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Champawat News: अयोग्य घोषित प्रत्याशी लड़ सकेंगे निकाय और पंचायत चुनाव
Sun, 10 Dec 2023 10:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sun, 10 Dec 2023 10:46 PM IST
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चंपावत। प्रदेश की नगर निकायों का कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रशासक काबिज हो चुके हैं लेकिन सैकड़ों प्रत्याशियों ने चुनाव में खर्च का ब्योरा निर्वाचन विभाग (पंचस्थानी) को नहीं दिया। राज्य निर्वाचन आयोग ने ऐसे उम्मीदवारों को अनर्ह (अयोग्य) कर दिया फिर भी उन्हें अगले चुनाव को लड़ने के लिए प्रतिबंधित नहीं किया जा सकेगा। इसकी वजह है राज्य निर्वाचन आयोग का 2019 में किया गया संशोधन। इस संशोधन में उम्मीदवारों को अनर्ह करने की समयावधि को छह साल से कम कर तीन साल कर दिया गया।
नवंबर 2018 में हुए चुनाव में खर्च विवरण नहीं देने वाले चंपावत जिले की चार निकायों में आठ प्रत्याशियों को आयोग ने अयोग्य घोषित किया। 2019 में हुए त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव में 634 उम्मीदवारों को भी इसी कारण अयोग्य करार दिया। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने निकाय प्रत्याशियों को आदेश जारी होने की तिथि तीन फरवरी 2020 से तीन साल के लिए अनर्ह घोषित किया था। इसी तरह पंचायती खर्च ब्योरा जमा न करने वालों को दो दिसंबर 2020 को तीन साल के लिए अयोग्य करार किया था। निकाय की अनर्हता की तिथि दो फरवरी 2023 और पंचायती चुनाव के अयोग्यता की तिथि एक दिसंबर 2023 को पूरी हो चुकी है। इस कारण अनर्ह घोषित ये उम्मीदवार आने वाले चुनावों में हिस्सा लेने के पात्र होंगे। संवाद
बाक्स
इस संशोधन से खर्च ब्योरा न देने वाले भी लड़ सकेंगे चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग ने 2019 में एक संशोधन किया था। संशोधित आदेश के मुताबिक खर्च का ब्योरा जमा नहीं करने वाले प्रत्याशियों को पंचायती और निकाय चुनाव लड़ने से अनर्ह घोषित करने की समयावधि को छह साल के बजाय तीन साल कर दिया गया था। दो चुनाव के बीच पांच साल का अंतराल होने से तीन वर्ष तक चुनाव लड़ने के प्रतिबंध का असर इस श्रेणी के प्रत्याशियों पर नहीं पड़ रहा है।
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कोट
परिणाम घोषित होने के 30 दिन के भीतर चुनावी खर्च जमा कराना होता है। नोटिस के बाद भी खर्च विवरण जमा नहीं करने वाले निकाय और त्रिस्तरीय पंचायतों के प्रत्याशियों को राज्य निर्वाचन आयोग ने तीन साल के लिए अयोग्य किया था। इन सभी प्रत्याशियों की अयोग्यता की अवधि पूरी हो चुकी है। और अब वे प्रत्याशी आगे के चुनाव में नामांकन कराने के लिए पात्र होंगे।
संजीव रावत, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचस्थानी), चंपावत।
खर्च ब्योरा जमा नहीं करने वाले प्रत्याशी और उन पर असर
-.2013 के निकाय चुनाव में चंपावत में खर्च ब्योरा जमा नहीं करने वाले 32 प्रत्याशी 2018 के चुनाव लड़ने के लिए अपात्र थे।
- 2014 के पंचायती चुनाव में ब्योरा जमा नहीं करने वाले 622 प्रत्याशी 2019 के चुनाव के लिए अपात्र थे।
- नवंबर 2018 में निकाय चुनाव में आठ प्रत्याशियों ने खर्च विवरण नहीं दिया लेकिन तीन साल की अनर्हता पूरी होने पर वे चुनाव लड़ने के हकदार होंगे।
- 2019 में हुए पंचायती चुनाव में 534 प्रत्याशियों ने खर्च ब्योरा जमा नहीं कराया, लेकिन तीन साल की अवधि पूरी होने से वे चुनाव लड़ने के लिए अपात्र नहीं होंगे।
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नवंबर 2018 में हुए चुनाव में खर्च विवरण नहीं देने वाले चंपावत जिले की चार निकायों में आठ प्रत्याशियों को आयोग ने अयोग्य घोषित किया। 2019 में हुए त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव में 634 उम्मीदवारों को भी इसी कारण अयोग्य करार दिया। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने निकाय प्रत्याशियों को आदेश जारी होने की तिथि तीन फरवरी 2020 से तीन साल के लिए अनर्ह घोषित किया था। इसी तरह पंचायती खर्च ब्योरा जमा न करने वालों को दो दिसंबर 2020 को तीन साल के लिए अयोग्य करार किया था। निकाय की अनर्हता की तिथि दो फरवरी 2023 और पंचायती चुनाव के अयोग्यता की तिथि एक दिसंबर 2023 को पूरी हो चुकी है। इस कारण अनर्ह घोषित ये उम्मीदवार आने वाले चुनावों में हिस्सा लेने के पात्र होंगे। संवाद
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इस संशोधन से खर्च ब्योरा न देने वाले भी लड़ सकेंगे चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग ने 2019 में एक संशोधन किया था। संशोधित आदेश के मुताबिक खर्च का ब्योरा जमा नहीं करने वाले प्रत्याशियों को पंचायती और निकाय चुनाव लड़ने से अनर्ह घोषित करने की समयावधि को छह साल के बजाय तीन साल कर दिया गया था। दो चुनाव के बीच पांच साल का अंतराल होने से तीन वर्ष तक चुनाव लड़ने के प्रतिबंध का असर इस श्रेणी के प्रत्याशियों पर नहीं पड़ रहा है।
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परिणाम घोषित होने के 30 दिन के भीतर चुनावी खर्च जमा कराना होता है। नोटिस के बाद भी खर्च विवरण जमा नहीं करने वाले निकाय और त्रिस्तरीय पंचायतों के प्रत्याशियों को राज्य निर्वाचन आयोग ने तीन साल के लिए अयोग्य किया था। इन सभी प्रत्याशियों की अयोग्यता की अवधि पूरी हो चुकी है। और अब वे प्रत्याशी आगे के चुनाव में नामांकन कराने के लिए पात्र होंगे।
संजीव रावत, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचस्थानी), चंपावत।
खर्च ब्योरा जमा नहीं करने वाले प्रत्याशी और उन पर असर
-.2013 के निकाय चुनाव में चंपावत में खर्च ब्योरा जमा नहीं करने वाले 32 प्रत्याशी 2018 के चुनाव लड़ने के लिए अपात्र थे।
- 2014 के पंचायती चुनाव में ब्योरा जमा नहीं करने वाले 622 प्रत्याशी 2019 के चुनाव के लिए अपात्र थे।
- नवंबर 2018 में निकाय चुनाव में आठ प्रत्याशियों ने खर्च विवरण नहीं दिया लेकिन तीन साल की अनर्हता पूरी होने पर वे चुनाव लड़ने के हकदार होंगे।
- 2019 में हुए पंचायती चुनाव में 534 प्रत्याशियों ने खर्च ब्योरा जमा नहीं कराया, लेकिन तीन साल की अवधि पूरी होने से वे चुनाव लड़ने के लिए अपात्र नहीं होंगे।