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पूर्णागिरि में गहरा सकता है पेयजल संकट!
ब्यूरो/अमर उजाला, टनकपुर (चंपावत)
Updated Tue, 21 Mar 2017 10:31 PM IST
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बौंडर गांव की शोपीस बनी पानी टंकी
- फोटो : amar ujala
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पूर्णागिरि मेले में तीर्थयात्रियों की आवाजाही का क्रम लगातार बना हुआ है। हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु देवी के दर्शन को पहुंच रहे हैं। नवरात्र में में तो श्रद्धालुओं की संख्या एक लाख तक पहुंच सकती है। ऐसे में धाम क्षेत्र में पानी का संकट पैदा होने के आसार नजर आ रहे हैं।
15 जून तक चलने वाले पूर्णागिरि मेले में शुरूआती दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में रही। मंदिर समिति अध्यक्ष पं. भुवन चंद्र पांडेय का कहना है कि नवरात्र के दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी। इसके लिए मंदिर समिति और मेला प्रशासन तैयारी में जुटा है। मुख्य मंदिर से भैरव मंदिर तक दर्जनों होटल और धर्मशालाएं हैं। सौ से अधिक दुकानें भी हैं। श्रद्धालु इन होटलों व धर्मशालाओं में रुक कर स्नान आदि करते हैं। ऐसे में मेले के दौरान नियमित जलापूर्ति की जरूरत होती है। जल संस्थान एक दर्जन से अधिक स्रोतों और एक मिनी नलकूप से आठ टैंकों के माध्यम से जलापूर्ति कर रहा है। धाम क्षेत्र में पानी के 222 व्यावसायिक कनेक्शन दिए गए हैं। एई प्रेमजी श्रीवास्तव ने बताया कि फिलहाल प्रति व्यक्ति 40 लीटर पानी रोज उपलब्ध कराया जा रहा है। मई-जून में स्रोतों में पानी की कमी होगी। तब श्रद्धालुओं की आवक भी बढ़ जाती है। ऐसे में पेयजल की किल्लत हो सकती है। उनका प्रयास रहेगा कि कंट्रोल सप्लाई कर सभी को काम चलाने लायक पानी मुहैया कराया जाए।
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15 जून तक चलने वाले पूर्णागिरि मेले में शुरूआती दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में रही। मंदिर समिति अध्यक्ष पं. भुवन चंद्र पांडेय का कहना है कि नवरात्र के दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी। इसके लिए मंदिर समिति और मेला प्रशासन तैयारी में जुटा है। मुख्य मंदिर से भैरव मंदिर तक दर्जनों होटल और धर्मशालाएं हैं। सौ से अधिक दुकानें भी हैं। श्रद्धालु इन होटलों व धर्मशालाओं में रुक कर स्नान आदि करते हैं। ऐसे में मेले के दौरान नियमित जलापूर्ति की जरूरत होती है। जल संस्थान एक दर्जन से अधिक स्रोतों और एक मिनी नलकूप से आठ टैंकों के माध्यम से जलापूर्ति कर रहा है। धाम क्षेत्र में पानी के 222 व्यावसायिक कनेक्शन दिए गए हैं। एई प्रेमजी श्रीवास्तव ने बताया कि फिलहाल प्रति व्यक्ति 40 लीटर पानी रोज उपलब्ध कराया जा रहा है। मई-जून में स्रोतों में पानी की कमी होगी। तब श्रद्धालुओं की आवक भी बढ़ जाती है। ऐसे में पेयजल की किल्लत हो सकती है। उनका प्रयास रहेगा कि कंट्रोल सप्लाई कर सभी को काम चलाने लायक पानी मुहैया कराया जाए।
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