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लड़ीधुरा महोत्सव:हजारों लोग बने रथ यात्राओं के साक्षी
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लड़ीधूरा महोत्सव में काकड़ गांव से माँ भगवती के रथ को मंदिर की ओर ले जाते श्रद्धालु।
- फोटो : LOHAGHAT
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बाराकोट के पांच दिनी लड़ीधूरा महोत्सव का देवी रथों के मंदिर परिक्रमा के बाद समापन हो गया है। हजारों लोग देवी रथ यात्राओं के साक्षी बने जिन्होंने मां का आशीर्वाद प्राप्त किया। सुहावने मौसम के बीच सुबह से ही श्रद्धालुओं का लड़ीधूरा मंदिर की आने का क्रम शुरू हो गया था। शनिवार रात को काकड़ और बाराकोट गांवों में देवी जागरण हुआ। इस दौरान लगी देव गद्दी में लोक देवताओं ने अवतरित होकर पीड़ित लोगों के कष्टों का निवारण कर उन्हें आशीर्वाद दिया।
रविवार दोपहर बाद काकड़ और बाराकोट से देवी रथों ने लड़ीधुरा मंदिर की ओर प्रस्थान किया। दुर्गम खड़ी चढ़ाई पार करते हुए काकड़ गांव से पहला देवी रथ दोपहर 2:35 बजे लड़ीधूरा मंदिर पहुंचा। देवी रथ में मां भगवती के रूप में कल्याण सिंह अधिकारी सवार होकर श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद दे रहे थे।
तीन बजे बाराकोट से दूसरा देवी रथ लंबी कठिन दूरी पार कर लड़ीधुरा मंदिर पहुंचा जिसमें मां भगवती के रूप में गुड्डी देवी, 52 वीर के रूप में रंजीत सिंह अधिकारी, कैलपाल के रूप में नवीन सिंह अधिकारी सवार थे। दोनों ही रथों के पीछे महिलाएं मां के जयकारे लगाते हुए चल रही थीं। देवी रथों द्वारा मंदिर की परिक्रमा करने के बाद लड़ीधुरा महोत्सव का समापन किया गया।
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मेले के चलते विभिन्न स्थानों से बढ़ी संख्या में व्यापारी पहुंचे हुए थे। पुलिस अधीक्षक धीरेंद्र गुंज्याल के नेतृत्व में पुलिस कर्मी शांति-सुरक्षा व्यवस्था में जुटे रहे। महोत्सव समिति के अध्यक्ष नगेंद्र कुमार जोशी, जगदीश अधिकारी, राजू अधिकारी, विनोद सिंह, ऋतेश वर्मा, प्रकाश अधिकारी, रमेश जोशी, नकुल जोशी, रजनीश जोशी, रजत वर्मा, नीरज वर्मा, देवेश जोशी, मनोज वर्मा, नवीन चंद्र जोशी, दुर्गेश जोशी, कौस्तुब अधिकारी, शुभम नाथ, संजय सिंह, जगदीश जोशी आदि ने आयोजन समिति की ओर से सभी का स्वागत किया।
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रविवार दोपहर बाद काकड़ और बाराकोट से देवी रथों ने लड़ीधुरा मंदिर की ओर प्रस्थान किया। दुर्गम खड़ी चढ़ाई पार करते हुए काकड़ गांव से पहला देवी रथ दोपहर 2:35 बजे लड़ीधूरा मंदिर पहुंचा। देवी रथ में मां भगवती के रूप में कल्याण सिंह अधिकारी सवार होकर श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद दे रहे थे।
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तीन बजे बाराकोट से दूसरा देवी रथ लंबी कठिन दूरी पार कर लड़ीधुरा मंदिर पहुंचा जिसमें मां भगवती के रूप में गुड्डी देवी, 52 वीर के रूप में रंजीत सिंह अधिकारी, कैलपाल के रूप में नवीन सिंह अधिकारी सवार थे। दोनों ही रथों के पीछे महिलाएं मां के जयकारे लगाते हुए चल रही थीं। देवी रथों द्वारा मंदिर की परिक्रमा करने के बाद लड़ीधुरा महोत्सव का समापन किया गया।
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मेले के चलते विभिन्न स्थानों से बढ़ी संख्या में व्यापारी पहुंचे हुए थे। पुलिस अधीक्षक धीरेंद्र गुंज्याल के नेतृत्व में पुलिस कर्मी शांति-सुरक्षा व्यवस्था में जुटे रहे। महोत्सव समिति के अध्यक्ष नगेंद्र कुमार जोशी, जगदीश अधिकारी, राजू अधिकारी, विनोद सिंह, ऋतेश वर्मा, प्रकाश अधिकारी, रमेश जोशी, नकुल जोशी, रजनीश जोशी, रजत वर्मा, नीरज वर्मा, देवेश जोशी, मनोज वर्मा, नवीन चंद्र जोशी, दुर्गेश जोशी, कौस्तुब अधिकारी, शुभम नाथ, संजय सिंह, जगदीश जोशी आदि ने आयोजन समिति की ओर से सभी का स्वागत किया।