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डीडीएमओ को हटाने की मांग को लेकर कांग्रेसियों का प्रदर्शन
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चंपावत कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते कांग्रेस कार्यकर्ता।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते हुए जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी (डीडीएमओ) को हटाने की मांग उठाई। उन्होंने डीडीएमओ पर दैवी आपदा के समय में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। डीडीएमओ को तत्काल हटाए जाने पर जिले भर में आंदोलन चलाने की चेतावनी दी। उन्होंने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के माध्यम से हुए निर्माण कार्यों की उच्च स्तरीय जांच की मांग भी उठाई।
बृहस्पतिवार को कांग्रेस जिलाध्यक्ष पूरन कठायत और युकां जिलाध्यक्ष सूरज प्रहरी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट में डीडीएमओ और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि बारिश से जिले में खूब तबाही मची। 18 और 19 अक्तूबर को चंपावत जिला मुख्यालय में दो मकान ढहने से पांच लोगों की मौत हो गई थी। लेकिन मौके पर कही भी आपदा प्रबंधन का कोई भी व्यक्ति नहीं दिखा। पुलिस, एसएसबी जवानों और स्थानीय लोगों ने ही मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला। आपदा प्रबंधन की ओर से रेस्क्यू के लिए उपकरण भी उपलब्ध नहीं कराए गए। उन्होंने डीडीएमओ मनोज पांडेय को हटाने और उनके स्थान पर किसी अन्य अधिकारी को तैनात करने की मांग उठाई। प्रदर्शन करने वालों में प्रदेश महासचिव हरगोविंद बोहरा, सभासद रोहित बिष्ट, जिला महामंत्री विकास साह, ब्लाक अध्यक्ष प्रकाश सिंह बोहरा, पूर्व पीसीसी सदस्य उमेश खर्कवाल, हरीश चौधरी, सौरभ साह, चिराग फत्र्याल, अशोक कार्की, बाला दत्त थ्वाल, जगदीश जोशी, मुरली जोशी आदि शामिल रहे।
नियंत्रण कक्ष में समन्वय बना रहे थे डीडीएमओ
चंपावत। डीडीएमओ मनोज पांडेय का कहना है कि भारी बारिश के कारण आई आपदा के दौरान वह डीएम के निर्देश पर आपदा नियंत्रण कक्ष में सभी अधिकारियों और विभागों के साथ समन्वय बना रहे थे। इस दौरान फोन सेवा खराब होने के कारण संवादहीनता की स्थिति रही। उनका कार्य मौके पर जाकर मलबा हटाना नहीं है। संवाद
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बृहस्पतिवार को कांग्रेस जिलाध्यक्ष पूरन कठायत और युकां जिलाध्यक्ष सूरज प्रहरी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट में डीडीएमओ और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि बारिश से जिले में खूब तबाही मची। 18 और 19 अक्तूबर को चंपावत जिला मुख्यालय में दो मकान ढहने से पांच लोगों की मौत हो गई थी। लेकिन मौके पर कही भी आपदा प्रबंधन का कोई भी व्यक्ति नहीं दिखा। पुलिस, एसएसबी जवानों और स्थानीय लोगों ने ही मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला। आपदा प्रबंधन की ओर से रेस्क्यू के लिए उपकरण भी उपलब्ध नहीं कराए गए। उन्होंने डीडीएमओ मनोज पांडेय को हटाने और उनके स्थान पर किसी अन्य अधिकारी को तैनात करने की मांग उठाई। प्रदर्शन करने वालों में प्रदेश महासचिव हरगोविंद बोहरा, सभासद रोहित बिष्ट, जिला महामंत्री विकास साह, ब्लाक अध्यक्ष प्रकाश सिंह बोहरा, पूर्व पीसीसी सदस्य उमेश खर्कवाल, हरीश चौधरी, सौरभ साह, चिराग फत्र्याल, अशोक कार्की, बाला दत्त थ्वाल, जगदीश जोशी, मुरली जोशी आदि शामिल रहे।
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नियंत्रण कक्ष में समन्वय बना रहे थे डीडीएमओ
चंपावत। डीडीएमओ मनोज पांडेय का कहना है कि भारी बारिश के कारण आई आपदा के दौरान वह डीएम के निर्देश पर आपदा नियंत्रण कक्ष में सभी अधिकारियों और विभागों के साथ समन्वय बना रहे थे। इस दौरान फोन सेवा खराब होने के कारण संवादहीनता की स्थिति रही। उनका कार्य मौके पर जाकर मलबा हटाना नहीं है। संवाद
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