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Champawat News: लंपी से पशुओं की मौत के अलग-अलग आंकड़े
Fri, 28 Jul 2023 10:54 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Fri, 28 Jul 2023 10:54 PM IST
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चंपावत। पूरे चार महीने तक चंपावत सहित प्रदेश के कई इलाकों में पशु लंपी रोग की चपेट में आए। बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत हुई, दुग्ध उत्पादन में कमी आई। लंपी से वास्तव में कितनी मौत हुईं? यह अब पहेली बना है। दो सरकारी विभागों के मौत के आंकड़े मेल नहीं खा रहे हैं।
लंपी वायरस से चंपावत जिले में हुई मौत के दोनों विभागों के आंकड़ों में भारी अंतर है। पशुपालन विभाग ने निदेशालय को 193 मौतों का आंकड़ा भेजा है। दुग्ध संघ का कहना है कि सिर्फ दुग्ध समितियों में पंजीकृत पशु उत्पादकों के ही 535 दुधारु मवेशियों की लंपी से मौत हुई है। दोनों विभागों के मौत के आंकड़ों में 177 प्रतिशत यानी 342 मवेशियों का अंतर है। संवाद
बाक्स
आंकड़ों में अंतर की ये हैं वजह
चंपावत। पशुपालन विभाग का कहना है कि मवेशियों की हर मौत का कारण लंपी नहीं माना जा सकता है। लंपी से हुई मौतों को प्रमाणित करना होगा। इलाज के अलावा मवेशी की पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के बगैर लंपी से मौत की पुष्टि नहीं की जा सकती है। दूसरी ओर दुग्ध संघ का कहना है कि समिति के मवेशियों की मौत लंपी से हुई है, लेकिन गांव के लोगों के लिए पोस्टमार्टम और अन्य प्रक्रियाओं को कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।
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आमने-सामने:
कोट
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार लंपी से 193 मवेशियों की मौत की पुष्टि हुई है। इस आंकड़े को मुख्यालय भी भेजा गया है। दूसरी बार सर्वे कराए जाने पर इस संख्या में मामूली वृद्धि हो सकती है लेकिन यह संख्या के किसी भी हाल में 300 से अधिक होने की संभावना नहीं है।
डॉ. डीके चंद, प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, चंपावत।
कोट
लंपी वायरस ने दुग्ध संघ को भारी नुकसान पहुंचाया है। दुग्ध संघ की समितियों में दर्ज 535 मवेशियों की मौत लंपी से हुई है। उत्पादकों को भारी झटका लगा है और दुग्ध संघ को रोजाना औसतन डेढ़ से दो हजार लीटर दूध की कमी आई है।
पुष्कर सिंह नगरकोटी, प्रबंधक, दुग्ध संघ, चंपावत।
कोट
लंपी से हुई मौत के दुग्ध संघ और पशुपालन विभाग के आंकड़ों में अंतर है। कई अन्य जिलों में भी दोनों विभागों के आंकड़ों में असमानता है। पूरे मामले को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संज्ञान में लाकर पशुपालकों के हित में निस्तारण कराया जाएगा।
केएस बृजवाल, नोडल अधिकारी, सीएम कैंप कार्यालय, चंपावत।
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लंपी वायरस से चंपावत जिले में हुई मौत के दोनों विभागों के आंकड़ों में भारी अंतर है। पशुपालन विभाग ने निदेशालय को 193 मौतों का आंकड़ा भेजा है। दुग्ध संघ का कहना है कि सिर्फ दुग्ध समितियों में पंजीकृत पशु उत्पादकों के ही 535 दुधारु मवेशियों की लंपी से मौत हुई है। दोनों विभागों के मौत के आंकड़ों में 177 प्रतिशत यानी 342 मवेशियों का अंतर है। संवाद
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आंकड़ों में अंतर की ये हैं वजह
चंपावत। पशुपालन विभाग का कहना है कि मवेशियों की हर मौत का कारण लंपी नहीं माना जा सकता है। लंपी से हुई मौतों को प्रमाणित करना होगा। इलाज के अलावा मवेशी की पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के बगैर लंपी से मौत की पुष्टि नहीं की जा सकती है। दूसरी ओर दुग्ध संघ का कहना है कि समिति के मवेशियों की मौत लंपी से हुई है, लेकिन गांव के लोगों के लिए पोस्टमार्टम और अन्य प्रक्रियाओं को कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।
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पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार लंपी से 193 मवेशियों की मौत की पुष्टि हुई है। इस आंकड़े को मुख्यालय भी भेजा गया है। दूसरी बार सर्वे कराए जाने पर इस संख्या में मामूली वृद्धि हो सकती है लेकिन यह संख्या के किसी भी हाल में 300 से अधिक होने की संभावना नहीं है।
डॉ. डीके चंद, प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, चंपावत।
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लंपी वायरस ने दुग्ध संघ को भारी नुकसान पहुंचाया है। दुग्ध संघ की समितियों में दर्ज 535 मवेशियों की मौत लंपी से हुई है। उत्पादकों को भारी झटका लगा है और दुग्ध संघ को रोजाना औसतन डेढ़ से दो हजार लीटर दूध की कमी आई है।
पुष्कर सिंह नगरकोटी, प्रबंधक, दुग्ध संघ, चंपावत।
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लंपी से हुई मौत के दुग्ध संघ और पशुपालन विभाग के आंकड़ों में अंतर है। कई अन्य जिलों में भी दोनों विभागों के आंकड़ों में असमानता है। पूरे मामले को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संज्ञान में लाकर पशुपालकों के हित में निस्तारण कराया जाएगा।
केएस बृजवाल, नोडल अधिकारी, सीएम कैंप कार्यालय, चंपावत।