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डीएम डॉ. अहमद इकबाल ने मरीजों की नब्ज टटोली
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।
Updated Mon, 25 Sep 2017 11:11 PM IST
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चंपावत जिला अस्पताल में मरीज की जांच करते डीएम डा.अहमद इकबाल।
- फोटो : amar ujala
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चिकित्सा लाइन से भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर बने चंपावत के डीएम डॉ. अहमद इकबाल ने सोमवार को अपनी मूल जिम्मेदारी से वक्त निकाल कर जिला अस्पताल का रुख किया और मरीजों की खिदमत की। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक आरके जोशी ने बताया कि करीब सवा घंटे तक अस्पताल में रहकर 15 मरीजों का इलाज किया। तकरीबन एक मरीज पर चार से पांच मिनट का समय लिया।
साथ ही उन्हें बीमारी से बचाव की जरूरी जानकारी भी दी। डीएम से इलाज कर लौटी बसंती देवी पहले कई बार अस्पताल आई, मगर आज तसल्ली से देखे जाने से हैरत में थीं। उन्हें रत्तीभर इस बात की भनक नहीं थी, कि इलाज करने वाले डॉक्टर डीएम है। ऐसे ही हाल अन्य मरीजों के भी थे। डीएम डॉ. इकबाल का कहना है कि ज्ञान के सदुपयोग का प्रयास किया है।
डॉक्टरों की कमी ने भी उन्हें मरीजों के इलाज के लिए सोचने का अवसर दिया। आगे जब भी वक्त मिलेगा, इस प्रयास को जारी रखेंगे। साथ ही जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए पहल की जाएगी।
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जिला अस्पताल में डॉक्टरों की स्थिति
डॉक्टरों के सृजित पद स्थायी कार्यरत संविदा डॉक्टर
27 (सीएमएस सहित) 11 2
सोमवार को जिला अस्पताल में मौजूद आठ डॉक्टर
सीएमएस डॉ. आरके जोशी, अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. हर्ष सिंह ऐरी, पैथोलॉजिस्ट डॉ. सुषमा नेगी, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एचसी त्रिपाठी, डॉ. श्वेता खर्कवाल, डॉ. इंद्रजीत पांडेय, डॉ. राखी बहादुर, डॉ. मो. उमर (संविदा), डॉ. रवि कुमार (संविदा)।
जिला अस्पताल से बाहर पांच डॉक्टर
1. वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता त्रिपाठी : बाल देखरेख अवकाश (सीसीएल)।
2. फिजीशियन डॉ. एमके सैनी चिकित्सा अवकाश में।
3. डॉ. राजेश गुप्ता : एक माह के लिए चार धाम यात्रा को कार्यमुक्त हुए।
4. सर्जन डॉ. आरपी खंडूरी विभागीय कार्य से देहरादून।
5. नेत्र विशेषज्ञ डॉ. उदय शंकर चौड़ामेहता शिविर में।
बीमार व्यवस्था को संजीवन मिलेगी?
मैदान और पहाड़ को मिलाकर बने चंपावत जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था लंबे समय से बदहाल है। जिला अस्पताल सहित 22 स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद लोग इलाज के लिए जिले के अस्पतालों के बजाय बाहर के अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं। बेबस मरीजों को न सामान्य वक्त में और न आपात वक्त पर इलाज मिल पा रहा है। जिले के छह अस्पतालों में एक भी डॉक्टर नहीं है।
सोमवार को डीएम के इलाज करने से क्या स्वास्थ्य सुविधा में बेहतरी आ सकेगी, इसके लिए तो इंतजार करना होगा। टनकपुर, लोहाघाट में दो करोड़ रुपये से अधिक लागत से निर्मित दो ट्रॉमा (आपातकालीन सुविधा युक्त अस्पताल) सेंटर के भवन बनने के बावजूद दो वर्ष से इनके खुलने का इंतजार हो रहा है। मगर उपकरण, चिकित्सकों की तैनाती न होने से इनके शुरू होने की उम्मीद फिलहाल नहीं है।
22 स्वास्थ्य केंद्रों में 96 डॉक्टरों के सापेक्ष महज 40 पर ही तैनाती है। जिला अस्पताल, लोहाघाट, टनकपुर जिले के तीन बड़े अस्पताल हैं, लेकिन इन तीनों स्वास्थ्य केंद्रों से भी लोगों को अमूमन प्राथमिक उपचार की ही सुविधा मिल पा रही है। जिला अस्पताल में रक्त संग्रहण केंद्र न होने की वजह से ऑपरेशन नहीं होते थे। जून से ये केंद्र शुरू हुआ, मगर जुलाई में निश्चेतक के तबादले ने सर्जन होते हुए ऑपरेशन की संभावनाओं पर पानी फेर दिया है।
वहीं टनकपुर में दो निश्चेतक हैं, पर सर्जन नहीं। जिले में एकमात्र फिजीशियन जुलाई में आए, मगर स्वास्थ्यगत कारणों से उनका स्थानांतरण हो चुका है। अलबत्ता अभी उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया है।
जिले के डॉक्टरविहीन छह अस्पताल
1. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चंपावत।
2. अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तामली।
3. अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनबसा।
4. राजकीय एलोपैथिक डिस्पेंसरी खेतीखान।
5. राजकीय एलोपैथिक डिस्पेंसरी रेगड़ू।
6. राजकीय एलोपैथिक डिस्पेंसरी टांण।
जिले में डॉक्टरों की जबर्दस्त कमी है। इसके चलते स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो रही है। टनकपुर या लोहाघाट से निश्चेतक को कुछ दिन जिला अस्पताल संबद्ध कर ऑपरेशन की व्यवस्था की जाएगी। ट्रॉमा सेंटर के लिए अभी उपकरण, पदों की तैनाती नहीं हो सकी है। अलबत्ता डीएम द्वारा खुद अस्पताल जाकर इलाज करने से स्वास्थ्य विभाग का मनोबल भी बढ़ा है।
- डॉ. एमएस बोहरा
मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
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साथ ही उन्हें बीमारी से बचाव की जरूरी जानकारी भी दी। डीएम से इलाज कर लौटी बसंती देवी पहले कई बार अस्पताल आई, मगर आज तसल्ली से देखे जाने से हैरत में थीं। उन्हें रत्तीभर इस बात की भनक नहीं थी, कि इलाज करने वाले डॉक्टर डीएम है। ऐसे ही हाल अन्य मरीजों के भी थे। डीएम डॉ. इकबाल का कहना है कि ज्ञान के सदुपयोग का प्रयास किया है।
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डॉक्टरों की कमी ने भी उन्हें मरीजों के इलाज के लिए सोचने का अवसर दिया। आगे जब भी वक्त मिलेगा, इस प्रयास को जारी रखेंगे। साथ ही जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए पहल की जाएगी।
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जिला अस्पताल में डॉक्टरों की स्थिति
डॉक्टरों के सृजित पद स्थायी कार्यरत संविदा डॉक्टर
27 (सीएमएस सहित) 11 2
सोमवार को जिला अस्पताल में मौजूद आठ डॉक्टर
सीएमएस डॉ. आरके जोशी, अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. हर्ष सिंह ऐरी, पैथोलॉजिस्ट डॉ. सुषमा नेगी, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एचसी त्रिपाठी, डॉ. श्वेता खर्कवाल, डॉ. इंद्रजीत पांडेय, डॉ. राखी बहादुर, डॉ. मो. उमर (संविदा), डॉ. रवि कुमार (संविदा)।
जिला अस्पताल से बाहर पांच डॉक्टर
1. वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता त्रिपाठी : बाल देखरेख अवकाश (सीसीएल)।
2. फिजीशियन डॉ. एमके सैनी चिकित्सा अवकाश में।
3. डॉ. राजेश गुप्ता : एक माह के लिए चार धाम यात्रा को कार्यमुक्त हुए।
4. सर्जन डॉ. आरपी खंडूरी विभागीय कार्य से देहरादून।
5. नेत्र विशेषज्ञ डॉ. उदय शंकर चौड़ामेहता शिविर में।
बीमार व्यवस्था को संजीवन मिलेगी?
मैदान और पहाड़ को मिलाकर बने चंपावत जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था लंबे समय से बदहाल है। जिला अस्पताल सहित 22 स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद लोग इलाज के लिए जिले के अस्पतालों के बजाय बाहर के अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं। बेबस मरीजों को न सामान्य वक्त में और न आपात वक्त पर इलाज मिल पा रहा है। जिले के छह अस्पतालों में एक भी डॉक्टर नहीं है।
सोमवार को डीएम के इलाज करने से क्या स्वास्थ्य सुविधा में बेहतरी आ सकेगी, इसके लिए तो इंतजार करना होगा। टनकपुर, लोहाघाट में दो करोड़ रुपये से अधिक लागत से निर्मित दो ट्रॉमा (आपातकालीन सुविधा युक्त अस्पताल) सेंटर के भवन बनने के बावजूद दो वर्ष से इनके खुलने का इंतजार हो रहा है। मगर उपकरण, चिकित्सकों की तैनाती न होने से इनके शुरू होने की उम्मीद फिलहाल नहीं है।
22 स्वास्थ्य केंद्रों में 96 डॉक्टरों के सापेक्ष महज 40 पर ही तैनाती है। जिला अस्पताल, लोहाघाट, टनकपुर जिले के तीन बड़े अस्पताल हैं, लेकिन इन तीनों स्वास्थ्य केंद्रों से भी लोगों को अमूमन प्राथमिक उपचार की ही सुविधा मिल पा रही है। जिला अस्पताल में रक्त संग्रहण केंद्र न होने की वजह से ऑपरेशन नहीं होते थे। जून से ये केंद्र शुरू हुआ, मगर जुलाई में निश्चेतक के तबादले ने सर्जन होते हुए ऑपरेशन की संभावनाओं पर पानी फेर दिया है।
वहीं टनकपुर में दो निश्चेतक हैं, पर सर्जन नहीं। जिले में एकमात्र फिजीशियन जुलाई में आए, मगर स्वास्थ्यगत कारणों से उनका स्थानांतरण हो चुका है। अलबत्ता अभी उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया है।
जिले के डॉक्टरविहीन छह अस्पताल
1. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चंपावत।
2. अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तामली।
3. अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनबसा।
4. राजकीय एलोपैथिक डिस्पेंसरी खेतीखान।
5. राजकीय एलोपैथिक डिस्पेंसरी रेगड़ू।
6. राजकीय एलोपैथिक डिस्पेंसरी टांण।
जिले में डॉक्टरों की जबर्दस्त कमी है। इसके चलते स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो रही है। टनकपुर या लोहाघाट से निश्चेतक को कुछ दिन जिला अस्पताल संबद्ध कर ऑपरेशन की व्यवस्था की जाएगी। ट्रॉमा सेंटर के लिए अभी उपकरण, पदों की तैनाती नहीं हो सकी है। अलबत्ता डीएम द्वारा खुद अस्पताल जाकर इलाज करने से स्वास्थ्य विभाग का मनोबल भी बढ़ा है।
- डॉ. एमएस बोहरा
मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।