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17 साल पहले पूर्णागिरि से भी पकड़ी गई थी नकली करेंसी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2020 11:18 PM IST
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Fake currency was also caught 17 years ago from Purnagiri
टनकपुर (चंपावत)। चंपावत जिले में नकली करेंसी पकड़े जाने की यह पहली वारदात नहीं है। जिले में 17 साल पहले भी मां पूर्णागिरि मेले के दौरान ऐसा ही एक वाकया सामने आया था। तब भैरव मंदिर क्षेत्र से पकड़े गए एक गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के बहेड़ी से संचालित होता था।
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वह गिरोह भी असली नोटों को स्कैन कर नकली नोट बनाकर बाजार में खपाता था।
नकली नोटों का गिरोह नेपाल से लगे इस सीमावर्ती क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहा है। पुलिस समय-समय पर इस धंधे में लिप्त लोगों को दबोचकर गिरोह का भंडाफोड़ भी करती रही है। 2003 में उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि मेले के दौरान मेला क्षेत्र में तैनात तत्कालीन राजस्व उप निरीक्षक शिवदत्त जोशी ने दो युवकों को नकली नोट चलाने के आरोप में पकड़कर टनकपुर थाने में सौंपा था। तब आरोपियों से पूछताछ में नकली नोट बनाने वाले गिरोह के बारे में जानकारी मिलने पर तत्कालीन थानाध्यक्ष सीएस यादव के नेतृत्व में पुलिस ने बहेड़ी में छापा मारकर गिरोह के मास्टर माइंड को दबोचा था।
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आरोपी इतना शातिर था कि पुलिस की दबिश का पता होते ही उसने घर के अंदर नोट बनाने वाले कंप्यूटर उपकरण, स्केनर और अधूरे बने नकली नोटों को आग लगा दी थी। लेकिन पुलिस उसे जले उपकरणों के साथ पकड़कर टनकपुर लाई और मुकदमा दर्ज कर तीनों आरोपियों को जेल भेजा था। उनके कब्जे से भी लाखों रुपये के नकली नोट बरामद हुए थे।
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