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नियम को ताक पर रख होता है तांगों का संचालन
अमर उजाला ब्यूराे टनकपुर (चंपावत)।
Updated Wed, 04 Jul 2018 11:36 PM IST
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बनबसा में एक तांगे में सवार लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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नैनीताल हाईकोर्ट ने जनहित याचिका की सुनवाई में बनबसा से नेपाल के बीच चलने वाली घोड़ागाड़ी के घोड़ों के स्वास्थ्य की नियमित जांच कर प्रमाणपत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं। जहां नागरिकों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया, वहीं तांगा चालक इससे ज्यादा खुश नजर नहीं आए। लोगों के अनुसार इससे पशुओं का उत्पीड़न नहीं होगा।
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बनबसा से भारत-नेपाल के बीच आवागमन को तीन दशकों से अधिक समय से तांगा ही प्रमुख साधन रहा है। बनबसा से नेपाल के बीच संचालित होने वाले तांगों के स्वामी भले ही भारतीय हैं, लेकिन नेपाल में इनके संचालन के लिए कंचनपुर जिला मुख्यालय महेंद्रनगर स्थित भीमदत्त नगर पालिका द्वारा लाइसेंस दिया जाता है।
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तांगों को भारत में संचालन की अनुमति कहा से मिलती है, इसकी जानकारी नहीं है। एक तांगे पर सामान के साथ दस से बारह सवारी लाद देना आम बात है। तांगा स्वामियों द्वारा घोड़ों का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराया जाता है। तांगा यूनियन के महामंत्री प्रकाश चंद के अनुसार यूनियन में करीब 150 तांगे पंजीकृत हैं। तांगा यूनियन बनबसा के संरक्षक किशन चंद ने बताया कि न्यायालय के कठोर निर्णय से तांगा स्वामी और चालक आहत हैं। करीब 250-300 परिवारों की रोजी रोटी प्रभावित होगी।
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कोट - घोड़ों में पाए जाने वाले ग्लैंडरस रोग बहुत ही घातक होता है। इससे लिए समय-समय पर घोड़ों के स्वास्थ्य का परीक्षण कराया जाना आवश्यक है। बनबसा में एक दशक पूर्व ग्लैंडरस रोग पॉजीटिव पाया गया था। ग्लैंडरस रोग घोड़ों के लार, खून आदि से मनुष्य में भी फैलता है। एक दूसरे देश में पशुओं को बिना क्वारनटाइन जांच नहीं ला लेजा सकते हैं। - डॉ. डीके शर्मा, पशु चिकित्साधिकारी टनकपुर।