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अमर उजाला अभियान:बाराकोट औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान
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बाराकोट में किराये के भवन में चल रहा आईटीआई।
- फोटो : CHAMPAWAT
नौजवानों को हुनरमंद बनाकर रोजगार देने के मकसद से स्वीकृत बाराकोट के आईटीआई की राह बेहद कठिन है। मौजूदा जरूरत के हिसाब से ट्रेड न होने और जरूरी संसाधनों की कमी से इसका अस्तित्व ही खतरे में है।
अनुदेशक न होने से सिलाई कटिंग का ट्रेड पहले ही बंद हो चुका है। बस किराये के चंद कमरों में दो ट्रेड के आसरे यह तकनीकी संस्थान चल रहा है। कार्यशाला का भी पुख्ता इंतजाम नहीं है। नतीजा यह कि यहां छात्रों की संख्या दो वर्ष में 18 से घटकर 11 हो गई है।
बाराकोट आईटीआई में तीन ट्रेडों में से इस वक्त इलेक्ट्रीशियन और कंप्यूटर ऑफ प्रोग्रामिंग एप्लीकेशन (कोपा) ट्रेड ही चल रहा है। इलेक्ट्रीशियन में 8 और कोपा में सिर्फ 3 छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। इन दो ट्रेडों को पढ़ाने का जिम्मा महज दो अनुदेशकों के कंधों पर है। वैसे इस वक्त दो अनुदेशकों सहित कुल आठ कर्मी तैनात हैं। संस्थान के किराये में संचालित होने से कार्यशाला भी काम चलाने लायक नहीं है।
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कार्यशाला की कमी के अलावा थ्री-फेज बिजली का कनेक्शन नहीं होने से भी परेशानी हो रही है। छात्र भी व्यवस्था को सुधारने को लेकर कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन हालात जस के तस हैं। छात्रों की मांग है कि न केवल मौजूदा ट्रेड में सभी अनुमन्य सुविधाएं दी जाएं बल्कि रोजगारपरक ट्रेडों को भी बढ़ाया जाए।
सीएम ने किया था आदर्श आईटीआई का एलान
लोहाघाट (चंपावत)। सुविधाओं की कमी वाले बाराकोट आईटीआई को आदर्श आईटीआई का दर्जा देने का दो साल पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एलान किया था। सीएम के एलान के बाद संस्थान ने यहां फीटर, मोटर मैकेनिक, मशीनिस्ट और कटिंग टेलरिंग के ट्रेडों के साथ अन्य जरूरी सुविधाओं का प्रस्ताव नोडल आईटीआई टनकपुर भेजा है।
आईटीआई के लिए की 20 नाली जमीन दान
लोहाघाट (चंपावत)। बाराकोट के लोग आईटीआई के भवन के लिए चामड़किनी तोक में वर्षों पूर्व 20 नाली जमीन दान कर चुके हैं। इस जमीन को आईटीआई के नाम पर पंजीकृत भी किया जा चुका है लेकिन बजट नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो सका है।
स्टाफ, संसाधन और जगह की कमी से आईटीआई का काम प्रभावित हो रहा है। बावजूद इसके छात्रों को अधिक से अधिक हुनरमंद बनाने का प्रयास किया जा रहा है। किराये के भवन में कम जगह से विस्तार पर असर पड़ा है। भवन निर्माण के लिए बजट की मांग की गई है।
आरके जोशी, प्रभारी, आईटीआई, बाराकोट।
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अनुदेशक न होने से सिलाई कटिंग का ट्रेड पहले ही बंद हो चुका है। बस किराये के चंद कमरों में दो ट्रेड के आसरे यह तकनीकी संस्थान चल रहा है। कार्यशाला का भी पुख्ता इंतजाम नहीं है। नतीजा यह कि यहां छात्रों की संख्या दो वर्ष में 18 से घटकर 11 हो गई है।
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बाराकोट आईटीआई में तीन ट्रेडों में से इस वक्त इलेक्ट्रीशियन और कंप्यूटर ऑफ प्रोग्रामिंग एप्लीकेशन (कोपा) ट्रेड ही चल रहा है। इलेक्ट्रीशियन में 8 और कोपा में सिर्फ 3 छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। इन दो ट्रेडों को पढ़ाने का जिम्मा महज दो अनुदेशकों के कंधों पर है। वैसे इस वक्त दो अनुदेशकों सहित कुल आठ कर्मी तैनात हैं। संस्थान के किराये में संचालित होने से कार्यशाला भी काम चलाने लायक नहीं है।
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कार्यशाला की कमी के अलावा थ्री-फेज बिजली का कनेक्शन नहीं होने से भी परेशानी हो रही है। छात्र भी व्यवस्था को सुधारने को लेकर कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन हालात जस के तस हैं। छात्रों की मांग है कि न केवल मौजूदा ट्रेड में सभी अनुमन्य सुविधाएं दी जाएं बल्कि रोजगारपरक ट्रेडों को भी बढ़ाया जाए।
सीएम ने किया था आदर्श आईटीआई का एलान
लोहाघाट (चंपावत)। सुविधाओं की कमी वाले बाराकोट आईटीआई को आदर्श आईटीआई का दर्जा देने का दो साल पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एलान किया था। सीएम के एलान के बाद संस्थान ने यहां फीटर, मोटर मैकेनिक, मशीनिस्ट और कटिंग टेलरिंग के ट्रेडों के साथ अन्य जरूरी सुविधाओं का प्रस्ताव नोडल आईटीआई टनकपुर भेजा है।
आईटीआई के लिए की 20 नाली जमीन दान
लोहाघाट (चंपावत)। बाराकोट के लोग आईटीआई के भवन के लिए चामड़किनी तोक में वर्षों पूर्व 20 नाली जमीन दान कर चुके हैं। इस जमीन को आईटीआई के नाम पर पंजीकृत भी किया जा चुका है लेकिन बजट नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो सका है।
स्टाफ, संसाधन और जगह की कमी से आईटीआई का काम प्रभावित हो रहा है। बावजूद इसके छात्रों को अधिक से अधिक हुनरमंद बनाने का प्रयास किया जा रहा है। किराये के भवन में कम जगह से विस्तार पर असर पड़ा है। भवन निर्माण के लिए बजट की मांग की गई है।
आरके जोशी, प्रभारी, आईटीआई, बाराकोट।