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चंपावत के तीन बार डीएफओ रहे गुप्ता का विवादों से रहा है वास्ता
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निलंबित किए गए एके गुप्ता चंपावत में प्रभागीय वनाधिकारी रहते हुए छह साल के कार्यकाल में लगातार विवादों से घिरे रहे। वे चंपावत डिविजन में तीन बार (पहली बार 2008 से 2010 तक, 2015 से 2016 और जनवरी 2017 से सितंबर 2017 तक) डीएफओ रहे। उन पर लीसा निकासी, वन रक्षक भर्ती में धांधली समेत कई गंभीर आरोप हैं।
2 सितंबर 2017 को चीड़ की गुलिया के अवैध कारोबार में लिप्त एक ट्रक टनकपुर में पकड़ा गया। चार चेक पोस्टों को पार कर टनकपुर पहुंचे इस ट्रक में 50 क्विंटल के रवन्ने पर 130 क्विंटल गुलिया लदा था। इसके तुरंत बाद 21 सितंबर को सोशल मीडिया में कमीशन मांगने संबंधी ऑडियो वायरल हुआ था।
इस ऑडियो में गुप्ता और एक लीसा व्यवसायी के बीच हुई बातचीत का अंश रिकॉर्ड था। इसमें डीएफओ पर लीसा सप्लायर से प्रति टिन तीन रुपये कमीशन की मांग की जा रही थी। इस वीडियो के उजागर होने के बाद उनका यहां से प्रमुख वन संरक्षक कार्यालय में तबादला किया गया था। इससे पूर्व 2016 में वन आरक्षी भर्ती मामले में भी उन पर धांधली के आरोप लगे।
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सितंबर 2017 में हल्द्वानी वन प्रशिक्षण संस्थान के वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी को एके गुप्ता के कार्यकाल के घोटालों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। नवंबर 2017 में जांच अधिकारी ने शासन को विस्तृत रिपोर्ट सौंप उन्हें कई मामलों में दोषी ठहराया था लेकिन कार्रवाई के बजाय मामला लटका रहा।
अब अंतत: करीब सवा दो साल बाद उन पर कार्रवाई हुई है। वैसे एके गुप्ता पर 2009 के लोकसभा चुनाव में जिम्मेदारी में हीलाहवाली के आरोप लगने के बाद तत्कालीन जिला निर्वाचन अधिकारी एएस नयाल ने मुकदमा दर्ज करवाया था। हालांकि बाद में इस मामले में उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी।
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2 सितंबर 2017 को चीड़ की गुलिया के अवैध कारोबार में लिप्त एक ट्रक टनकपुर में पकड़ा गया। चार चेक पोस्टों को पार कर टनकपुर पहुंचे इस ट्रक में 50 क्विंटल के रवन्ने पर 130 क्विंटल गुलिया लदा था। इसके तुरंत बाद 21 सितंबर को सोशल मीडिया में कमीशन मांगने संबंधी ऑडियो वायरल हुआ था।
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इस ऑडियो में गुप्ता और एक लीसा व्यवसायी के बीच हुई बातचीत का अंश रिकॉर्ड था। इसमें डीएफओ पर लीसा सप्लायर से प्रति टिन तीन रुपये कमीशन की मांग की जा रही थी। इस वीडियो के उजागर होने के बाद उनका यहां से प्रमुख वन संरक्षक कार्यालय में तबादला किया गया था। इससे पूर्व 2016 में वन आरक्षी भर्ती मामले में भी उन पर धांधली के आरोप लगे।
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सितंबर 2017 में हल्द्वानी वन प्रशिक्षण संस्थान के वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी को एके गुप्ता के कार्यकाल के घोटालों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। नवंबर 2017 में जांच अधिकारी ने शासन को विस्तृत रिपोर्ट सौंप उन्हें कई मामलों में दोषी ठहराया था लेकिन कार्रवाई के बजाय मामला लटका रहा।
अब अंतत: करीब सवा दो साल बाद उन पर कार्रवाई हुई है। वैसे एके गुप्ता पर 2009 के लोकसभा चुनाव में जिम्मेदारी में हीलाहवाली के आरोप लगने के बाद तत्कालीन जिला निर्वाचन अधिकारी एएस नयाल ने मुकदमा दर्ज करवाया था। हालांकि बाद में इस मामले में उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी।