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एक साल बाद भी विस्थापित नहीं हो सके गल्लागांव के आपदा पीड़ित

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 24 May 2022 12:16 AM IST
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Disaster in Gallaganv Barakot
बाराकोट के गल्लागांव में बारिश के खौफ से आपदा को टालने के लिए आंगन में प्लास्टिक की पॉलीथिन बिछात - फोटो : LOHAGHAT
लोहाघाट (चंपावत)। भीषण आपदा की चपेट में बाराकोट ब्लॉक के गल्लागांव के लोगों का एक साल बाद भी सुरक्षित जगहों पर विस्थापन नहीं हो पाया है। थोड़ी सी बारिश होने या मौसम खराब होने पर आपदा पीड़ितों की चिंता बढ़ जाती है। पीड़ित लोग खौफ के साए में रतजगा करने के लिए मजबूर हैं।
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पिछले वर्ष अप्रैल में आई भारी आपदा में गल्ला गांव में भयंकर भूस्खलन हुआ था, जिसकी जद में गांव के कई मकान आ गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि उस समय प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को आवासीय भवनों से हटाकर विद्यालय में शरण देकर उनके विस्थापन की बात कही थी लेकिन एक साल बाद भी विस्थापन के आश्वासन कोरे साबित हुए हैं। अब बरसात का मौसम आने वाला है। इस कारण बादल गरजते ही ग्रामीण खौफ में आ जाते हैं। उन्हें अपने बच्चों, परिजनों एवं मवेशियों की जान-माल की सुरक्षा की चिंता सताने लगती है। ग्रामीण मकान और आंगन में आई दरार को तिरपाल से ढक कर आपदा को टालने की कोशिश कर रहे हैं। इन्हें डर है कि सीजन की पहली बारिश इनके लिए आफत की बारिश न बन जाए। बारिश में मोहन सिंह, भूपाल सिंह, त्रिलोक सिंह, दलीप सिंह, भूपाल सिंह, कल्याण सिंह, रमेश सिंह, भगवान सिंह, वजीर सिंह, रंजीत सिंह, विक्रम सिंह, उदय सिंह के आवासीय भवनों को खतरा बना है, ग्रामीण महिला हेमा देवी, पुष्पा बोहरा, शोभा बोहरा, नीमा बोहरा, भागीरथी देवी आदि ने सुरक्षा के उपाय करने की मांग की है।
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