए जाएंगे।
- पान सिंह राणा
जिला सहायक निबंधक
सहकारी समितियां, चंपावत।

जिले में उर्वरक वितरण की स्थिति
वर्ष वितरित खाद (मीट्रिक टन में)
2015 - 994.19
2016 - 892.20
2017 - 415.30

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