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सुरक्षा में खतरा है भारत-नेपाल की खुली सीमा
राजेश देउपा/अमर उजाला, टनकपुर
Updated Tue, 15 Sep 2015 10:22 PM IST
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भारत-नेपाल की खुली सीमा सुरक्षा में छेद का काम कर रही है। तस्करी के माध्यम से दोनों देशों की अर्थ व्यवस्था पर असर डालने के साथ ही घुसपैठ के लिए भारत विरोधी ताकतों की नजर भी इस खुली सीमा पर गढ़ी रहती है। वैधानिक मार्ग के अलावा कई चोर रास्तों से भी दोनों देशों के बीच आसानी से आवाजाही की जा सकती है। नेपाल के साथ दोस्ताना संबंधों के चलते दोनों देशों के बीच खुली आवाजाही होती है।
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दोनों देशों की सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां भी तैनात हैं। दोनों देशों का सुरक्षा और खुफिया तंत्र अलर्ट रहता है, बावजूद इसके समय-समय पर पकड़ में आने वाली अवैधानिक गतिविधियों से सुरक्षा पर सवाल भी खड़े होते रहे हैं। वन संपदाओं का अवैध दोहन, वन्यजीवों का शिकार, वन्यजीव अंगों, मादक पदार्थों और अवैध हथियारों के कई मामले भी इस बॉर्डर में पकड़े जा चुके हैं। इस तरह अपराधों का रोकने में खुली सीमा बाधक बन रही है।
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चंपावत और ऊधमसिंह नगर जिले की करीब 92 किलोमीटर खुली सीमा नेपाल से लगी है, जिसमें कई चोर रास्ते भी हैं। अक्तूबर से मार्च तक शारदा में जलस्तर कम रहता है। इस अवधि में अपराधी और तस्कर आसानी से नदी आर-पार कर चोर रास्तों से घुसपैठ करते हैं। सीमा पर एसएसबी तैनात हैं और नियमित पेट्रोलिंग भी करती है, बावजूद इसके घुसपैठ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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पर्वतीय भू-भाग में महाकाली है सीमा रेखा
भारत-नेपाल सीमा को चंपावत और पिथौरागढ़ जिले के पर्वतीय भू-भाग में महाकाली नदी विभाजित करती है, जबकि टनकपुर के बूम से लेकर नीचे मैदान क्षेत्र से लगी सीमा के विभाजन को सीमा स्तंभ लगाए गए हैं।
चोर रास्तों से आवाजाही पर लगे प्रतिबंध
सेना की 170 आर्टलरी के रिटायर्ड हवलदार एवं समाजसेवी उत्तम चंद ने कहा कि एक जैसी संस्कृति और रोटी-बेटी का संबंध होने से भारत-नेपाल के बीच खुली आवाजाही तो ठीक है, लेकिन चोर रास्तों से आवाजाही कभी भी घातक साबित हो सकती है। दोनों देशों की सरकार को चाहिए कि बॉर्डर पर कुछ और वैधानिक मार्ग बनाकर चोर रास्तों से आवाजाही पर पूूूर्णरूप से रोक लगाई जाए। ऐसा कदम दोनों देशों की सुरक्षा में हितकर रहेगा।
बॉर्डर में पकड़े जा चुके हैं कई गैर कानूनी अपराध
नेपाल सीमा से लगे टनकपुर और बनबसा में डेढ़ दशक में नकली करेंसी के डेढ़ दर्जन मामले पकड़े जा चुके हैं। वहीं पुलिस और एसएसबी ने चरस तस्करी के करीब दो दर्जन से ज्यादा मामले पकड़े हैं। वर्ष 2014 में पकड़े गए आतंकी टुंडा को भी दिल्ली पुलिस ने बनबसा बार्डर से पकड़ने का दावा किया था। वहीं बूम रेंज के खर्राटाक जंगल में नेपाली शिकारियों की दस्तक आए दिन सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बनी रहती है। तीन साल पहले 2012 मेें वन विभाग, एसएसबी एवं पुलिस की संयुक्त कांबिग टीम और नेपाली वन्यजीव शिकारियों में मुठभेड़ भी हुई थी, जिसमें वन्यजीव तस्कर अपनी बंदूकें छोड़कर नेपाल फरार हो गए थे। बरामद बंदूकों को वन विभाग ने जब्त कर लिया था। चार साल पहले नेपाल के सीमांत गड्डा चौकी में डंप करीब चालीस किलोग्राम चरस भी नेपाल पुलिस ने बरामद कर मादक पदार्थों की तस्करी का भंडाफोड़ किया था।