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अतिवृष्टि : मलबे की चपेट में आया सेरी तोक
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 08 May 2016 10:12 PM IST
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मलबे की चपेट में आया सेरी तोक
- फोटो : अमर उजाला
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बाराकोट विकासखंड के बैड़ाओड़ ग्राम पंचायत के सेरी तोक में तेज बारिश और अतिवृष्टि से आए मलबे से जबर्दस्त नुकसान हुआ है। 19 लोगों के घरों में पानी घुस गया, जबकि 35 लोगों के खेत मलबे से पट गए। एक पिकअप मलबे में दब गई। मलबे से पेयजल लाइन भी से ध्वस्त हुई है। अलबत्ता किसी प्रकार की जन क्षति नहीं हुई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीम ने मौके पर पहुंच गई है।
रविवार सुबह करीब 6.30 बजे भारी वर्षा होने से झिझाड़ गधेरे से पानी और मलबा एकाएक लोगों के घरों और खेतों में घुस गया। मलबा इतनी तेजी से आया, कि लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। मलबे में संजय कुमार की पिकअप दब गई। आपदा की चपेट में बद्री राम पुत्र मनी राम की रसोई भी आई। जिसमें राशन और बर्तन बह गए। मलबे से गांव के लिए बनाई गई पेयजल योजना भी जगह-जगह ध्वस्त हो गई है। प्रधान बलदेव प्रसाद ने शीघ्र पेयजल योजना को ठीक कर आपूर्ति सुचारु कराने की मांग की है। आपदा प्रबंधन की टीम ने राहत कार्य शुरू कर दिया। घटना की सूचना मिलने पर पाटी की उप जिलाधिकारी निर्मला बिष्ट, कलक्ट्रेट की प्रभारी अधिकारी सीमा विश्वकर्मा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय, तहसीलदार बीएस माहरा, राजस्व निरीक्षक सुरेश लाल वर्मा, पटवारी दयाकृष्ण भटट, थानाध्यक्ष मनोज रतूड़ी, खंड विकास अधिकारी पूरन सिंह रावत आदि अधिकारी दलबल के साथ गांव में पहुंचे। डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि प्रभावित लोगों को हुई क्षति का आकलन किया जा रहा है। शीघ्र ही आपदा के मानकों के अनुसार राहत दी जाएगी। अतिवृष्टि में लोगों के खेतों को काफी नुकसान पहुंचा है।
इन ग्रामीणों की जमीन मलबे से पटी
बद्री राम, कमला देवी, कुंवर राम, नारायण राम, ओमेंद्र प्रसाद, नवीन राम, शेखर राम, महेश राम, श्याम लाल, शंकर राम, गोपी देवी, पार्वती देवी, शेखर राम पुत्र जम राम, मदन लाल, परी राम, जगदीश राम, जगदीश पुत्र नंद राम, सुंदर राम, मनोज कुमार, रमी राम, नरेश राम, बची राम, बाली राम, गिरीश राम, जोगेंद्र प्रसाद, धनेश्वर प्रसाद, प्रकाश राम, गणेश राम, सुंदर राम, शंकर राम पुत्र किशन राम, जगदीश राम, हयात राम, गुमानी राम, जोगेंद्र प्रसाद, किसनी देवी।
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इन ग्रामीणों के घरों में घुसा पानी
बद्री राम, पार्वती देवी, जोगेंद्र प्रसाद पुत्र रामी राम, दयाल राम, केशव राम, कप्पी देवी, जगजीवन राम, दिगरी देवी, शंकर राम, प्रेम राम, परी राम, कमला देवी, नवीन राम, श्याम लाल, जगदीश राम, राकेश कुमार, जोगेंद्र प्रसाद पुत्र माधो राम, पुष्कर राम, भवानी देवी।
पहले भी आ चुकी है सेरी में प्राकृतिक आपदा
60 परिवारों वाले इस गांव में प्राकृतिक आपदा की यह पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व यहां बादल फटने की वारदात हो चुकी है। 2009 में बादल फटने से काफी तबाही मची थी। तब यहां के लोग हर समय डर के साये में जीवनयापन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे जिला प्रशासन से अन्यत्र विस्थापन की मांग करते रहे, लेकिन इस ओर अब तक कुछ नहीं हुआ। जिला प्रशासन का कहना है कि यहां सर्वे करा विस्थापन को जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
मुआवजे में भी ठगे गए ग्रामीण
प्रधान बलदेव प्रसाद का कहना था कि 2009 में बादल फटने से गांव में हुई तबाही में लोगों को काफी नुकसान हुआ था। लोगों के खेत मलबे से पट गए थे। कई मवेशी मारे गए थे। यहां का पंचायत घर भी ध्वस्त हो गया था। लेकिन प्रशासन ने मुआवजे के रूप में 200 से 300 रुपये देकर उनके जख्मों में नमक छिड़कने का काम किया।
रोड का मलबा भी बना मुसीबत का कारण
ग्रामीणों का कहना था कि इंद्रपुरी-तड़ीगांव सड़क के निर्माण का मलबा उनके मकानों के ऊपर डाला गया था। सड़क में नालियों, स्कबर, सुरक्षा दीवार नहीं बनाए जाने से हर समय खतरा बना रहता है। ग्रामीणों द्वारा सड़क निर्माण के समय मलबा डाले जाने से गांव को खतरा पैदा होने की सूचना दी गई थी। उसके बावजूद भी सड़क का निर्माण कार्य कर सारा मलबा उनके मकानों के उपर डाला गया था। जो लगातार ऊपर से गिरता रहता है।
रोड बंद होने से हुई दिक्कतें
सेरी में हुई आपदा की जानकारी मिलने के बाद घटना स्थल में पहुंचने के लिए अधिकारियों और बचाव दल को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इंद्रपुरी-गल्लागांव सड़क पर जगह- जगह मलबा आने से वाहनों के निकलने में भारी दिक्कतें हुईं। हालांकि लोनिवि ने सुबह से ही सड़क को खोलने के लिए जेसीबी लगा दी थी। मलबा पटने से अधिकारियों को काफी देर तक सड़क खुलने का इंतजार करना पड़ा। सड़क खुलने में देरी होने का अंदेशा होने पर डिप्टी कलेक्टर सहित सारे अधिकारी पैदल ही घटना स्थल की ओर रवाना हुए। दुर्गम रास्तों को पार करने में अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
मलबे से बंद रहें कई रूट
रविवार को हुई बारिश से बाराकोट-पिथौरागढ लिंक मार्ग, लिंक रोड-खोला सुनार मार्ग में मलबा आने से यातायात ठप हो गया है। दोनों ओर वाहनों की लंबी लाई लग गई। वहीं नौमाना, तड़ीगांव, ईजड़ा, रैघांव, बैड़ा आदि स्थानों में बारिश से काफी नुकसान पहुंचा है। नौमाना गांव में मलबा आने से खेत-खलिहानों के अलावा यहां का नौला मलबे से पट गया। प्रधान संजय जोशी, मोहन जोशी, बालादत्त, प्रकाश जोशी, गिरीश जोशी आदि का कहना है कि गल्लागांव-देवलीमांफी सड़क में नालियां, स्कबर बनाकर पानी के रुख का डायवर्ट करने की मांग की जाती रही है। विभागीय उदासीनता के चलते बारिश होते ही गांव में पानी के साथ मलबा आने लगता है, वहीं डोबाभागू में कमलापति तिवारी, खीमानंद, शिवदत्त के घरों में पानी घुस गया। पेयजल टैंक मलबे से पट गया।
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रविवार सुबह करीब 6.30 बजे भारी वर्षा होने से झिझाड़ गधेरे से पानी और मलबा एकाएक लोगों के घरों और खेतों में घुस गया। मलबा इतनी तेजी से आया, कि लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। मलबे में संजय कुमार की पिकअप दब गई। आपदा की चपेट में बद्री राम पुत्र मनी राम की रसोई भी आई। जिसमें राशन और बर्तन बह गए। मलबे से गांव के लिए बनाई गई पेयजल योजना भी जगह-जगह ध्वस्त हो गई है। प्रधान बलदेव प्रसाद ने शीघ्र पेयजल योजना को ठीक कर आपूर्ति सुचारु कराने की मांग की है। आपदा प्रबंधन की टीम ने राहत कार्य शुरू कर दिया। घटना की सूचना मिलने पर पाटी की उप जिलाधिकारी निर्मला बिष्ट, कलक्ट्रेट की प्रभारी अधिकारी सीमा विश्वकर्मा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय, तहसीलदार बीएस माहरा, राजस्व निरीक्षक सुरेश लाल वर्मा, पटवारी दयाकृष्ण भटट, थानाध्यक्ष मनोज रतूड़ी, खंड विकास अधिकारी पूरन सिंह रावत आदि अधिकारी दलबल के साथ गांव में पहुंचे। डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि प्रभावित लोगों को हुई क्षति का आकलन किया जा रहा है। शीघ्र ही आपदा के मानकों के अनुसार राहत दी जाएगी। अतिवृष्टि में लोगों के खेतों को काफी नुकसान पहुंचा है।
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इन ग्रामीणों की जमीन मलबे से पटी
बद्री राम, कमला देवी, कुंवर राम, नारायण राम, ओमेंद्र प्रसाद, नवीन राम, शेखर राम, महेश राम, श्याम लाल, शंकर राम, गोपी देवी, पार्वती देवी, शेखर राम पुत्र जम राम, मदन लाल, परी राम, जगदीश राम, जगदीश पुत्र नंद राम, सुंदर राम, मनोज कुमार, रमी राम, नरेश राम, बची राम, बाली राम, गिरीश राम, जोगेंद्र प्रसाद, धनेश्वर प्रसाद, प्रकाश राम, गणेश राम, सुंदर राम, शंकर राम पुत्र किशन राम, जगदीश राम, हयात राम, गुमानी राम, जोगेंद्र प्रसाद, किसनी देवी।
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इन ग्रामीणों के घरों में घुसा पानी
बद्री राम, पार्वती देवी, जोगेंद्र प्रसाद पुत्र रामी राम, दयाल राम, केशव राम, कप्पी देवी, जगजीवन राम, दिगरी देवी, शंकर राम, प्रेम राम, परी राम, कमला देवी, नवीन राम, श्याम लाल, जगदीश राम, राकेश कुमार, जोगेंद्र प्रसाद पुत्र माधो राम, पुष्कर राम, भवानी देवी।
पहले भी आ चुकी है सेरी में प्राकृतिक आपदा
60 परिवारों वाले इस गांव में प्राकृतिक आपदा की यह पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व यहां बादल फटने की वारदात हो चुकी है। 2009 में बादल फटने से काफी तबाही मची थी। तब यहां के लोग हर समय डर के साये में जीवनयापन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे जिला प्रशासन से अन्यत्र विस्थापन की मांग करते रहे, लेकिन इस ओर अब तक कुछ नहीं हुआ। जिला प्रशासन का कहना है कि यहां सर्वे करा विस्थापन को जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
मुआवजे में भी ठगे गए ग्रामीण
प्रधान बलदेव प्रसाद का कहना था कि 2009 में बादल फटने से गांव में हुई तबाही में लोगों को काफी नुकसान हुआ था। लोगों के खेत मलबे से पट गए थे। कई मवेशी मारे गए थे। यहां का पंचायत घर भी ध्वस्त हो गया था। लेकिन प्रशासन ने मुआवजे के रूप में 200 से 300 रुपये देकर उनके जख्मों में नमक छिड़कने का काम किया।
रोड का मलबा भी बना मुसीबत का कारण
ग्रामीणों का कहना था कि इंद्रपुरी-तड़ीगांव सड़क के निर्माण का मलबा उनके मकानों के ऊपर डाला गया था। सड़क में नालियों, स्कबर, सुरक्षा दीवार नहीं बनाए जाने से हर समय खतरा बना रहता है। ग्रामीणों द्वारा सड़क निर्माण के समय मलबा डाले जाने से गांव को खतरा पैदा होने की सूचना दी गई थी। उसके बावजूद भी सड़क का निर्माण कार्य कर सारा मलबा उनके मकानों के उपर डाला गया था। जो लगातार ऊपर से गिरता रहता है।
रोड बंद होने से हुई दिक्कतें
सेरी में हुई आपदा की जानकारी मिलने के बाद घटना स्थल में पहुंचने के लिए अधिकारियों और बचाव दल को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इंद्रपुरी-गल्लागांव सड़क पर जगह- जगह मलबा आने से वाहनों के निकलने में भारी दिक्कतें हुईं। हालांकि लोनिवि ने सुबह से ही सड़क को खोलने के लिए जेसीबी लगा दी थी। मलबा पटने से अधिकारियों को काफी देर तक सड़क खुलने का इंतजार करना पड़ा। सड़क खुलने में देरी होने का अंदेशा होने पर डिप्टी कलेक्टर सहित सारे अधिकारी पैदल ही घटना स्थल की ओर रवाना हुए। दुर्गम रास्तों को पार करने में अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
मलबे से बंद रहें कई रूट
रविवार को हुई बारिश से बाराकोट-पिथौरागढ लिंक मार्ग, लिंक रोड-खोला सुनार मार्ग में मलबा आने से यातायात ठप हो गया है। दोनों ओर वाहनों की लंबी लाई लग गई। वहीं नौमाना, तड़ीगांव, ईजड़ा, रैघांव, बैड़ा आदि स्थानों में बारिश से काफी नुकसान पहुंचा है। नौमाना गांव में मलबा आने से खेत-खलिहानों के अलावा यहां का नौला मलबे से पट गया। प्रधान संजय जोशी, मोहन जोशी, बालादत्त, प्रकाश जोशी, गिरीश जोशी आदि का कहना है कि गल्लागांव-देवलीमांफी सड़क में नालियां, स्कबर बनाकर पानी के रुख का डायवर्ट करने की मांग की जाती रही है। विभागीय उदासीनता के चलते बारिश होते ही गांव में पानी के साथ मलबा आने लगता है, वहीं डोबाभागू में कमलापति तिवारी, खीमानंद, शिवदत्त के घरों में पानी घुस गया। पेयजल टैंक मलबे से पट गया।