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Champawat News: शिक्षा का पैटर्न बदला लेकिन पढ़ाई के संसाधन नहीं, अटल उत्कृष्ट विद्यालय का है ऐसा हाल
Sun, 14 May 2023 01:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टनकपुर (चंपावत)।
संवाद न्यूज एजेंसी, टनकपुर (चंपावत)।
Updated Sun, 14 May 2023 01:46 PM IST
सार
प्रदेश के अन्य विद्यालयाें के साथ ही नगर के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज को भी अटल उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा मिला। छात्राओं ने सीबीएसई हाईस्कूल और इंटर बोर्ड की पहली परीक्षा दी थी जिसके नतीजे अच्छे नहीं आए हैं।
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- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
नगर के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज को अटल उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा मिलने से बोर्ड बदल कर सीबीएसई तो कर दिया गया लेकिन उसके अनुरूप पढ़ाई के संसाधन विकसित नहीं किए हैं जिसका असर दो दिन पहले आए हाईस्कूल और इंटर बोर्ड परीक्षा के नतीजों में नजर आया है।
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वर्ष 2020 में प्रदेश के चुनिंदा विद्यालयों को अटल उत्कृष्ट विद्यालय बनाया गया। इन विद्यालयों में शिक्षा का पैटर्न बदलकर उत्तराखंड बोर्ड से सीबीएसई किया गया। प्रदेश के अन्य विद्यालयाें के साथ ही नगर के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज को भी अटल उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा मिला। छात्राओं ने सीबीएसई हाईस्कूल और इंटर बोर्ड की पहली परीक्षा दी थी जिसके नतीजे अच्छे नहीं आए हैं।
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198 में से 190 छात्राओं ने इंटर की परीक्षा दी थी जिनमें 71 छात्राएं पास हुई है। 53 छात्राएं अनुत्तीर्ण हुई और 66 छात्राओं को पूरक परीक्षा मिली है। इंटर के सापेक्ष हाईस्कूल के नतीजे फिर भी अच्छे रहे। 168 में से 164 छात्राओं ने परीक्षा दी थी। 105 छात्राएं उत्तीर्ण और 2 छात्राएं अनुत्तीर्ण हुई है। 57 छात्राओं की पूरक आई है। विद्यालय में छात्राओं की संख्या 889 है। 6 से 12वीं तक 14 कक्षा वर्ग हैं। हर वर्ग की छात्र संख्या सौ से अधिक है जबकि सीबीएसई के मानक अनुसार छात्र संख्या 40 होनी चाहिए।
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छात्राएं दरी पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर
शिक्षक भी प्रधानाचार्य समेत 23 है जो कम है। हिंदी, अर्थशास्त्र और गृह विज्ञान के प्रवक्ता नहीं है। वहीं संस्कृत और सामान्य विज्ञान के एलटी संवर्ग के सहायक अध्यापक के पद भी रिक्त हैं। फर्नीचर के अभाव में हाईस्कूल और इंटर की छात्राएं दरी पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर है।
ये भी पढ़ें...CBSE Result 2023: अटल उत्कृष्ट स्कूलों में शिक्षकों को दीं सुविधाएं फिर भी नतीजा रहा खराब, ये भी रहीं खामियां
परीक्षाफल अच्छा नहीं आने की प्रमुख वजह शिक्षा का पैटर्न बदलना तो है ही शिक्षकों की कमी और बच्चों के सामने अचानक सीबीएसई पैटर्न आना भी मुख्य वजह रही है। अब तक उत्तराखंड बोर्ड की पढ़ाई करने वाले बच्चे सीबीएसई पैटर्न को ठीक से कवर नहीं कर पाए। -गीता चंद, प्रधानाचार्य, जीजीआईसी टनकपुर।
शिक्षक भी प्रधानाचार्य समेत 23 है जो कम है। हिंदी, अर्थशास्त्र और गृह विज्ञान के प्रवक्ता नहीं है। वहीं संस्कृत और सामान्य विज्ञान के एलटी संवर्ग के सहायक अध्यापक के पद भी रिक्त हैं। फर्नीचर के अभाव में हाईस्कूल और इंटर की छात्राएं दरी पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर है।
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परीक्षाफल अच्छा नहीं आने की प्रमुख वजह शिक्षा का पैटर्न बदलना तो है ही शिक्षकों की कमी और बच्चों के सामने अचानक सीबीएसई पैटर्न आना भी मुख्य वजह रही है। अब तक उत्तराखंड बोर्ड की पढ़ाई करने वाले बच्चे सीबीएसई पैटर्न को ठीक से कवर नहीं कर पाए। -गीता चंद, प्रधानाचार्य, जीजीआईसी टनकपुर।