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अतिक्रमण के खिलाफ चला डंडा:पूर्व चेयरमैन पर सरकारी भूमि पर निर्माण का आरोप, रूकाया काम
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प्रतीकात्मक
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सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने डंडा चलाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार रात को लोहाघाट के पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष की ओर से रामलीला मैदान के पास मकान पर लिंटर डालने के काम को पुलिस और राजस्व विभाग की टीम ने रुकवा दिया। प्रशासन का दावा है कि उक्त जमीन पर करीब 15 साल पहले सार्वजनिक शौचालय बनाया था।
एसडीएम आरसी गौतम का कहना है कि नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन भूपाल सिंह मेहता की ओर से रामलीला मैदान के पास सरकारी भूमि पर कब्जा कर मकान बनाकर रातों रात लिंटर डालने की सूचना मिली। प्रशासन और पुलिस टीम ने तहसीलदार अबरार अहमद के नेतृत्व में मौके पर जाकर काम रुकवाया। इस दौरान प्रशासन और पूर्व अध्यक्ष के बीच काफी गहमागहमी भी हुई।
एसडीएम का कहना है कि जिस भूमि पर मकान बनाया रहा था, वहां करीब डेढ़ दशक पूर्व नगर पंचायत ने सार्वजनिक शौचालय बनाया था। आरोप है कि इसे तोड़कर मकान बनाया जा रहा था। मेहता की ओर से उक्त भूमि को फ्री होल्ड करने के लिए पत्रावली तैयार कर उसका पैसा राजस्व विभाग में जमा करने की बात कही गई थी। बताय कि भूमि के दस्तावेज प्रस्तुत करने के आदेश देने के साथ काम पर रोक लगा दी गई है। उनका कहना है कि सरकारी भूमि पर किसी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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मैंने सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं किया है। जिस प्रकार नगर के अन्य लोगों की ओर से नजूल भूमि को फ्री होल्ड करने के लिए अपनी फाइलें जमा की गई हैं, उसी तरह मैंने भी उक्त भूमि को फ्री होल्ड करने के लिए अपनी पत्रावली जमा करने के साथ 2007 में 23500 रुपये जमा कराए थे जिसकी पूरी पत्रावली उप जिलाधिकारी को दे दी है। भूपाल सिंह मेहता, पूर्व अध्यक्ष, नगर पंचायत।
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एसडीएम आरसी गौतम का कहना है कि नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन भूपाल सिंह मेहता की ओर से रामलीला मैदान के पास सरकारी भूमि पर कब्जा कर मकान बनाकर रातों रात लिंटर डालने की सूचना मिली। प्रशासन और पुलिस टीम ने तहसीलदार अबरार अहमद के नेतृत्व में मौके पर जाकर काम रुकवाया। इस दौरान प्रशासन और पूर्व अध्यक्ष के बीच काफी गहमागहमी भी हुई।
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एसडीएम का कहना है कि जिस भूमि पर मकान बनाया रहा था, वहां करीब डेढ़ दशक पूर्व नगर पंचायत ने सार्वजनिक शौचालय बनाया था। आरोप है कि इसे तोड़कर मकान बनाया जा रहा था। मेहता की ओर से उक्त भूमि को फ्री होल्ड करने के लिए पत्रावली तैयार कर उसका पैसा राजस्व विभाग में जमा करने की बात कही गई थी। बताय कि भूमि के दस्तावेज प्रस्तुत करने के आदेश देने के साथ काम पर रोक लगा दी गई है। उनका कहना है कि सरकारी भूमि पर किसी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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मैंने सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं किया है। जिस प्रकार नगर के अन्य लोगों की ओर से नजूल भूमि को फ्री होल्ड करने के लिए अपनी फाइलें जमा की गई हैं, उसी तरह मैंने भी उक्त भूमि को फ्री होल्ड करने के लिए अपनी पत्रावली जमा करने के साथ 2007 में 23500 रुपये जमा कराए थे जिसकी पूरी पत्रावली उप जिलाधिकारी को दे दी है। भूपाल सिंह मेहता, पूर्व अध्यक्ष, नगर पंचायत।