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सुंगरखाल ग्राम पंचायत का नहीं होगा कोई प्रधान

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 16 Sep 2019 10:45 PM IST
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Elections in District
प्रतीकात्मक
त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी ग्राम पंचायत में ग्राम प्रधान की कुर्सी रिक्त रहेगी। 297 महिलाओं सहित कुल 614 मतदाताओं वाले सुुंगरखाल में ये नौबत पात्र प्रत्याशी के न होने से आई है। इसके चलते सात ग्राम पंचायत सदस्य सीट वाली इस पंचायत के गठन का संकट भी आएगा।
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बाराकोट विकासखंड के सुंगरखाल ग्राम पंचायत की ग्राम प्रधान सीट को अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित किया गया है। यहां एससी का एक ही परिवार है और उसकी कुल आबादी भी 5 है लेकिन इस परिवार का एक भी व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम पात्रता पूरी नहीं करता है। पूर्व ग्राम प्रधान प्रकाश राय बताते हैं कि परिवार की महिला मुखिया की दो से अधिक संतान हैं।
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वहीं महिला मुखिया की कोई भी संतान चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष की शर्त को पूरी नहीं करती है। ग्राम विकास अधिकारी एलएम पांडेय का कहना है कि सुंगरखाल और लुवाकोट गांव को मिलाकर बनी सुंगरखाल ग्राम पंचायत की 2011 की जनगणना के मुताबिक आबादी कुल 695 है। इसमें अनुसूचित वर्ग का सिर्फ एक परिवार है जिसकी आबादी छह थी। इकलौते एससी परिवार के मुखिया की कुछ समय पहले मौत होने से इस जाति के कुल 5 ही लोग बचे हैं।
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जिला पंचायती राज अधिकारी सुरेश बेनी का कहना है कि अनुसूचित जाति की कम आबादी के बावजूद सुंगरखाल में ग्राम प्रधान की सीट के एससी आरक्षित होने का कारण चक्रीय आधार पर आरक्षण की प्रणाली है। इस प्रणाली के मुताबिक ग्राम पंचायत में संबंधित जाति के दो से अधिक लोग होने पर आरक्षण दिया जा सकता है।
पात्रता या किसी अन्य वजह से सुंगरखाल अथवा किसी अन्य ग्राम पंचायत में ग्राम प्रधान का पद रिक्त रहने की सूरत में राज्य निर्वाचन आयोग से मार्गदर्शन मांगा जाएगा। निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इससे संबंधित रिपोर्ट आयोग को भेज निर्देश लिए जाएंगे। आयोग से प्राप्त निर्देशों के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। सुरेंद्र नारायण पांडेय, जिलाधिकारी, चंपावत
नदेड़ा ग्राम पंचायत में भी बना है खतरा
चंपावत। सुंगरखाल जैसे हाल बाराकोट विकासखंड की नदेड़ा ग्राम पांचायत के भी हो सकते हैं। पठलती भनार, नदेड़ा, भनार और बगौला गांव वाली नदेड़ा ग्राम पंचायत की ग्राम प्रधान की कुर्सी भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है लेकिन 626 की आबादी वाली इस ग्राम पंचायत में एससी के सिर्फ पांच परिवारों के 30 लोग हैं।

ग्राम विकास अधिकारी अनिरुद्ध पुनेठा का कहना है कि ये सभी परिवार उत्तर प्रदेश या इस सूबे के दूसरे जिलों के हैं। परिवार के मुखिया नौकरी में हैं। ऐसे में 649 मतदाताओं वाली इस ग्राम पंचायत में भी चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी मिलना मुश्किल हो सकता है।
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