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खुद का भवन नहीं होने से एएनएम केंद्र से चल रही डंडा की पुलिस चौकी
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स्वास्थ्य विभाग के एएनएम केंद्र में चल रही डांडा की पुलिस चौकी। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। चंपावत जिले में पुलिस की एक चौकी ऐसी है, जिसके पास लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी छत भी नहीं है। गुरुद्वारे के लिए मशहूर रीठा साहिब के थाने के अंतर्गत आने वाली डांडा की यह रिपोर्टिंग पुलिस चौकी स्वास्थ्य विभाग के एएनएम केंद्र के एक हिस्से में संचालित की जा रही है, जिससे पुलिस को सुरक्षा संबंधी काम में दुश्वारी झेलनी पड़ती है।
जिला मुख्यालय से 51 किमी की सड़क दूरी के बाद 15 किमी पैदल दूरी पर स्थित डांडा गांव में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर इस गांव में वर्ष 2008 में पुलिस चौकी खोली गई। लेकिन गांव में जगह नहीं मिलने से इसे एएनएम केंद्र के एक हिस्से में संचालित किया गया। और तबसे यह इसी जगह पर चल रही है। सिर्फ दो कमरों में चौकी के संचालन से 15 गांवों में सुरक्षा के जिम्मे से लेकर अभिलेखीय कार्यों और असलहों को रखने जैसे जरूरी काम पुलिस को अड़चन आ रही है। साथ ही उनकी आवासीय व्यवस्था भी बस कामचलाऊ है।
दूसरी जगह पुलिस चौकी के चलने से कार्य संचालन में दुश्वारी आती है। लेकिन वहां मौजूद पुलिस कर्मी कठिन हालातों में भी अच्छा काम कर रहे हैं। डांडा पुलिस चौकी के लिए राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मुआयना कर जमीन को अंतिम रूप दे चुकी है। पांच लाख रुपये की लागत से नई जगह पुलिस चौकी का काम शुरू कराया जा रहा है। - देवेंद्र पींचा, एसपी, चंपावत।
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टीकाकरण में भी आ रही हैं अड़चन
चंपावत। डांडा के ऑग्जलरी नर्सिंग मिडवाइफ (एएनएम) केंद्र के भवन कस अधिकांश हिस्सा दूसरे विभाग के पास होने से गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के टीकाकरण में दिक्कत आती है। थक हारकर स्वास्थ्य विभाग गांव के पंचायतघर के जरिए टीकाकरण का काम करवाता है। ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र के भवन के बजाय पंचायतघर में टीकाकरण होने से असुविधा से डांडा और ककनई ग्राम पंचायत के डेढ़ हजार से अधिक लोगों को दुश्वारी होती है। इस केंद्र से लगे गांवों में 191 शिशु और गर्भवती महिलाएं हैं। वहीं सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि पुलिस विभाग से चौकी अन्यत्र शिफ्ट करने के लिए कहा गया है।
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जिला मुख्यालय से 51 किमी की सड़क दूरी के बाद 15 किमी पैदल दूरी पर स्थित डांडा गांव में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर इस गांव में वर्ष 2008 में पुलिस चौकी खोली गई। लेकिन गांव में जगह नहीं मिलने से इसे एएनएम केंद्र के एक हिस्से में संचालित किया गया। और तबसे यह इसी जगह पर चल रही है। सिर्फ दो कमरों में चौकी के संचालन से 15 गांवों में सुरक्षा के जिम्मे से लेकर अभिलेखीय कार्यों और असलहों को रखने जैसे जरूरी काम पुलिस को अड़चन आ रही है। साथ ही उनकी आवासीय व्यवस्था भी बस कामचलाऊ है।
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दूसरी जगह पुलिस चौकी के चलने से कार्य संचालन में दुश्वारी आती है। लेकिन वहां मौजूद पुलिस कर्मी कठिन हालातों में भी अच्छा काम कर रहे हैं। डांडा पुलिस चौकी के लिए राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मुआयना कर जमीन को अंतिम रूप दे चुकी है। पांच लाख रुपये की लागत से नई जगह पुलिस चौकी का काम शुरू कराया जा रहा है। - देवेंद्र पींचा, एसपी, चंपावत।
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टीकाकरण में भी आ रही हैं अड़चन
चंपावत। डांडा के ऑग्जलरी नर्सिंग मिडवाइफ (एएनएम) केंद्र के भवन कस अधिकांश हिस्सा दूसरे विभाग के पास होने से गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के टीकाकरण में दिक्कत आती है। थक हारकर स्वास्थ्य विभाग गांव के पंचायतघर के जरिए टीकाकरण का काम करवाता है। ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र के भवन के बजाय पंचायतघर में टीकाकरण होने से असुविधा से डांडा और ककनई ग्राम पंचायत के डेढ़ हजार से अधिक लोगों को दुश्वारी होती है। इस केंद्र से लगे गांवों में 191 शिशु और गर्भवती महिलाएं हैं। वहीं सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि पुलिस विभाग से चौकी अन्यत्र शिफ्ट करने के लिए कहा गया है।